किसान आंदोलन में हिंसा के बाद अब एक दर्जन नेता दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ने वाले हैं!

नई दिल्ली। दो माह तक शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे किसान आंदोलन ने मंगलवार को उस वक्त हिंसक रूप ले लिया, जब किसान रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड करने ही वाले थे। दिल्ली पुलिस ने रोकने का भरकस प्रयास किया, किन्तु हिंसक भीड़ ने सारे बेरिकेड्स तोड़कर दिल्ली में प्रवेश किया।

26 जनवरी को किसान संगठनों के द्वारा ट्रैक्टर परेड की घोषणा की गई थी, जिसके लिए दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार ने दिल्ली की आउटर रिंग रोड के लिए अनुमति दे दी थी। मंगलवार को जैसे ही इस का आयोजन शुरू हुआ तो सिंघु बॉर्डर से आने वाली सड़क से रिंग रोड पर जाने के बजाय सैकड़ों की संख्या में उपद्रवी किसान ट्रैक्टर के साथ लाल किले की तरफ कूच कर गए।

इसके बाद किसानों ने लाल किले के ऊपर कब्जा कर लिया और वहां पर तिरंगे झंडे का अपमान करते हुए दो अलग-अलग धार्मिक झंडे फहराए गए और साथ ही वहां पर अनेक तरह के नारे लगाकर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया गया।

दिल्ली में जोरदार हिंसा होने के कारण संयुक्त किसान संघ के द्वारा ऐसे हिंसक प्रदर्शन से खुद को अलग कर लिया गया। हालांकि भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि यह केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की खुद की साजिश थी।

दूसरी जो किसान नेता थे उनके द्वारा भी हिंसक प्रदर्शन से खुद को अलग करते हुए कहा गया कि आंदोलन में कुछ अराजक तत्व घुस गए हैं, जिसके चलते 62 दिन से शांतिपूर्ण चल रहा आंदोलन बदनाम होने के कगार पर पहुंच गया है।

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हिंसा की घटनाओं को बढ़ता देख गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों के साथ दोपहर बाद एक बैठक का आयोजन किया गया, जिस के साथ ही दिल्ली में कई जगह इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई और दिल्ली में अतिरिक्त जाब्ता भी तैनात किया गया है। साथ ही हरियाणा में भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।

बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस और किसान नेताओं के बीच आउटर रिंग रोड पर ही ट्रैक्टर परेड का आयोजन करने समेत अनेक गाइड लाइन के ऊपर समझौता हुआ था, लेकिन उपद्रवी लोगों के द्वारा उसका पालन नहीं किया गया और पूरी परेड धरी की धरी रह गई। किसान नेताओं को वापस लौटना पड़ा, जहां उनका आंदोलन जारी है।

बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने इस प्रकरण में एक दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए हैं, जिनमें सैकड़ों उपद्रवी युवाओं को टारगेट किया गया है। अब दिल्ली पुलिस इनकी धरपकड़ शुरू करने वाली है।

बताया जा रहा है कि सिंघु बॉर्डर और शाहजहांपुर में जहां किसान 2 महीने से बैठे हुए हैं, वहां पर भी अब केंद्र सरकार सख्ती से पेश आएगी और इसके साथ ही यह किसान आंदोलन खत्म हो जाएगा।