कृषि कानून: सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी खत्म नहीं होगा किसान आंदोलन

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों पर रोक लगाने के बाद भी किसानों का आंदोलन खत्म नहीं होगा। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि कानून रदद् होने तक आंदोलन जरी रहेगा।

बता दें कि तीनों कानूनों पर रोक लगाने के साथ ही शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि 4 सदस्य कमेटी बनाई गई है, जो एक साल तक इन कानूनों की खामियों को लेकर किसान संगठनों के साथ बात कर समाधान निकालेगी।

इस कमेटी में जितेंद्र सिंह मान (प्रेसिडेंट) बीकेयू, डॉ प्रमोद कुमार जोशी (रिसर्चर),
अशोक गुलाटी (एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स) और अनिल धनवट (शिवकेरी संगठन महाराष्ट्र) को शामिल किया गया है।

उल्लेखनीय है कि इन 3 कृषि कानूनों के खिलाफ 49 दिन से किसानों का आंदोलन जीटी करनाल रोड सिंघु बॉर्डर पर चल रहा है। इसके साथ ही करीब 35 दिन से राजस्थान-हरियाणा की शाजापुर बॉर्डर पर विभिन्न किसान संगठन राष्ट्रीय राजमार्ग रोड पर बैठे हुए हैं।

आंदोलन में शामिल किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार इन तीनों कानूनों के माध्यम से किसानों की जमीन हड़प कर अडानी-अंबानी को देना चाहती है। इसलिए जब तक यह तीनों कानून रद्द नहीं होंगे, तब तक किसानों का आंदोलन खत्म नहीं होगा।

इससे पहले किसान संगठनों और सरकार के विभिन्न मंत्रियों के बीच 9 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन किसी समाधान पर नहीं पहुंचने के कारण सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई थी, जिस पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगा दी है।

सोशल मीडिया पर अब एक अलग तरह की बहस छिड़ गई है। किसान आंदोलन को समर्थन करने वाले लोगों का कहना है कि मोदी सरकार अपनी इज्जत बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के द्वारा इन तीनों कानूनों पर रोक लगाई है, क्योंकि इसके बिना किसानों का आंदोलन खत्म नहीं हो रहा था।

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दूसरी ओर मोदी सरकार के द्वारा बनाए गए इन तीनों कानूनों का समर्थन करने वाले किसानों का कहना है कि संसद के द्वारा बनाए गए कानूनों का इस तरह से सुप्रीम कोर्ट के द्वारा रोक नहीं लगाई जानी चाहिए थी, बल्कि अलोकतांत्रिक तरीके से हाईवे जाम कर के बैठे हुए किसान संगठनों को सड़क से हटाना चाहिए था।