PM Narendra Modi ने कहा MSP कभी खत्म नहीं होगी, किसानों को भ्रमित किया जा रहा है

Jaipur. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए 6 महीने पहले लागू किए गए तीन कृषि सुधार कानूनों के बारे में विस्तार से बात की।

प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों और दूसरे संगठनों द्वारा किसानों में फैलाए जा रहे भ्रम के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए किसानों को बहुत साफ शब्दों में कहा कि इन तीन कृषि कानूनों की वजह से किसानों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा, बल्कि किसानों को अपनी उपज बेचने की स्वतंत्रता होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2014 से पहले की सरकार के समय देश में शहद का उत्पादन करीब 70 हजार मैट्रिक टन उतपादन होता था, आज 120000 मेट्रिक टन शहद का उत्पादन हो रहा है। जितना शहद पहले की किसान सरकार के समय निर्यात करता था, आज उससे दोगुना शहद निर्यात कहते हैं।

एग्रीकल्चर में मछली पालन के आसन तरीके हो सकते हैं, जिसमें कम लागत में सबसे ज्यादा मुनाफा होता है। मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए हमारी सरकार ब्लू रिवोल्यूशन स्कीम कुछ समय पहले ही 20 हज़ार करोड़ की लागत से शुरू की है।

प्रधानमंत्री मछली पालन योजना भी शुरू की इन्हीं प्रयासों का ही नतीजा है कि देश में मछली उत्पादन के पिछले सारे रिकॉर्ड टूटे गए हैं। अगले 3-4 साल में मछली निर्यात को एक करोड़ से ज्यादा टन उतपादन कर रहा है। हमारी सरकार ने जो कदम उठाए हैं, अगर मैं वह सारे कदम गिराने जाऊं तो शायद समय बहुत कम पड़ जाएगा, लेकिन मैंने कुछ उदाहरण इसलिए दी ताकि आप हमारी सरकार की नियत को परख सकते हैं, हमारे ट्रैक रिकॉर्ड को देख सकें।

हमारे नेक इरादों को समझ सके। इसी आधार पर मैं विश्वास से कहता हूं कि हमने हाल में जो कृषि सुधार किए हैं, उसमें और विश्वास का कारण ही नहीं है, झूठ के लिए कोई जगह नहीं। मैं अब आपसे कृषि सुधारों के बाद बोलने जा रहा हूं।

सबसे पहले मैं सबसे बड़े झूठ के बारे में बात करूंगा। बार-बार झूठ को फैलाया जा रहा है, बार-बार बोला गया है, जहां मौका मिले वहां बोला गया है। मैंने कहा था हमारी ही सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया है। एमएसपी खत्म करनी होती तो हम स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू ही क्यों करते?

हमने किसान को आज़ादी दी है। हम फसल बुवाई से पहले ही एमएसपी घोषित करने का काम किया है, इससे किसान को भी आसानी होती हैं, उन्हें भी पहले पता चल जाता है कि इस फसल पर कितनी एमएसपी मिलने वाली है, वह कुछ बदलाव करना चाहता है तो उसे सुविधा होती है।

साथियों से 6 महीने से ज्यादा का समय हो गया, जब यह कानून लागू किए गए। कानून को लागू होने के बाद भी वैसे ही एमएसपी की घोषणा की गई, जैसे पहले होती थी। कोरोना महामारी से लड़ाई के दौरान भी यह काम पहले की तरह किया गया। कानून बनने के बाद अगर कानून लागू होने के बाद भी एमएसपी की खरीदी हुई।

अब इस बात को कौन स्वीकार करेगा कि बंद हो जाएगी और इसलिए मैं कहता हूं इससे बड़ा कोई झूठ नहीं हो सकता, इससे बड़ा कोई षड्यंत्र नहीं हो सकता। इसलिए मैं देश के प्रत्येक किसान को विश्वास दिलाता हूं कि पहले जैसे एमएसपी दी जाती थी, वैसे ही दी जाती रहेगी, एमएसपी बंद नहीं होगी, समाप्त नहीं होगी।

साथियों अब मैं आपको वो आंकड़े बताता हूं, जो दूध का दूध और पानी का पानी कर देंगे। पिछली सरकार के समय गेहूं पर एमएसपी 1400 प्रति क्विंटल थी हमारी सरकार प्रति क्विंटल गेहूं पर 1975 खरीद रही है। पिछली सरकार के समय धान पर एमएसपी थी 1310 प्रति क्विंटल थी, हमारी सरकार प्रति क्विंटल धान पर करीब 1870 दे रही है।

पिछली सरकार में ज्वार की दाल पर एसपी 1540 में दे रही थी, अब 2640 दे रही है। पिछली सरकार के समय मसूर की दाल पर एमएसपी 1950 रूपी हमारी सरकार प्रति क्विंटल मसूर दाल पर 5100 एमएसपी दे रही है।

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पिछली सरकार के समय चने पर एमएसपी 3100, हमारी सरकार अब जाने पर प्रति क्विंटल 5100 में दे रही है। पिछली सरकार के समय तूर दाल पर एम एस पी 4300 प्रति क्विंटल, हमारी सरकार तूर डाल पर प्रति क्विंटल ₹6000 में दे रही है।

पिछली सरकार के समय मूंग दाल 4500 प्रति क्विंटल, हमारी सरकार मूंग दाल पर करीब 7200 प्रति क्विंटल एमएसपी दे रही है। यह इस बात का सबूत है कितनी गंभीरता दे देती एमएसपी समय-समय पर बढ़ाने पर कितना जोर देती है। इसके साथ ही सरकार का जोर इस बात पर भी रहा है कि ज्यादा से ज्यादा अनाज की खरीदारी एमएसपी खरीद की जाए।

पिछली सरकार ने अपने 5 साल में किसानों से लगभग 1700 लाख मैट्रिक टन धान खरीदा था। हमारी सरकार ने अपने 3 हज़ार लाख मैट्रिक टन धान किसानों से खरीद की है। पिछली सरकार ने अपने 5 साल में करीब पौने चार लाख मेट्रिक टन तिलहन खरीदा था, हमारी सरकार ने अपने 5 साल में छप्पन लाख मैट्रिक टन से ज्यादा एमएसपी खरीदा है। यानी हमारी सरकार ने न सिर्फ एमएसपी में वृद्धि की, बल्कि ज्यादा मात्रा में किसानों से उनकी उपज का सबसे बड़ा लाभ भी दिया।

इसका लाभ यह हुआ है कि किसानों के खाते में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा पैसा पहुंचा। पिछली सरकार के 5 साल में किसानों को धान और गेहूं की खरीद में 374000 करोड़ दिया, जबकि हमारी सरकार ने इन 5 साल में गेंहू और धान की खरीद कर रहे किसानों को 8 लाख करोड़ रुपये दिए हैं।

राजनीति के लिए किसानों का उपयोग करने वाले लोगों के साथ क्या बर्ताव किया? दलहन की खेती, साल 2014 में किस प्रकार देश में दालों का संकट था? देश में मचे हाहाकार के बीच दाल विदेशों से मंगाई जाती थी। हर रसोई का खर्च दाल की बढ़ती कीमतों के साथ बढ़ रहा था। जिस देश में दुनिया में सबसे ज्यादा दाल की खपत है, उस देश में दाल पैदा करने वाले किसानों को तबाह करने में इन लोगों ने कोई कसर नहीं कर रखी थी।

किसान परेशान हो रहे थे और वो मौज ले रहे थे। जो दूसरे देशों से दाल मंगवाने के काम में उनको मजा आता था। यह बात मैं मानता हूं कि कभी कभी प्राकृतिक आपदा आ जाए, अचानक संकट आ जाये तो डाल मंगवाई जा सकती है, देश के नागरिकों को भूखा नहीं लगा सकता, लेकिन यह लोग दाल पर ज्यादा एमएसपी भी नहीं देते थे और उसकी खरीद भी नहीं करते थे।

हालत यह थी कि 2014 से पहले के 5 साल, उनके 5 साल उन्होंने सिर्फ डेढ़ लाख मैट्रिक दाल ही किसानों से खरीदी डेढ़ लाख ही। जब 2014 में हमारी सरकार आई तो नीति भी बदली और निर्णय भी लिए। दाल की पैदावार के लिए प्रोत्साहित किया। भाई और बहनों हमारी सरकार ने किसानों से पहले की तुलना में 112 लाख मैट्रिक टन, दुबारा बोलता हूं 112 लाख मैट्रिक टन दाल एनएससी पर खरीदी, सोचिए माध्यम सीधे ले गए 112 लाख मैट्रिक टन।

उन लोगों ने अपने 5 सालों में दाल किसानों को, दाल पैदा करने वाले किसानों को कितना रुपया दिया 650 करोड़ रुपये। हमारी सरकार ने क्या किया, हमने करीब करीब 50000 करोड रुपए दाल पैदा करने वाले किसानों को दिया।

कहां 650 करोड़, कहां 50,000 करोड़ रुपये? आज दाल के किसान को भी ज्यादा पैसा मिल रहा है, दाल की कीमतें भी कम हुई है, जिससे गरीब को सीधा फायदा हो रहा है। जो लोग किसानों को न हीं दे सके, एमएसपी ढंग से खरीद सके, वो किसानों को गुमराह कर रहे हैं।

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सुधारों से जुड़ा एक और झूठ फैलाया जा रहा है कि एपीएमसी, यानी हमारी मंडियों को लेकर, हमने कानून में क्या किया? हमारे कानून में किसानों को आजादी दी है, नया विकल्प दिया है। अगर देश में किसी को साबुन बेच रहा हो, तो सरकार यह तय नहीं करती सिर्फ किसी दुकान पर भेज सकते हो, अगर किसी को स्कूटर बेचना हो तो सरकार यह नहीं करती किसी डीलर को भेज सकते हो, लेकिन पिछले 70 साल से सरकार किसानों को यह जरूर बताती रही है कि आप सिर्फ इसी मंडी में अपना अनाज भेज सकते हो, मंडी के अलावा किसान चाह कर भी अपनी फसल कहीं और नहीं देख सकता था।

नए कानून में हमने सिर्फ इतना कहा है कि किसान अगर उसको फायदा नजर आता है तो पहले की तरह जाकर मंडी में भेजें और बाहर उसको फायदा होता है तो मंडी के बाहर जाने का उसको हक मिलना चाहिए।

क्या उसकी मर्जी को लोकतंत्र में मेरे किसान भाई को इतना हक नहीं हो सकता है? अब जहां किसान को लाभ मिलेगा, वहां वह अपनी उपज मंडी में चालू है, मंडी में जाकर के भेज सकता है, जो पहले था वह भी कर सकता है। किसान की मर्जी पर करेगा कि नए कानून के बाद तो किसान ने अपना लाभ देखकर अपनी उपज को भेजना शुरू भी कर दिया।

हाल ही में एक जगह पर धान पैदा करने वाले किसानों ने मिलकर एक चावल कंपनी के साथ समझौता किया है, इससे उनकी आमद नहीं 20% बढ़ी है और जगह पर आलू के 1000 किसानों ने मिलकर एक कंपनी से समझौता किया है, कंपनी ने उन्हें लागत में 35% ज्यादा की गारंटी दी है।

एक और जगह की खबर में पढ़ रहा था, जहां एक किसान ने खेत में लगी मिर्च और केला सीधे बाजार में बेचा तो उसे पहले से दोगुनी कीमत मिली। आप मुझे बताइए देश के प्रत्येक किसान को लाभ मिलना चाहिए, या नहीं मिलना चाहिए?

किसानों को सिर्फ मंडी उनसे बांधकर बीते दशकों में जो किया गया, कृषि सुधार कानून उसका प्रायश्चित कर रहे हैं। नए कानून को लागू होने के बाद 6 महीने हो गए, कानून लागू हो गया। हिंदुस्तान के किसी कोने में कहीं पर भी एक भी मंडी बंद नहीं हुई।

सच्चाई तो यह है कि हमारी सरकार एपीएमसी को आधुनिक बनाने पर उनके कंप्यूटर पर 500 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर रही है। साथियों नए कृषि सुधारों को लेकर तीसरा बहुत बड़ा झूठ चल रहा है फार्मिंग एग्रीमेंट को लेकर। देश में फार्मिंग एग्रीमेंट कोई नई चीज नहीं है। क्या कोई नया कानून बनाकर हम अचानक फार्मिंग एग्रीमेंट को लागू कर रहे हैं? जी नहीं।

हमारे देश में बरसों से फार्मिंग एग्रीमेंट की व्यवस्था चल रही है। एक-दो नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में पहले से फार्मिंग एग्रीमेंट हो रहा है।

मुझे एक अखबार की रिपोर्ट में 8 मार्च 2019 की, उसमें पंजाब कांग्रेस सरकार किसानों और मल्टीनेशनल कंपनी के बिवाह 800 करोड़ रुपये का जश्न मना रही है। पंजाब के मेरे किसान भाई बहनों की खेती में ज्यादा से ज्यादा निवेश हो, यह हमारी सरकार के लिए भी खुशी की बात है।

साथियों देश पर फार्मिंग एग्रीमेंट से जुड़े पहले जो भी तौर-तरीके चल रहे थे, उसमें किसानों का बहुत जोखिम था, बहुत रिस्क था। नए कानून में हमारी सरकार ने फार्मिंग एग्रीमेंट के दौरान किसान को सुरक्षा देने के लिए कानूनी प्रावधान हमने किया। तय किया है कि फार्मिंग एग्रीमेंट में सबसे बड़ा ही अगर देखा जाएगा तो वह किसान का देखा जाएगा।

हमने कानूनन तय किया है कि किसान से एग्रीमेंट करने वाला अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं पाएगा, जो किसान को उसने वादा किया होगा, उस पर करने वाले तो वह भागीदार को उसे पूरा करना ही होगा।

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अगर नए किसान कानून लागू होने के बाद कितने उदाहरण सामने आ रहे हैं, जहां किसानों ने अपने इलाके में एसडीएम से शिकायत की और शिकायत के कुछ ही दिन के भीतर किसानों को अपना बकाया मिल गया।

फार्मिंग एग्रीमेंट में सिर्फ जो उपज का समझौता होता है, जमीन के उसी के पास रहती है, एग्रीमेंट जमीन का कोई लेना देना नहीं है, नुकसान हो जाए तो भी किसान को पूरे पैसे मिलते हैं। नए कानूनों के अनुसार अगर अचानक नुकसान होता है तो किसान को भुगतान नहीं करना होगा।

लेकिन जो स्पॉन्सर है, जो भागीदार है, जो भागीदार है जो पूंजी लगा रहा है और मुनाफा अचानक बढ़ गया और किसान के कांटेक्ट में तो कम है और किसान के कांटेक्ट में तो कम पैसा नहीं मिलेगा, लेकिन प्रावधान है कि जो बढ़ा हुआ है, उसमें भी पैसा किसान को देना पड़ेगा।

साथियों एग्रीमेंट करना है या नहीं करना है, यह कोई जरूरी नहीं है, यह कोई कंपलसरी नहीं है कि किसान की मर्जी पर है भाई! किसान चाहेगा तो करेगा, नहीं चाहेगा तो नहीं करेगा, लेकिन किसान के साथ बेईमानी ना कर दे। किसान के फुलप्रूफ फायदा उठाने के लिए कानून व्यवस्था की गई है। एग्रीमेंट स्पॉन्सर करने वाले के लिए है, किसान के लिए नहीं।

स्पॉन्सर करने वाले को एग्रीमेंट खत्म करने का अधिकार नहीं है, अगर वह एग्रीमेंट खत्म करेगा तो उसे भारी जुर्माना किसान को देना होगा, लेकिन किसान चाहे तो किसी भी समय बिना जुर्माने के किसान अपना फैसला ले सकता है। राज्य सरकारों को मेरा सुझाव है, आसान भाषा में आसान तरीके से समझ में आने वाली फार्मिंग एग्रीमेंट उसका बनाकर किसानों को देखना चाहिए, ताकि कोई किसान से चीटिंग ना कर सके।

साथियों मुझे खुशी है कि देश भर में किसानों ने नए कृषि सुधारों को न सिर्फ गले लगाया है, बल्कि भ्रम फैलाने वालों को भी सिरे से नकार रहे हैं। जिन किसानों में अभी थोड़ी सी भी आशंका बची है, उनसे मैं फिर से कहूंगा कि आप एक बार फिर से जो हुआ ही नहीं है, जो होने वाला ही नहीं हैं, उसका भ्रम और डर फैलाने वाली जमात से आप सतर्क रहिए।

ऐसे लोगों को मेरे किसान भाइयों बहनों पहचानिए। इन लोगों ने हमेशा किसानों से धोखा दिया, उनको धोखा दिया, उनका इस्तेमाल किया और आज भी यही कर रहे हैं। मेरी बातों को इसके बाद भी सरकार के इन प्रयासों के बाद भी अगर किसी को कोई आशंका है तो हम सर झुका कर किसान भाइयों के सामने हाथ जोड़कर बहुत ही निमृत विनम्रता के साथ देश के किसान के बीच में उनकी चिंता का निराकरण करने के लिए और मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार हैं।

देश का किसान देश के किसानों का हित हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक हैं। साथियों आज मैंने कई बातों पर विस्तार से बात की है, कई विषयों पर सच्चाई देश के सामने रखी है। अभी 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म जयंती पर एक बार फिर मैं इस विषय पर देशभर के किसानों के साथ विस्तार से बात करने वाला हूं।

उस दिन पीएम किसान सम्मान निधि की एक और करोड़ों किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। भारत का किसान बदलते समय के साथ चलने के लिए, नया भारत बनाने के लिए मेरे देश का किसान चल पड़ा। नए संकल्पों के साथ नए रास्तों पर हम चलेंगे और यह देश सफल होगा।

इस देश का किसान भी सफल होगा, इसी विश्वास के साथ एक बार मध्यप्रदेश सरकार का अभिनंदन करते हुए आज मध्य प्रदेश के लाखों लाखों किसानों के साथ मुझे अपनी बातें बताने का मौका मिला, इसके लिए सब का आभार व्यक्त करते हुए एक बार आप सबको बहुत-बहुत शुभकामना देता हूं, बहुत-बहुत धन्यवाद।