Narendra modi foreign trip

नई दिल्ली।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं को लेकर भारत में विपक्षी दलों के द्वारा उनकी खूब खिंचाई की जाती रही है।

यह बात और है कि पीएम मोदी के द्वारा की गई यात्राओं से भारत को जला हुआ, वह इतिहास में कभी नहीं हो पाया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 5 साल के दौरान 52 देशों की 141 यात्राएं कीं, जिस पर अधिकारिक रूप से 355 करोड़ रुपए खर्च हुए, लेकिन इसके पीछे का सच है कि भारत को सीधे-सीधे 15 लाख करोड़ रुपए का फायदा हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में देश की बागडोर संभालने के साथ ही अपने विदेशी तालुकात को अहमियत देते हुए लंबी रणनीति के लिए काम करना शुरू कर दिया था।

उसी का परिणाम है कि आज बीते साढे 4 साल के दौरान ही भारत में 15 लाख करोड रुपए का एफडीआई आ चुका है, यह 72 साल के आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं को लेकर कांग्रेस पार्टी समेत तमाम विपक्षी दलों के द्वारा इन साढे 4 साल के दौरान नरेंद्र मोदी की जमकर खिंचाई की गई।

यहां तक कि जुमले वाली सरकार, सूट-बूट की सरकार, विदेश यात्राओं वाली सरकार, हवाई जहाज वाली सरकार, जैसी ना जाने क्या-क्या बातें कहीं गई हैं।

लेकिन भारत के प्रधानमंत्री ने इन तमाम बातों को दरकिनार करते हुए देश हित में न केवल फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) लिया, बल्कि आज स्थिति यह है कि दुनिया का छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा देश भारत के साथ संबंध बनाने के लिए लालायित खड़ा है।

भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव के दौरान दुनियाभर के 48 देशों ने भारत को सीधे तौर पर समर्थन दिया है और पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है।

यहां तक कि न्यूजीलैंड की संसद में दुनिया भर में सबसे पहले पुलवामा आने के बाद पाकिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के द्वारा पाक संसद में भारत के विंग कमांड अभिनंदन को कल इंडिया को सौंपने की बात कहने के साथ ही दुनिया भर में एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति का डंका बजा है।