bhapura me purshottam raigar ka tuta hua ghar
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—सांसद आर्दश ग्राम योजना की राजस्थान की राजधानी के सांसद की लापरवाही के चलते खुली पोल
जयपुर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में बेेहतर जन सुविधाएं विकसित करने के लिए सभी संसद सदस्यों को अपने—अपने क्षेत्र में एक एक गांव गोद लेकर उनका अभूतपूर्व विकास करने का लक्ष्य दिया था।

पीएम मोदी की इस योजना को तब बीजेपी और एनडीए के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने हाथोंहाथ लपक अपने—अपने क्षेत्र के गांव गोद लेकर जोरशोर से काम शुरू किया।

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पीएम मोदी का इस योजना के तहत भले ही लक्ष्य बड़ा और बेहतर भारत का रहा हो, लेकिन उनकी इस ‘महायोजना’ को पलीता भी उन्हीं की पार्टी के सांसदों ने लगाया है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर की लोकसभा सीट से रिकॉर्ड मतों से जीकर संसद पहुंचे सांसद रामचरण् बोहरा ने सांगानेर तहसील के जिस भापुरा गांव को गोद लिया, उसके बाशिंदे आजतक खून के आंसू रो रहे हें।

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यहां पर भापुरा गांव में विकास के नाम पर न तो रुपए खर्च हुए, न इंटरनेट लगा, न पानी मिला, न ही अन्य अभूतपूर्व कही गई सुविधाओं का ही विकास हो सका।

‘नेशनल दुनिया’ की टीम ने जब इसकी पड़ताल की तो सांसद की कलई खुल गई। यहां पर पता चला कि जिन लोगों को आदर्श गांव योजना के तहत अपने आशियानों से बेदखल किया गया था, वह आज भी सड़क पर रहने को मजबूर हैं।

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हालात यह हैं कि पुराने घर तोड़कर इंदिरा आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ख्वाब तो खूब दिखाए गए, लेकिन उनपर अमल नहीं किया गया।

नतीजा यह निकला कि भापुरा गांव की तलाई के पाल पर बरसों से अपना कच्चा आशियाना बनाकर रह रहे दलित पुरुषोत्तम रैगर जैसे लोगों को 18 सितंबर 2015 को उजाड़ तो दिया।

पुरुषोत्तम जैसे पीडित तत्कालीन स्थानीय विधायक कैलाश वर्मा, सांसद रामचरण बोहरा, मंत्री यूडीएच, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मानवाधिकार आयोग, दलित आयोग, न्यायालय के चक्कर काटकर थक चुके हैं।

https://youtu.be/j6_WwMYaxFk
पुरुषोत्तम ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, वर्तमान सीएम अशोक गहलोत, वर्तमान यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को इस बात की शिकायत की, मगर आज तक उसे घर नहीं मिला।

कुछ ही दिनों में उसको इंदिरा आवास योजना के तहत दिया जाने वाला 4400 वर्गफीट का पट्टा आजतक नहीं मिला। उसको तब जिस सरकारी विद्यालय में ठहराया गया था, चार साल बाद भी वहीं पर है।

https://youtu.be/Z3czvi3aY4w
शिक्षा विभाग और एसडीएम पुरुषोत्तम को कई बार सरकारी स्कूल का भवन खाली करने का नोटिस भी थमा चुके हैं। नोटिस पर नोटिस मिलने के कारण उसका परिवार हर वक्त सदमे मे जी रहा है।

पुरुषोत्तम के पास न खुद का घर है, न आवास का पट्टा है और न ही तसल्ली से स्कूल भवन में रहने दिया जा रहा है। जब इस मामले को लेकर वह सांसद बोहरा से मिला तो उन्होंने टका सा जवाब देकर कहा कि घर तोड़ने का काम जेेडीए ने किया है, इसलिए वहीं जाओ।

न अस्पताल, न पानी, न सचिवालय

गांववालों ने बताया कि आदर्श ग्राम योजना के तहत 18 सितंबर 2015 को जब पुरुषोत्तम रैगर को जब अपने घर से बेदखल किया गया था, तब बेहतर भविष्य का सपना दिखाया गया था।

तब कहा गया था कि यहीं पर गांव में खुद का अस्पताल होगा, शुद्ध पानी की टंकी होगी, मिनी सचिवालय होगा, जहां पर पटवारी और गिरदावर बैठेंगे, गांव वालों के भूमि संबंधी और अन्य सभी कार्यों को प्राथमिकता से निपटाया जाएगा।

लेकिन जब ‘नेशनल दुनिया’ (Nationaldunia.com) की टीम ने इसकी सारी पड़ताल की तो सच्चाई सामने आ गई। ग्रामवासियों ने बताया कि करीब 200 परिवारों से अस्पताल के नाम पर उगाहे गए 1500—1500 रुपए का आज दिन तक कोई हिसाब नहीं है।
https://youtu.be/81uNi_FsR0U

हॉस्पिटल के लिए तब करीब 3 लाख की उगाही की गई, लेकिन अबतक यहां पर कोई अस्पताल नहीं बना है। मिनी सचिवालय की चार दीवारी होने के बाद हालात जस के तस हैं। साल 2009 से यहां पर पानी की टंकी बनी हुई है, लेकिन उसमें पानी नहीं है।

भापुरा में वर्ष 2009 में सांसद निधि से 25 लाख की लागत से पानी की टंकी बनावाई गई थी, लेकिन न तो उसको बीसलपुर की लाइन से जोड़ा गया है, और न ही ट्यूबवेल खुदवाकर पानी भराई का काम किया गया है। जिसके चलते गांव के लोग आज भी वही अशुद्ध पानी पी रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि तलाई का निर्माण और जीर्णोद्वार करने के लिए जिस तलाई की पाल से गरीबों के आशियाने उजाड़े गए थे, उनको आज भी घरों का इंतजार है।

उजड़े घर की जमीन पर बैठे पुरुषोत्तम रैगर बताते हैं कि सांसद की पहल पर उनका घर तोड़ दिया गया। यह काम जेडीए ने किया, लेकिन बाद में जेडीए ने ग्राम पंचायत को लिखकर दिया कि यह क्षेत्र उसके कार्यक्षेत्र में नहीं आता है, अत: ग्राम पंचायत ही पट्टा दे। किंतु आज चार साल बाद भी पट्टा नहीं दिया गया है।

चार साल बाद भी यह है स्थिति

भापुरा गांव में आज चार बरस बाद भी न तो इंटरनेट है, न मिनी सचिवालय का बहुआयामी भवन बना है, न पानी की टंकी को पाइपलाइन से जोड़कर शुद्ध पानी पिलाया जा रहा है, न ही पशु चिकित्सालय है, जो कि गांववालों के अंशदान से बनना था।

इस योजना के तहत गांव के लिए 25 करोड़ रुपए का बजट बताया गया था, लेकिन गांव में 25 लाख काम भी नहीं दिख रहा है। गांववासी बताते हैं कि गांव में जो भी विकास कार्य किया गया है, वह सारा नरेगा योजना के तहत हुआ है।

गांववालों ने बताया कि उन्होंने सांसद बोहरा को इतना सपोर्ट किया कि जिनके घर तलाई के आसपास बने हुए थे, उनको तोड़कर दूसरी जगह बना लिए, ताकि विकास हो सके, किंतु जलाशय आज भी पुननिर्माण की बाट जोह रहा है।

जिन लोगों ने यहां पर बरसों से बने अपने घर तोड़ने का विरोध किया, उनको जेडीए, तहसीलदार, थानाधिकारी और जलदाय विभाग के अभियंताओं का सहारा लेकर बेदखल कर दिया गया।

पुरुषोत्तम रैगर का परिवार जिस जर्जर स्कूल भवन में रह रहा है, वह बरसात के दिनों में पानी टपकने से पूरा तलाई का रुप अख्तियार कर लेता है।

छत टपनके कारण उसके पूरे बिस्तर, कपड़े और घर का सारा सामान गीला हो जाता है। उपर से भवन को खाली करवाने के लिए आए दिन सरकारी धमकियों के कारण वह सहमा हुआ रहता है।

यह लक्ष्य था सांसद आदर्श गांव योजना का

—जब पीएम मोदी ने 11 अक्टूबर 2014 को यह योजना शुरू करने की पहल की थी, तब उसके लक्ष्य भी निर्धारित किए थे।
—उन्होंने बताया था कि गांव के हर घर को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा।
—गांव के सभी पात्र पेंशन वाले लोगों को पेंशन स्कीम से जोड़ा जाएगा, उसके लिए उनको गांव में ही सुविधा देनी होगी।
—जलदाय विभाग द्वारा यहां पर पेयजल के लिए शुद्ध पानी का इंतजाम किया जाएगा।
—गांव के सभी पात्र बीपीएल परिवारों के घरों में बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे।
—गांव के बेरोजगार युवाओं की एक लिस्ट तैयार कर उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार तकनीकी प्रशिक्षण देकर रोजगार का भी प्रबंध किया जाएगा।
—गांव में प्रत्येक परिवार को प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत बैंक खातों से जोड़ा जाएगा, सभी के खाते खुलवाए जाएंगे।
—तहसीलदार, एसडीएम गांव में किसानों की जमीन का नामांतकरण खोलने, सीमाज्ञान करने, तकासमा और सार्वजनिक उपयोग के लिए भू आंवटन के सभी मामले निपटने में त्वरित कार्यवाही करेंगे।
—गांव के प्रत्येक घर में शौचालय बनवाकर दिए जाएंगे, ताकि पूरे गांव को ओडीएफ बनाया जा सके।