pm narendra modi time photo

जयपुर।
लोकसभा चुनाव 2019 का अब सिर्फ एक चरण बाकी रहा है। छह चरण पूरे हो चुके हैं। इस दरमियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकरीबन सभी टीवी चैनल्स को साक्षात्कार दिए हैं। लेकिन इन्हीं इंटरव्यू में सबसे आखिर में दिए गए अपने साक्षात्कार में पीएम मोदी ने एक नहीं, बल्कि पांच बड़े झूठ बोले हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के झूठ को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। देश के तमाम बुद्धिजीवी भी इस पर आकर अटक गए हैं। यह बात और है कि राहुल गांधी के द्वारा झूठ बोलना बहुत आम बात है, शायद यही कारण है कि उनके द्वारा रोज झूठ बोलने के बाद भी तवज्जो नहीं दी जाती है।

लेकिन जब बात एक पीएम की हो, तो फिर सवाल उठना लाजमी है। आपको बताते हैं कि पीएम मोदी के झूठ को पकड़कर लोगों ने किस तरह से उनकी पोल खोली है। पीएम मोदी के द्वारा एयर स्ट्राइक के वक्त भी बादलों की आड़ में राडार वाली बात कहने से विपक्ष ने जमकर आड़े हाथों लिया है।

लेकिन सबसे ज्यादा खिंचाई उस बात पर हो रही है, जो डिजीटल कैमरे और ई मेल करने की तारीखों को लेकर मोदी के द्वारा बड़ा झूठ बोला गया है। इसी को लेकर सोशल मीडिया ने मोदी को झूठों का सरदार भी करार दिया है।

आईए जानते हैं मोदी के द्वारा बोले गए झूठ और उनकी सच्चाई—

पहला झूठ—
मोदी ने कहा कि उन्होंने अपने खुद के डिजीटल कैमरे से साल 1988 में आडवाणी की फोटो खींचकर दिल्ली भेजा था, जिसके बाद दूसरे दिन अखबार में रंगीन फोटो छपी तो आडवाणी आश्चर्यचकित हो गए थे।

सच यह है—
इसको लेकर एक ट्वीटर यूजर गौरव पांघी ने लिखा है कि भारत में सबसे पहले इंटरनेट की सुविधा वीएसएनल ने 1995 में शुरू किया था।

इसके साथ ही लिखा है कि दुनिया में पहली बार 1987 में पहला डिजीटल कैमरा लांच किया गया था, लेकिन अधिकांश घरों में यह कैमरा करीब 20 साल बाद खरीदा जाने लगा था।

इसको लेकर मणिकानंद ने लिखा है कि पहला डिजीटल कैमरा पहली बार 1990 में डेकेम मोडल—1 था। यह लोजिटेक फोटमेन के द्वारा जारी किया गया था, लेकिन मोदी ने 1988 में ही डिजीटल कैमरे से फोटो खींचकर मेक कर दिया था।

इसके साथ ही यह भी लिखा है कि भारत में पहली बार 14 अगस्त 1995 के दौरान इंटरनेट सुविधा शुरू हुई थी, लेकिन मोदी ने 1988 में ही फोटो मेल कर दी थी।

दूसरा झूठ—
मोदी ने 1988 के दौरान ही तकनीकी रुप से खुद को मजबूत करार दिया है। उन्होंने कहा है कि डिजीटल कैमरा और इंटरनेट का दावा किया है।

सच क्या है—
दरअसल, एक यूजर देसाई ने लिखा है कि सीआईए ही इंटरनेट, डिजीटल कैमरा यूज करता था। तो क्या मोदी को तब यूएसए ने यह सब उपलब्ध करवाया था? इसके साथ ही यह भी लिखा है कि एक गरीब व्यक्ति, जिसकी कोई इनकम नहीं थी, तब यह सब कहां से ले पाए?

तीसरा झूठ—
पीएम मोदी ने अपने इंटरव्यू में दावा किया है कि उनको कविताएं लिखने का शौक है, इसको लेकर उन्होंने समय समय पर कविताएं लिखने का भी दावा है।

सच क्या है—
सच यह है कि जिस इंटरव्यू में मोदी ने कविमन मोदी का जिक्र किया है, उसी इंटरव्यू मोदी के पास एक फाइल बताई गई है, जिसमें प्रिंटेड कविता लिखी बताई गई है। इसी पेज में एक प्रिं​टेड प्रश्न भी लिखा हुआ बताया गया है।

चौथा झूठ—
पीएम मोदी दावा करते हैं कि उन्होंने गरीबी में जिंदगी जी है, उनकी मां बर्तन मांजती थीं।

सच क्या है—
आरती नामक एक ट्वीटर यूजर ने लिखा है कि गरीब चायर बेचने वाला, जिसकी मां बर्तन मांजती थीं, उसके पास 1988 में डिजीटल कैमरा था और वो ई मेल भी करता था।

पांचवा झूठ—
पीएम मोदी ने एयर स्ट्राइक को लेकर भी दावा किया है​ कि एक्सपर्टस को राय दी थी कि बादलों के कारण राडार नहीं पकड़ पाएगी, ​इसलिए समय पर एयर स्ट्राइक की जा सकी।

सच क्या है—
इसको लेकर मोदी की जमकर खिंचाई हो रही है। लोग ट्वीटर पर बादलों के कारण राडार की पकड़ नहीं होने को लेकर मोदी को न केवल अनपढ़, बल्कि गंवार भी लिखा है।

यहां तक लिखा जा रहा है कि झूठ बोलने का रिकॉर्ड बना चुके मोदी ने भक्तों के लिए सबसे बड़ा और बहकाने वाला झूठ एयर स्ट्राइक को लेकर बोला है, जबकि इसके साथ ही इस तरह की झूठ को एयर स्ट्राइक की सफलता और असफलता से भी जोड़ा जा रहा है।