-किसानों को मुफ्त फसल बीमा पर भी विचार, लघु-सीमांत किसानों पर होगा जोर दे रही है मोदी सरकार।

नई दिल्ली/जयपुर।

देश के किसानों को कर्ज के जबरदस्त जाल से बचाने के लिए तेलंगाना सरकार ने 10 मई, 2018 को ‘रैयत बंधु’ नाम से कृषि निवेश समर्थन योजना संचालित की है। इस योजना को सीजन 2018-19 के खरीफ फसल से लागू किया जा रहा है।

इस योजना के अनुसार खरीफ फसल और रबी की फसल दोनों सत्रों में किसानों को प्रति एकड़ 4 हज़ार रुपये का अनुुदान बीज, खाद, मजदूरी आदि लागत के लिए देने का प्रावधान है।

इस योजना के दायरे में कितने किसान हैं, कुल लागत कितनी है, यह बताने की कोशिश इस तरह से की जाती है? राज्य के करीब 59 लाख किसानों को इसमें शामिल किया जाएगा। इससे सरकार के खजाने पर करीब 120 अरब रुपये का बोझ पड़ेगा।

राज्य में पट्टे पर खेती करने वाले लगभग 15 लाख किसान इसके दायरे में नहीं आएंगे। कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि देखना होगा कि कीमतों में कमी की भरपाई के लिए किसानों की प्रत्यक्ष आय में मदद मिलेगी। यह योजना सीधी खरीद का विकल्प नहीं है।

अप्रेल-मई 2019 में प्रस्तावित आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार किसानों की आय में थोड़ी मदद की संभावना तलाश रही है। इसके लिए कई वर्तमान योजनाओं में कुछ बदलाव कर स्वीकार्यता में सुधार लाकर किसानों को लाभ पहुंचाया जाएगा।

इस मामले के जानकार अफसरों ने बताया है कि पिछले कुछ दिनों से देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली, कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह और इन्हीं विभागों के अफसरों के साथ-साथ मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमणयन के साथ इस पर गहन मंथन किया जा रहा है।

तेलंगाना राज्य की ‘रैयत बंधु’ योजना की तरह ही देश में योजना को लागू करने की कुछ हद तक सहमति बनती दिखी है। किन्तु शुरू में इस योजना के अंतर्गत सीमांत किसानों को शामिल किया जाएगा।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर राव की इसी मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई बताई जा रही है। उन्होंने इस योजना के बारे में पीएम मोदी को विस्तृत जानकारी दी है।

बीते कुछ समय से ओडिशा और झारखंड राज्य ने रैयत बंधु योजना की तर्ज पर हर परिवार को प्रति एकड़ कुछ आय उपलब्ध कराने की घोषणा की है।

केंद्र की मोदी सरकार के अफसरों का अनुमान है कि देश में करीब 9 से 11 करोड़ लघु एवं सीमांत किसान हैं। इन सभी को इस योजना के पहले चरण में शामिल किया जाएगा।

देश के चुनिंदा जिलों में इस पहले प्रायोगिक तौर पर शुरू किया जाएगा। भारत के सीमांत किसानों को मूल योजना में शामिल नहीं किया गया है, मोदी सरकार की योजना का इनको लाभ मिलेगा। इस बीच सरकार ने राष्ट्रव्यापी कर्जमाफी से इनकार किया है।

मोदी सरकार के अधिकारियों ने कहा कि योजना की घोषणा 2019-20 के अंतरिम बजट में या फिर शीत सत्र के समापन के बाद कभी भी की जा सकती है।

ऐसा माना जाता है कि अफसरों ने पीएमओ को 3 हफ्ते के अंदर इस पैकेज की घोषणा करने की सलाह दी है। साथ ही लघु और सीमांत किसानों को फ्री में फसल बीमा देने और उधारी योजनाओं में बदलाव करने पर चर्चा की गई।

आज की तारीख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फसल बीमा योजना के तहत अन्नदाता से खरीफ फसल के लिए 2% की दर से प्रीमियम वसूला जाता है।

रबी की फसल के लिए किसानों को 1.5% प्रीमियम देना होता है। बागवानी और व्यावसायिक खेती के मामले में 5 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है।

एक अधिकारी ने बताया कि किसानों के लिए फसल बीमा को देश के किसानों के लिए पूरी तरह मुफ्त किया जा सकता है। इसके अलावा अल्पावधि फसली ऋण के पुनर्भुगतान की अवधि को बढ़ाने पर भी विचार किया गया है।

देश के किसानों को निश्चित आय देने की योजना पर सरकारी खजाने पर शुरुआत में करीब 600-700 अरब रुपये का बोझ आने की संभावना है।

एक अधिकारी ने बताया कि ‘वित्त विभाग काम कर रहा है कि सरकारी खजाने पर कुल खर्च में केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी कितनी होगी? उनका कहना है कि केंद्र-राज्यों के बीच 70:30, 50:50 या कुछ और हो सकता है।’

उन्होंने कहा है कि जो भी तय होगा, वह स्वीकार्य स्तर पर होना चाहिए, नहीं तो पूरी पहल धरी की धरी ही रह जाएगी। योजना को अभी गहन विचार के लिए रखा गया है।

मोदी सरकार के आलोचकों का कहना है कि प्रत्यक्ष आय समर्थन से कृषि की सभी समस्याएं दूर नहीं होंगी। इसकी जगह राज्य के आधार पर केंद्रित और फसल के समाधान लाने पर ध्यान देना चाहिए।

अधिक खबरों के लिए हमारी वेबसाइट www.nationaldunia.com पर विजिट करें। Facebook,Twitter पे फॉलो करें।