modi cabinet
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—हर किसान को 6000 रुपए, पेंशन 3000 रुपए अलग से, छोटे व्यापारियों को भी 60 साल के बाद 3000 पेंशन, शिक्षा नीति में बदलाव होगा, मवेशियों के लिए टीकाकरण, सुरक्षा कोष से छात्रवृत्ति की राशि बढ़ाई।

जयपुर
नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार के गठन के दूसरे ही दिन मंत्रालयों का बंटवारा कर ताबड़तोड़ तरीके से पांच अति महत्वपूर्ण निर्णय किए गए।

मोदी सरकार ने शाम को अपने मंत्रिमंड़ल की बैठक कर सभी कृषकों के लिए 6000 रुपए वार्षिक देने का निर्णय कर दिया। इससे पूर्व यह योजना केवल लघु और सीमांत कृषकों के लिए थी।

सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्ण करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा कोष में से केंद्रीय पुलिसकर्मियों के बेटों को छात्रवृत्ति 2000 रुपए से बढ़कर 2500 कर दी। साथ बेटियों के लिए 2250 से बढ़ाकर 3000 रुपए कर दिए हैं।

शिक्षा नीति में परिवर्तन किया गया है। अब चार चरणों में शिक्षा पूरी होगी। पहले चरण में 5 वर्ष, दूसरे चरण में 3 वर्ष, तीसरे चरण में भी 3 वर्ष और चौथे चरण में 4 वर्ष की शिक्षा के आधार पर अध्ययन करवाया जाएगा।

पहले चरण में जिन बच्चों की आयु 3 से 8 वर्ष हैं, उनको पांच वर्ष का अध्ययन करवाया जाएगा। दूसरे चरण में प्री प्राइमरी और दो वर्ष ग्रेड एक और ग्रेड दो तक का अध्ययन होगा। इसको मूलभूत चरण कहा जाएगा।

दूसरे चरण में 8 से 11 वर्ष तक के बच्चों का अध्ययन शामिल होगा। जिसके तहत 3 वर्ष में ग्रेड 3 से लेकर ग्रेड 5 तक का अध्ययन होगा। इस चरण को तैयारी चरण कहा जाएगा।

तीसरे चरण 11 वर्ष से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चे शामिल होंगे। जिसमें 3 वर्ष की पढ़ाई होगी। इसमें ग्रेड 6 से लेकर ग्रेड 8 तक का अध्ययन शामिल किया गया है। इसको मध्य चरण कहा गया है।

चौथे चरण में 14 से 18 वर्ष तक के बच्चे शामिल होंगे। जिसमें ग्रेड 9 से ग्रेड 12 तक का अध्ययन शामिल होगा। इसको उच्च मध्य चरण कहा गया है।

इसके साथ ही मोदी कैबिनेट ने अति महत्वपूर्ण निर्णय करते हुए पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए टीकारण अभियान शुरू किया है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने 13 हजार करोड़ रुपए देने का निर्णय किया है।

इसके लिए मेलों और जहां पर पशुओं की आवाजाही ज्यादा होती है, वहां पर शिविर लगाए जाएंगे। इस योजना में लगभग 30 करोड़ गाय, भैंस और बैल शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त 20 करोड़ बकरी और सूअर का टीकाकरण होगा।

किसान निधि योजना के तहत देश के लगभग 18 करोड़ किसान परिवारों को शामिल किया गया है। पहले यह योजना केवल 14 करोड़ किसानों के लिए थी, जिसमें 75 हजार करोड़ रुपए वार्षिक खर्च था, जिसमें 12 हजार करोड़ रुपए जोड़कर सभी जोड़ा गया है।