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नई दिल्ली।
कुछ अखबारों ने चार दिन पहले ‘एक्सक्लुजिव’ कहकर एक खबर प्रकाशित की थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा मई 2014 में देश का 268.10 टन सोना विदेशों में गिरवी रखने का दावा किया गया था।

इस खबर को लेकर जहां कई छोटे अखबारों ने प्रमुखता दी, वहीं कांग्रेस का मुखपत्र, यानी ‘नेशनल हेराल्ड’ ने भी अपनी वेबसाइट पर जोरदार तरीके से खबर को मोडीफाई कर अपलोड किया। खबर में बताया गया कि किस तरह से मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही रिजर्व बैंक का 268.10 टन सोना विदेशों में गिरवी रख दिया।

मजेदार बात यह है कि इस फेक न्यूज के दौर में देखादेखी कर कई अन्य वेसाइट्स और सोशल मीडिया ने इस न्यूज को प्रचारित करने के लिए हाथों—हाथ लिया। लेकिन सबसे गंभीर बात यह थी कि जो कांग्रेस पार्टी देश की सबसे पुराना दल होने का दम भरती है, जिसने 55 साल से ज्यादा समय तक देश पर राज किया है, जो फिर से सत्ता में आने का सपना देख रही है, उसी कांग्रेस ने भी देश से जुड़ी इस अति महत्वपूर्ण भ्रांति को अपने ट्वीटर हैंडल पर बिना पड़ताल करे साझा कर दिया।

आनन—फानन में कांग्रेसियों ने इसको शेयर कर दिया। जैसे ही ट्रेंड हुई तो पूरे देश के सोशल मीडिया और ट्वीटर हैंडलर्स ने इस खबर को अपने अपने सोशल मीडिया साइट्स पर चिपका डाला। सबसे गंभीर बात यह है कि जिस पत्रकार नवनीत चतुर्वेदी की आरटीआई के हवाले से यह खबर प्रकाशित की गई, उसके पास इसके कोई सबूत ही नहीं थे, बल्कि फेब्रिकेटेड करके झूठी आरटीआई जैसा पत्र खबर के साथ वायरल किया गया।

जब पूरे देश में सोशल मीडिया पर यह खबर ट्रेंड करने लगी तो बात आरबीआई के कानों में पड़ी। करोड़ों लोगों में भ्रांति फैलने के चलते अब आरबीआई की साख पर सवाल आ गया था, तो तीसरे ही दिन, शुक्रवार को आरबीआई को एक बयान जारी कर इस बात का खंड़न करना पड़ा कि साल 2014 से अब तक बिलकुल भी सोना विदेशों में गिरवी रखने का काम किया गया है।

इसके साथ ही आरबीआई ने यह भी बताया कि ऐसा अक्सर सरकारें करती रही हैं, किंतु इन पांच बरस के दौरान कोई सोना गिरवी नहीं रखा गया है। जैसे ही आरबीआई ने यह बयान जारी किया, तो न तो कांग्रेस पार्टी ने अपना ट्वीट डिलीट किया और न ही नेशनल हेराल्ड ने खबर को हटाने की जहमत उठाई।

देश में अब धीरे—धीरे अंग्रेजी खबरें पढ़ने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। ऐसे में नेशनल हेराल्ड जैसे प्रतिष्ठित रहे अंग्रेजी अखबार और उसकी वेबसाइट से यह खबर नहीं हटना बेहद खतरनाक हो सकती है, क्योंकि विदेशों में भारत की साख इन्हीं अंग्रेजी मीडिया से मिलने वाली खबरों के आधार पर बनती है।

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