—एयर इंडिया को पहले बेचने के प्रयास किये जा चुके हैं, अब फिर से बेचने का प्रयास शुरू किया जाएगा, रेवले में भी पीपीपी मोड शुरू किया जाएगा।

नई दिल्ली। भारत में सबसे बड़े माल वाहक और यात्री वाहक साधन, यानी भारतीय रेलवे को केंद्र सरकार निजी हाथों में देने पर विचार शुरू कर चुकी है। जी हां, वही रेलवे, जिसका बजट अलग से पेश करना 2014 में बंद किया जा चुका है।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा जो बजट 2019 पेश किया गया है, उसमें साफ तौर पर कहा गया है कि भारतीय रेलवे को अब जन सहभागिता, यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप, मतलब पीपीपी मोड पर चलाया जाएगा।

इसके साथ ही वित्तमंत्री ने एक बार फिर से केंद्र सरकार की योजना के तहत एयर इंडिया को बेचने का भी ऐलान कर दिया है। जो भारतीय रेलवे देश के सबसे ज्यादा यात्रियों को ढोने का काम करती है, उसको अब निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो रही है।

आपको याद होगा नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में चुनाव प्रचार की शुरूआत में सार्वजनिक संभाओं में अपनी कविता, ‘मैं देश नहीं बिकने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा……’ गाकर युवाओं को दिल जीत लिया था।

इसके बाद बालाकोट में एयर स्ट्राइक के दिन सुबह 12 में राजस्थान के चुरू में जनसभा में भी यही कविता गाई थी। जिससे युवाओं को एक बार फिर लगा था कि वास्तव में मोदी देश को नहीं बिकने देंगे, किंतु वित्तमंत्री के द्वारा बजट में रेलवे को निजी हाथों में देने की बात कहने के बाद सोशल मीडिया पर मोदी के खिलाफ लोगों ने मोर्चा खोल दिया है।

दो दिन से मोदी सरकार की इस मामले में तीखी आलोचना हो रही है। हर तरफ रेलवे को निजी हाथों में देने और एयर इंडिया जैसे सरकारी उपक्रम को बेचने की बात पर युवाओं ने मोदी को सोशल मीडिया पर आडे हाथों लिया है।

यह महज संयोग नहीं है कि सरकार रेलवे जैसे उपकरण को, जो कि अभी तक भी फायदो का सौदा है, उसको प्राइवेट हाथों में देकर चलाना चाहती है, बल्कि इसके पीछे बड़ी साजिश बताई जा रही है।

जिस तरह से यूपीए सरकार द्वारा विदेश निवेश पर जोर दिया गया और तब पूरी भाजपा समेत तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी तीखी आलोचना की थी।

किंतु अब वही भाजपा, और वही नरेंद्र मोदी मीडिया और बीमा क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई लागू करने जा रहे हैं। इससे साफ है कि राजनीतिक दलों के द्वारा कहा कुछ और जाता है और किया कुछ अलग जाता है।

आज की बात की जाये तो भारतीय रेवले दुनिया का सबसे ज्यादा दूरी तय करने वाला उपकरण है। इसमें करीब 16 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। इसको अभी तक घाटे में भी नहीं धकेला गया है।