कांग्रेस ने कर दी मिर्धा परिवार की सियासत खत्म! हरेंद्र मिर्धा-रिछपाल मिर्धा जैसे दिग्गजों का कर दिया यह हश्र-

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जयपुर।

नागौर में मिर्धा परिवार की राजनीति खत्म कर दी गई है।
पूर्व केन्द्रिय मंत्री रामनिवास मिर्धा के बेटे हरेंद्र मिर्धा को टिकट नहीं दिया है। नागौर विधानसभा सीट से हरेंद्र मिर्धा का टिकट काटने के बाद आज डेगाना से रिछपाल मिर्धा का भी टिकट काट दिया है। हालांकि, वंशवाद की परंपरा को जीवित रखते हुए कांग्रेस ने उनके बेटे विजयपाल मिर्धा को टिकट दिया गया है।

हरेंद्र मिर्धा और रिछपाल मिर्धा किसान नेता बलदेव राम मिर्धा के पोते हैं। रिछपाल मिर्धा कांग्रेस के टिकट पर 2013 में बीजेपी के हबीबुर्रहमान अशरफी लांबा के सामने हार गए थे। इसी तरह डेगाना से रिछपाल मिर्धा भी चुनाव हारे हुए हैं।

गौरतलब यह भी है कि हरेंद्र मिर्धा के पिता रामनिवास मिर्धा और उनके भाई नाथूराम मिर्धा राजस्थान, खासकर नागौर की राजनीति में दिग्गज हुआ करते थे, उन्हीं के दम पर आपातकाल के दौरान कांग्रेस विरोधी लहर पर भी 1977 में हुए चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी ने 42 में से 26 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि पूरे प्रदेश में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था।

रिछपाल सिंह मिर्धा 1990, 1993, 1998 और 2003 में विधायक रहे हैं। साल 2013 में बीजेपी के अजय सिंह किलक के सामने चुनाव हार गए थे। कांग्रेस पार्टी में मिर्धा परिवार का एक अहम स्थान रहा है, लेकिन परिस्थितियों में जकड़े मिर्धा परिवार का सियासत से निपटारा होने की कगार पर है।

पूर्व विधायक और नाथूराम मिर्धा की पोती ज्योति मिर्धा पहले ही राजनीति से सन्यास की घोषणा कर चुकीं हैं। ज्योति मिर्धा 2014 में सीआर चौधरी के सामने लोकसभा चुनाव हार गईं थीं। हरेंद्र मिर्धा नागौर से और रिछपाल मिर्धा डेगाना से उम्मीदवारी जता रहे थे।

आपको यह भी बता दें कि साल 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी द्वारा हरेंद्र मिर्धा को टिकट नहीं दिए जाने के बाद वह बागी हो गए थे, इसके कारण पार्टी ने उनको निष्कासित कर दिया था। मोदी लहर में हरेंद्र मिर्धा और कांग्रेस के उम्मीदवार भी औंधे मुंह गिरे थे।

लेकिन 2 साल बाद ही कांग्रेस पार्टी ने हरेंद्र मिर्धा को पार्टी में शामिल करते हुए पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा की टक्कर में युवा चेहरा लाकर बैलेंस करने का प्रयास किया था।

आज कांग्रेस मुख्यालय पर रिछपाल मिर्धा ने प्रदर्शन करके आपने उम्मीदवारी जताई। साथ ही साथ समर्थकों के साथ कांग्रेस पार्टी के खिलाफ बिगुल भी बजा दिया। जिस मिर्धा परिवार के आसपास राजस्थान में कांग्रेस की सियासत घूमा करती थी, हालात यह हो गए हैं कि उसी परिवार के लोग आज कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे।

मिर्धा परिवार की सुमन मिर्धा ने अपने फेसबुक पेज पर कांग्रेस मुक्त नागौर का पोस्टर शेयर करके कांग्रेस के प्रति परिवार की तीखी नाराजगी जाहिर की है।

इधर, हरेंद्र मिर्धा की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल के साथ बात होने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि बेनीवाल हरेंद्र मिर्धा को अपनी पार्टी के टिकट पर नागौर से मैदान में उतार सकते हैं।

आपको यह भी बता दें कि साल 1947 में पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर किसानों के लिए राजनीति में उतरे बलदेव राम मिर्धा के दो बेटे नाथूराम मिर्धा और रामनिवास मिर्धा कांग्रेस पार्टी के दिग्गज राजनेता हुआ करते थे।

हरेंद्र मिर्धा और रिछपाल मिर्धा रामनिवास मिर्धा के बेटे हैं, जबकि ज्योति मिर्धा नाथूराम मिर्धा की पुत्री हैं। हरिराम मिर्धा के बेटे रिछपाल मिर्धा द्वारा हाल ही में विपक्ष से ज्यादा कांग्रेस पार्टी में उनके दुश्मन होने की बात कही थी, जिसका वीडियो वायरल हुआ था।

रिछपाल मिर्धा का टिकट काटे जाने के पीछे उसी वीडियो को बताया जा रहा है, तो हरेंद्र मिर्धा के द्वारा बीते डेढ़ साल से लगातार नागौर में जनसंपर्क को दरकिनार करके भाजपा से 1 दिन पहले ही शामिल हुए हबीबउर रहमान अशरफी लांबा को कांग्रेस ने टिकट दिया है।

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