नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जरूरी नहीं-SC

10
nationaldunia
- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

नई दिल्ली।

शीर्ष कोर्ट ने अयोध्या विवाद से जुड़े इस्माइल फारूकी के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 2-1 से फैसला सुनाते हुए कहा कि इस्माइल फारूकी केस में इसको ऊंची पीठ के समक्ष नहीं भेजा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण ने कहा है कि केस राम मंदिर और बाबरी मस्जिद मामले से पूरी तरह अलग है। कोर्ट ने कहा कि फैसले से अयोध्या के मुख्य मामले पर इसका कोई असर नहीं होगा। यह कहते हुए शीर्ष कोर्ट ने याचिकाकर्ता की रिट को खारिज कर दिया।

इस फैसले के बाद अयोध्या के मुख्य मामले की सुनवाई का रास्ता भी अब साफ हो गया है। न्यायालय ने कहा है कि अब 29 अक्टूबर से अयोध्या मामले की सुनवाई गुण और दोष के आधार पर तय करेगा।

कोर्ट का यह फैसला मुस्लिम समुदाय के लिए एक झटका माना जा रहा है। कोर्ट ने साल 1994 के अपने फैसले को बरकरार रखते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय किया है। तब सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा था कि ‘नमाज मस्जिद का अभिन्न हिस्सा नहीं है।’

हालांकि, इस मामले पर कोर्ट में दो राय हैं। इस मामले में 2 अलग-अलग फैसले सुनाए जाएंगे। अभी सुप्रीम कोर्ट के ही जस्टिस नजीर अपना अलग फैसला देंगे। निर्णय देते हुए जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि है मामले में 2 अलग अलग राय हैं। जस्टिस भूषण और सीजेआई दीपक मिश्रा की इस मामले पर एक राय है, जबकि न्यायमूर्ति एस नजीर की दूसरी राय है।

इधर, फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य पुजारी महंत सतेंद्र दास ने कहा है कि भाजपा ने केंद्र में सरकार में आने पर राम मंदिर बनाने का वादा किया था। बीते लम्बे समय से बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार है।

दास ने कहा है कि उत्तर प्रदेश राज्य और केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है। राम मंदिर बनाना बीजेपी का मकसद नहीं था, केवल सत्ता प्राप्त करना ही भाजपा का मकसद था। बीजेपी रामलला को भूल चुकी है।

देश की राजनीतिक खबरें NATIONALDUNIA पर पढ़ें। देश भर की अन्य खबरों के ल‍िए बने रह‍िए WWW.NATIONALDUNIA.COM के साथ। देश और दुन‍िया की सभी खबरों की ताजा अपडेट के ल‍िए जुड़िए हमारे FACEBOOK पेज से। हमें आर्थिक मदद पेटीएम नंबर 9828999333 पर करें।