Jaipur

पूरी दुनिया में दबंगई और तानाशाही के कारण हिटलरशाही के नाम से विख्यात हुए जर्मनी के तत्कालीन तानाशाह “rule of Hitler” को जबान में चटाक से मना करने वाला एकमात्र योद्धा थे मेजर ध्यानचंद।

मेजर ध्यानचंद भारतीय आर्मी में मेजर थे, इसके साथ ही हॉकी के महान खिलाड़ी बने। पूरी दुनिया आज भी मेजर ध्यानचंद को हॉकी के जादूगर के नाम से जानती है।

विश्व में हॉकी के जादूगर से मशहूर हुए मेजर ध्यानचंद की आज जन्म जयंती है। भारत की तरफ से खेलते हुए मेजर ध्यानचंद ने अपने जीवन काल में इंटरनेशनल हॉकी में 570 गोल किए थे।

कहा जाता है कि जब मेजर ध्यानचंद जर्मनी के खिलाफ उसी देश में खेल रहे थे और उनकी स्टिक से बोल छूट नहीं रही थी, तब मैच देख रहे खुद हिटलर ने मैच को रोक कर मेजर ध्यानचंद की हॉकी चेक करवाई।

उनको आशंका थी कि ध्यानचंद की हॉकी में चिपकने जैसा कुछ पदार्थ लगा हुआ है, इसलिए गेंद दूसरे खिलाड़ी के पास जा ही नहीं पा रही है। किंतु यह धारणा मिथ्या निकली और मेजर ध्यानचंद भारत को विश्व विजेता बनाया।

मेजर ध्यानचंद के इसी जादूगरी भरे खेल के कारण जर्मन का शासक और दुनियाभर में विख्यात तानाशाह हिटलर इतना कायल हुआ कि उसने मेजर ध्यानचंद को जर्मनी की नागरिकता, सेना में सर्वोच्च पद और जर्मनी में बड़ा भूभाग देने के साथ ही तमाम तरह की सुविधाएं देने का ऑफर किया।

जिसको मेजर ध्यानचंद यह कहकर ठुकरा दिया कि उसके लिए देश का नाम और सम्मान सबसे बड़ी बात है। जर्मन तानाशाह को दुनिया में किसी भी व्यक्ति ने पहली बार इस तरह का जवाब दिया था।

किंतु विडंबना देखिए कि जिस व्यक्ति ने भारत को तीन बार विश्व विजेता बनाया, उसको आज तक देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न नहीं दिया गया है।