नई दिल्ली।
महाराष्ट्र में पिछले एक पखवाड़े ज्यादा पुराने सियासी विवाद का आज पटाक्षेप होने की कगार पर है। सोमवार को शिवसेना द्वारा समर्थन पत्र नहीं सौंपने, एनसीपी द्वारा सरकार बनाने से पीछे हटने के कारण अब राज्यपाल कांग्रेस के हाथ में सत्ता जाने की संभावना भी पूरी तरह से खत्म हो गई है।

सूत्रों की माने तो महाराष्ट्र के राज्यपाल कोश्यारी ने स्पष्ट तौर पर इनकार कर दिया कि चौथे नंबर पर खड़ी कांग्रेस को सरकार बनाने का अवसर नहीं दिया जायेगा।

कांग्रेस के नहीं बुलाने के कारण अब महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने का ही विकल्प रह गया है। इधर, कांग्रेस और एनसीपी ने कहा है कि अगर तय समय से पहले राष्ट्रपति शासन लगाया गया तो सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प खुला हुआ है।

दो दिन से भाजपा पूरी तरह से चुप्पी साधे बैठी है, तो दूसरी ओर लगातार चार दिन से महाराष्ट्र कांग्रेस के सभी विधायक जयपुर में सेर सपाटा कर रहे हैं। यहां पर अशोक गहलोत सरकार उनकी मेहमान नवाजी कर रही है।

माना जा रहा है कि कांग्रेस के फेर में डालकर भाजपा ने शिवसेना को अब पूरी तरह से विलेन की भूमिका में ला दिया है। लगता है भाजपा महाराष्ट्र शिवसेना में तोड़फोड़ या 6 माह के भीतर दुबारा चुनाव कर बहुमत में आना चाहती है।