Maota Lake
Maota Lake

—अभी तक पानी नहीं आने और रिसाव के कारणों की रिपोर्ट तैयार नहीं

जयपुर।
विश्व विरासत स्थल और प्रदेश के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थल आमेर का मावठा और सागर को लंबे समय तक पानी के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

कारण यह कि अभी तक मावठे और सागर में पानी नहीं आने और रिसाव के कारणों की रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाई है।

पर्यटन विभाग की ओर से आइकॉनिक आमेर प्रोजेक्ट के तहत यह रिपोर्ट तैयार कराई जानी है, लेकिन अभी इस प्रोजेक्ट की एक ही बैठक हो पाई है।

ऐसे में 2020 से पहले इन झीलों में भरपूर पानी आने की संभावना नहीं दिखाई दे रही है।

आमेर की मावठा और सागर झील में लंबे समय से पानी नहीं आ पा रहा है। जो पानी इन झीलों में आता है, वह भी रिसाव के कारण जल्द ही खत्म हो जाता है।

पर्यटन के लिहाज से इन झीलों का वर्ष भर भरा रहना बेहद जरूरी है, लेकिन अभी तक इसपर काम शुरू नहीं हो पाया है। सागर झील की पाल में तो पूर्व में भी छेद करके सीमेंट पिलाई जा चुकी है।

वहीं एडमा की ओर से मावठे की पाल की भी मरम्मत और सौंदर्यन कराया जा चुका है, इसके बावजूद इन झीलों का रिसाव रुक नहीं पा रहा है।

कहा जा रहा है कि गत वर्ष इन झीलों के सूखने का मामला केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री के जे अल्फोंज तक पहुंच गया था।

इसके बाद आमेर के लिए प्रस्तावित आइकॉनिक आमेर प्रोजेक्ट के तहत इन झीलों के सर्वे का काम कराया जाना तय किया गया।

अभी इस प्रोजेक्ट की एक बैठक हो चुकी है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि चुनाव आचार संहिता हटने के बाद इस प्रोजेक्ट की दूसरी बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हो सकती है।

इसके बाद ही इन झीलों का सर्वे करने, इनको गहरा करने, पानी आवक के रास्ते खोलने, पाल की मरम्मत आदि के कार्य हो पाएंगे।

अभी सही समय
जानकारों का कहना है कि इन झीलों को गहरा करने, मरम्मत करने और पानी आवक के रास्ते खोलने के लिए अभी सबसे सही समय है, क्योंकि अभी इन झीलों में पानी नहीं है और आसानी से इन कामों को अंजाम दिया जा सकता है।

जुलाई में बारिश के समय इन झीलों में फिर से पानी आ जाएगा और तब इनमें काम नहीं हो पाएगा।

कई विभागों का पेंच
पर्यटन विभाग के कार्यकारी निदेशक (कार्य) माधव शर्मा का कहना है कि इन झीलों की मरम्मत व अन्य कार्यों में कई विभागों का पेंच फंसा हुआ है।

इन विभागों में पुरातत्व विभाग, सिंचाई विभाग, नगर निगम, वन विभाग आदि शामिल हैं। ऐसे में सभी विभागों से रजामंदी मिले बिना यहां काम नहीं कराया जा सकता है।

इन झीलों के सभी कामों को आइकॉनिक आमेर प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। प्रोजेक्ट की दूसरी बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित होगी।

जिसमें सभी विभागों के लोग शामिल होंगे। संभावना है कि मार्च 2020 से पूर्व इन झीलों पर काम शुरू हो जाएगा।