Colonel sonaram choudhary mp barmer
Colonel sonaram choudhary mp barmer

जयपुर।

कांग्रेस पार्टी के द्वारा गुरुवार देर रात घोषित 19 उम्मीदवार पहले ही दिन से अपने काम में जुट गए हैं। जयपुर में पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल ने सुबह से ही अपने समर्थकों के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत कीं।

यही आलम अन्य प्रत्याशियों का है। इन पहली सूची के 19 उम्मीदवारों में सबसे अलग और मुश्किल भरी सीट बाड़मेर हो सकती है। यहां पर कांग्रेस ने पूर्व भाजपाई दिग्गज जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्र सिंह को को मैदान में उतारा है।

इससे पहले मानवेन्द्र सिंह दिसम्बर 2018 में झालरापाटन से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। उससे पहले 2013 में मानवेन्द्र सिंह बीजेपी के टिकट पर बाड़मेर के शिव से विधायक थे।

हालांकि, 2014 के आम चुनाव में टिकट नहीं मिलने के कारण मानवेन्द्र सिंह के पिता और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में म मंत्री रहे जसवंत सिंह ने बाड़मेर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था।

उनको बीजेपी के कर्नल सोनाराम चौधरी के आगे पस्त होना पड़ा। कांग्रेस के उम्मीदवार हरीश चौधरी भी 2014 में तब कर्नल सोनाराम चौधरी के सामने चुनाव हारे।

जसवंत सिंह कुछ दिनों बाद एक घटना से कोमा में चले गए, जो आज भी बेड पर हैं। उनको 2014 में टिकट नहीं मिलने के कारण मानवेन्द्र सिंह बीजेपी से नाराज़ हो गए।

वह कभी भी बीजेपी की किसी बैठक में शामिल नहीं हुए। भाजपा ने उनके द्वारा बीजेपी उम्मीदवार कर्नल सोनाराम चौधरी का साथ नहीं देकर अपने पिता जसवंत सिंह का साथ देने के कारण पार्टी से निकाल दिया था।

नवम्बर 2018 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। अब यदि बाड़मेर में बीजेपी किसी अच्छे कैंडिडेट को उतार देती है, और हनुमान बेनीवाल की RLP भी मजबूत उम्मीदवार को टिकट देती है तो मानवेन्द्र सिंह के लिए फिर से जीत दूर हो सकती है।

बेनीवाल की ओर से एससी के उम्मीदवार को टिकट देने की चर्चा चल रही है, ऐसा होता है तो जातीय समीकरण मानवेन्द्र सिंह को भारी पड़ सकते हैं।

हालांकि, बाड़मेर के मुस्लिम, एससी और राजपूतों समेत कई जातियां कांग्रेस को वोट देने वाली मानी जा सकती है। लेकिन बड़े पैमाने पर जाट, बनिया, वैश्य, गुर्जर, राजपूत बीजेपी का कोर वोट बैंक कम नहीं है।

देखना दिलचस्प होगा कि यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला होता है या किसी उम्मीदवार की एक तरफा जीत होती है।