New Delhi: Congress President Rahul Gandhi and senior party leader Sonia Gandhi during the release of party's manifesto for Lok Sabha polls 2019
New Delhi: Congress President Rahul Gandhi and senior party leader Sonia Gandhi during the release of party's manifesto for Lok Sabha polls 2019

जयपुर।

कांग्रेस पार्टी द्वारा 2 अप्रैल को ‘जन आवाज’ नाम से अपना घोषणा पत्र जारी किया है, जिसकी पंच लाइन है, ‘हम निभाएंगे’, लेकिन पिछले चार चुनाव पर नजर डालें तो ऐसा लगता है कि यह पंच लाइन ‘हम दोहराएंगे’ होनी चाहिए थी।

बीते 4 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ऐसे कई वादे करती आ रही है, जो कभी निभाए ही नहीं गए। मजेदार बात यह है कि इनमें से अधिकांश वादे बड़े हैं, जो बिलकुल ही झूठे निकले हैं। आइए देखते हैं 10 बड़े वादे—

—भ्रष्टाचार: भ्रष्टाचार की बातें कांग्रेस पार्टी 2004 से करती आ रही है। 2004 में भ्रष्टाचार विरोधी बिल का वादा भी किया था, फिर 2009 में भी किया। इसके बाद 2009 से 2014 तक कांग्रेस की ही सरकार में भ्रष्टाचार का दैत्य बाहर आया, जिनमें 2जी, कॉमनवेल्थ, कोयला, जमीन खरीद जैसे लाखों करोड़ के गबन घोटाले शामिल हैं।

— महिला आरक्षण: कांग्रेस ने 2004 और 2009 में भी यही वादा किया था। इस बार फिर से लोकसभा और विधानसभाओं के साथ ही सरकारी नौकरी में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का वादा किया है।

—अल्पसंख्यक: इनको लेकर भी कांग्रेस फिर एक वादा कर रही है। 2004 और 2009 में भी कांग्रेस ने कहा था कि सामुदायिक हिंसा पर बिल लेकर आएंगे, लेकिन कुछ नहीं आया। इस बार फिर से एएमयू, जामिया मिलिया अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान बने रहेंगे का दावा किया है।

—किसानों को झांसा: कांग्रेेस ने कहा है कि किसानों के लिए अलग से बजट बनेगा। किसानों को उचित मूल्य मिलेगा, कम लागत और कर्जमाफी का भी वादा किया है। इसी तरह से 2004 में कांग्रेस ने कृषि निर्यात नीति बनाने, एमएसपी को डेढ़ गुना करने का वादा किया था। फिर 2009 में फसल बीमा और एमएसपी का वादा फिर दोहराया गया, किंतु हुआ कुछ नहीं। मोदी सरकार ने 32 फसलों की एमएसपी बढ़ाई, फसल बीमा लागू किया और निर्यात को प्रोत्साहन दिया है।

—दलित और आदीवासी:’ कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि दलितों और आदिवासियों को सशक्त बनाया जाएगा। ऐसे ही कांग्रेस ने साल 2009 और 2014 में नवोदय विद्यालय जैसे संस्थान खोलने का वादा किया था, हुआ कुछ नहीं।

—स्वास्थ्य: कांग्रेस ने कहा है कि स्वास्थ्य पर कुल जीडीपी का 3 प्रतिशत खर्च किया जाएगा। इससे पहले भी कांग्रेस 2004 में कहा था कि जीडीपी का 2—3 फीसदी खर्च किया जाएगा। फिर पांच साल बाद 2009 में कहा और 2014 में भी यही कहा पर हुआ कुछ नहीं।

—शिक्षा: कांग्रेस ने अपने वादों में कहा है कि जीडीपी का 6 फीसदी खर्च करेंगे। साथ ही 12वीं तक की शिक्षा अनिवार्य और फ्री की जाएगी। इससे पहले 2004, 2009 और 2014 में भी इसी तरह के वादे किए, लेकिन अब तक नतीजा सिफर है।

—रोजगार: कांग्रेस ने कहा है कि नरेगा में 100 के बजाए 150 दिन का रोजगार देंगे। साथ ही पंचायतों में 4 लाख पदों को भरा जाएगा। इससे पहले 2004 और 2009 में भी रोजगार को बढ़ाने का वादा किया था, बढ़ाए नहीं।

—बिजली: हर गांव, हर घर को रोशन करने का वादा किया है। पर याद दिला दें कि इसी तरह से कांग्रेस 2004, 2009 और 2014 में भी 100 फीसदी और 90 प्रतिशत घरों में बिजली का वादा किया था, लेकिन 18000 गांवों में बिजली पिछले पांच साल की सरकार ने पहुंचाई है।

—श्रमिक और मजदूर: कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी। इससे पहले कांग्रेस ने 2004 में भी यही वादा किया था। साथ ही कहा था कि स्ट्रीट वेंडर्स को छूट देने का कानूनी बनाया जाएगा, किंतु हुआ कुछ नहीं।