खंडेला विधानसभा क्षेत्र से भाजपा टिकट के लिए दो जाट नेताओं के बीच मुकाबला

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जयपुर/सीकर।

विधानसभा चुनावों में जिलें के खंडेला विधानसभा क्षेत्र में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। इस बार यहां से भाजपा टिकट के लिए वर्तमान विधायक बंशीधर बाजिया सहित पांच नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के समक्ष दावेदारी पेश की है लेकिन भाजपा टिकट की टक्कर प्रमुखता से दो जाट नेताओं के बीच चल रही है।

वर्तमान विधायक बंशीधर बाजिया एवं कद्दावर किसान जाट नेता एवं पूर्व सरपंच भोलूराम दुधवाल में टिकट के लिए रोचक मुकाबला हो रहा है। पार्टी स्तर पर इस बार कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटने की चर्चाएं हो रही है।

प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना एवं केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की अध्यक्षता में पिछले सप्ताह में सीकर में आयोजित हुई पार्टी बैठक में खंडेला क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक राय होकर वर्तमान विधायक बंशीधर बाजिया की टिकट काटने की पुरजोर मांग की है। क्षेत्र से दावेदारों की संख्या ज्यादा होने के कारण वर्तमान विधायक एवं चिकित्सा राज्य मंत्री बंशीधर बाजिया की राह मुश्किल होती दिखाई दे रही है, क्योंकि पार्टी सत्ता में वापसी करने के लिए नये चहरे पर दांव लगा सकती है।

वर्तमान विधायक बंशीधर बाजिया की नकारात्मक कार्यशैली एवं पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी के चलते इस बार पूर्व सरपंच भोलूराम दूधवाल, वरिष्ठ भाजपा नेता एवं व्यवसायी प्रभात जांगू, बलदेव सिंह तथा सरदार सिंह ने अपने समर्थकों के साथ भाजपा टिकट की दावेदारी कर रहे है।

वर्तमान विधायक पर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने भ्रष्टाचार एवं गुटबाजी बढ़ाने के आरोप लगाए है तथा कार्रवाई की मांग को लेकर पार्टी नेताओं को लिखित में शिकायत दर्ज कराई है। कुछ महीने पहले मंत्री बाजिया तबादलों के मामलें में भी अपनी सरकार के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी से उलझ गए थे।

जिसके कारण बाजिया की संगठन स्तर पर किरकिरी हुई थी। इस बार के कार्यकाल में बाजिया का विवादों से खासा जुड़ाव रहा है। बाजिया वर्ष 2003 में हुए विधानसभा चुनावों में खंडेला से निर्दलीय चुनाव लड़ चुके है। जो बाजिया की टिकट कटने कारण बन सकते है।

हालांकि बाजिया अपनी टिकट पक्की मान रहे है और क्षेत्र में पिछले सालों में विधायक रहते कराए विकास कार्यों की दुहाई दे रहे है लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के तेवर कुछ अलग ही बयां कर रहे है। क्षेत्र में जाट मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा होने के कारण दावेदारों में से पूर्व सरपंच भोलूराम दूधवाल का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है।

भोलूराम दूधवाल के पास लंबा राजनीतिक अनुभव है। वे क्षेत्र की दूधवालों का बास ग्राम पंचायत में लगातार 27 साल तक (1978 से 2005) सरपंच पद पर रहे है तथा वर्तमान में साल 2008 से अखिल भारत वर्षीय जाट महासभा के उपाध्यक्ष पद पर है।

जिसके कारण इनकी क्षेत्र के सभी वर्गों में अच्छा तालमेल है। पन्द्रह साल पहले राष्ट्रीय लोकदल ने भोलूराम दूधवाल को यहां से विधायक का चुनाव लड़ाने ऑफर किया था लेकिन पार्टी से जुड़े होने के कारण उन्होंने लोकदल से चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था।

इस बार अभी चुनाव की तैयारी में जुट कर जनसंपर्क में जुट गए है। जनता का समर्थन मिल रहा है। प्रभात जांगू को भी एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। उनकी पार्टी एवं संघ नेताओं में अच्छी पकड़ होने के कारण टिकट के दावेदार हो सकते है।

इस बार पार्टी को अपना प्रत्याशी घोषित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। ये तो समय पर ही तय हो सकेगा कि पार्टी कार्यकर्ताओं का विरोध झेल रहे वर्तमान विधायक बाजिया पर भरोसा करती या फिर किसी नए कि चेहरे पर भरोसा करती है।

लेकिन ये स्पष्ट है इस बार दावेदारों की जमीन हकीकत का आंकलन कर ही टिकट का निर्णय करने वाली है। वैसे कांग्रेस भी हर बार की तरह इस बार भी जाट नेता को ही अपना प्रत्याशी बना सकती है। कांग्रेस से पूर्व विधायक महादेव सिंह, सुभाष मील एवं रामदेव सिंह खैरवा ने दावेदारी जताई है।

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