जयपुर।

भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का चुनाव कर लिया है। पार्टी ने पूर्व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को नेता प्रतिपक्ष बनाया है, जबकि पूर्व संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ को उपनेता प्रतिपक्ष के लिए चुना है।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को केंद्र में उपाध्यक्ष बनाने के बाद प्रदेश की राजनीति में नया चेहरा ढूंढने की कवायद चल रही थी। ऐसा लग रहा था कि किसी युवा को कमान सौंपी जा सकती है, लेकिन अनुभव को तहरीज दी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि कहीं पार्टी ने प्रदेश का पार्टी अध्यक्ष की तरह ही नेता प्रतिपक्ष बनाने में भी गलती तो नहीं कर दी है?

इससे पहले कल नई दिल्ली में राजस्थान के सांसदों और तमाम विधायकों को लेकर आलाकमान के साथ एक बैठक हुई। जिसमें नेता प्रतिपक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष के नाम पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन औपचारिक तौर पर चयन करने के लिए राज्य में बीजेपी विधायकों की एक बैठक बुलाई गई। इसके बाद आज शाम को ही पार्टी ने अपने फैसले से सबको अवगत करवाया है।

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गौरतलब है कि राजस्थान में 2003 से लेकर 2008 तक राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को पार्टी ने केंद्र में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है, जिसके बाद उनकी राजस्थान से सियासत खत्म बताई जा रही है।

इससे पहले पार्टी में 2008 से लेकर 2013 तक के नेता प्रतिपक्ष को लेकर मुख्यमंत्री पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पार्टी के बीच लंबे समय तक तनातनी चली थी, किंतु इस बार इस तरह की कोई भी स्थिति पैदा होती हुई नजर नहीं आ रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का राजस्थान की सियासत से एक तरह से स्थाई तौर पर विदाई हो चुकी है, लेकिन पार्टी के द्वारा उम्रदराज गुलाबचंद कटारिया को नेता प्रतिपक्ष बनाकर क्या संदेश दिया है, यह अभी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में पार्टी अध्यक्ष मदन लाल सैनी हैं, जिनको अधिक ऊर्जावान नहीं कहा जाता है। उम्र के लिहाज से मदन लाल सैनी भी गुलाब चंद कटारिया के लगभग हैं। ऐसे में क्या पार्टी अनुभव को तहरीर दे रही है, या अगले मुख्यमंत्री के तौर पर किसी अन्य युवा को बाद में प्रोजेक्ट किया जाएगा? यह अभी भविष्य के गर्भ में है।

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