Justice pc ghosh
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नई दिल्ली।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पिनाकी चन्द्र घोष (PC Ghosh) को पहला लोकपाल बनाये जाने पर मुहर लग गई है। लोकपाल नियुक्ति समिति ने उनके नाम की आज सिफारिश की है।

इस समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन मशहूर कानूनविद मुकुल रोहतगी ने जस्टिस घोष को लोकपाल नियुक्ति पर अपनी मुहर लगा दी है।

कमेटी में सदस्य लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कमेटी से दूरी बना ली थी। उन्होंने लोकपाल की नियुक्ति से पहले ही इसका बहिष्कार कर दिया था।

27 मई 2017 को सेवानिवृत्त हुए जस्टिस पीसी घोष को जून 2017 में ही मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था। उससे पहले जज घोष कोलकाता उच्च न्यायालय और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं।

जस्टिस घोष सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे। आपको बता दें कि लोकपाल की नियुक्ति को लेकर 2011 में अन्ना हजारे अनशन के साथ देश व्यापी बड़ा आंदोलन कर चुके हैं।

जनलोकपाल का मसौदा सबसे पहले 2013 में किया गया था। इसके मुताबिक किसी भी भ्रष्ट राजनेता या अफसर के खिलाफ 3 महीने के भीतर जांच पूरी करनी होती है।

7 महीने उसका फैसला और 1 साल के भीतर उसे जेल जाने का प्रावधान है। इस विधेयक के मुताबिक लोकपाल संस्था भी चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की तरह स्वतंत्र संस्था होगी, जिसके बनने के साथ ही सीबीआई सीबीआई और सीआईडी इसके अंतर्गत आ जाएगी।

जन लोकपाल विधेयक 2018 में संसद में पास किया गया था। लोकपाल की नियुक्ति के साथ ही इस संस्था के अस्तित्व में आने की संभावना हो गई है।

इस बिल की खास बात यह है कि जो भी अधिकारी या राजनेता भ्रष्टाचार करेगा, उसके द्वारा जो भी नुकसान किया जाएगा उसकी पूर्ति उसकी खुद की संपत्ति में से वसूल की जाएगी।

यदि किसी नागरिक के कार्य में देरी की गई तो संबंधित अधिकारी को इसका मुआवजा देना होगा। ऐसे ही कई विशेष प्रावधानों के साथ जन लोकपाल विधेयक पास किया गया था।

इस संस्था के पहले प्रमुख, यानी पहले लोकपाल जज पिनाकी चंद्र घोष की नियुक्त पर आज मुहर लगा दी गई है, जिसका एलान कल किया जाएगा।