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-केंद्रीय टीम और चिकित्सा विभाग के बीच नहीं है तालमेल

जयपुर।

बीते एक पखवाड़े से स्वास्थ्य विभाग के लिए जीका वायरस जी का जंजाल बन गया है।

पहले लिए गए सभी सैम्पल जयपुर के एसएमएस में जांच करवाने के बावजूद विभाग पुणे की राष्ट्रीय लैब से जांच रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है।

रोजाना भले ही सैम्पल लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हों, किंतु अभी तक इस बीमारी की दवा नहीं बनने के कारण सामान्य बुखार की दवा से उपचार किया जा रहा है।

दुनियाभर के लिए परेशानी का सबब बनी इस बीमारी को लेकर राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम के बीच कोई सामंजशय नहीं होने के कारण बीमारी को लेकर समुचित उपाय करने में भी दिक्क्कत आ रही है।

विभाग का कहना है कि जीका वायरस को लेकर पूरे इलाके में सर्वे कर लिया गया है, यहां तक कि नगर निगम की टीम भी फोगिंग करने के लिए शास्त्री नगर इलाके में डेरा डाले हुई हैं।

केंद्र और राज्य की टीमों के बीच तालमेल नहीं होने के चलते जहां स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं पूरे शास्त्री नगर इलाके के लोग दहशत में जी रहे हैं।

सैम्पल रिपोर्ट नहीं आने और उपचार नहीं होने के कारण दशहत बढ़ रही है। गौरतलब है कि सबसे पहले एक मरीज को जीका वायरस का सस्पेक्ट मानकार उसका सैम्पल लिया गया था।

बाद में तीसरे दिन जांच में 7 और मरीज मिले, जिनकी पुणे लैब से जांच रिपोर्ट आज तक नहीं मिली हैं।

इधर, इलाके की सभी गर्भवती औरतों के जांच सैम्पल लिए गए हैं। बीमारी के दौरान पेट में पल रहे बच्चे के दिमाग पर गहरा असर होता है।

ऐसे में गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। विभाग ने गर्भपात की सभी बातें गलत करार दी हैं।