ghanshyam tiwari and file vasundhara raje
ghanshyam tiwari and file vasundhara raje

जयपुर।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक (आरएसएस) के 45 साल पुराने कार्यकर्ता, जनसंघी और भाजपा गठन के साथ से पार्टी के दिग्गज सिपाही अब कांग्रेस में लोकतंत्री की बांसुरी बजाएंगे।

खुद घनश्याम तिवाड़ी ने स्वीकार करते हुए कहा है कि आज शाम को जयपुर में होने वाली कांग्रेस की रैली के दौरान राहुल गांधी की मौजूदगी में पार्टी का दामन थाम लेंगे।

इसके साथ ही संभावना यह भी बताई जा रही है कि तिवाड़ी को जयपुर शहर से उम्मीदवार बनाया जाएगा। हालांकि, इसके लिए तिवाड़ी ने इनकार किया है।

आज सुबह शुरू हुई चर्चा के बाद भारत वाहिनी के अध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी ने स्वीकार किया है कि वह शाम को कांग्रेस में चले जाएंगे।

राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे राजस्थान नहीं छोड़ना चाह रहीं हैं, इसी के चलते लंबे समय से तिवाड़ी की भी घर वापसी नहीं हो पा रही थी। ऐसे में तिवाड़ी ने अब कांग्रेस का दामन थामने की सोची है।

बकौल तिवाड़ी, वह लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह भी नहीं बताया कि वह नहीं तो उनके परिवार से दूसरा कौन चुनाव लड़ सकता है।

खुद की पार्टी के बारे में अभी फैसला नहीं

इधर, बीते साल ही अपनी पार्टी बनाकर मैदान में उतरे तिवाड़ी ने फिलहाल अपने दल को कांग्रेस में शामिल करने या नहीं करने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है।

बता दें कि भारती वाहिनी पार्टी के नाम से उन्होंने नई पार्टी का गठन किया था और प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन खुद तिवाड़ी समेत एक भी प्रत्याशी जीत नहीं पाया।

लगातार तीन बार सांगानेर से विधानसभा चुनाव जीतने वाले तिवाड़ी इस बार अपनी साख नहीं बचा पाए, उनको केवल 17 हजार वोट मिले थे।

वसुंधरा की दखल मोदी पर पड़ सकती है भारी

सियासी जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी राजस्थान में वसुंधरा राजे का दखल भाजपा और मोदी को भारी पड़ सकता है।

विधानसभा चुनाव में नारा था कि ‘मोदी तुझसे बैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं’। इस नारे का अर्थ यही था कि भाजपा कार्यकर्ता वसुंधरा राजे से नाराज थे।

लोकतंत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए कांग्रेस में शामिल हुए

तिवाड़ी ने कहा है कि देश में तानाशाही का अंत करने और संस्थाओं को बचाने के लिए वह कांग्रेस में शामिल हुए हैं।

उन्होंने कहा कि जिस संकल्प के साथ मैंने भारत वाहिनी पार्टी का गठन किया था, उसके लिए किसी बड़े संगठन की जरुरत थी, वह कांग्रेस ही सबसे उपयुक्त है।

तिवाड़ी ने संघ को लेकर चुप्पी साध ली। पुत्र मोह को लेकर भी उन्होंने साफ कहा कि वह पुत्र मोह रखते हैं, लेकिन राजनीति में नहीं।

तिवाड़ी ने कई सवालों के जवाब नहीं दिए हैं, कहा है कि यह सब भविष्य के गर्भ में हैं। उन्होंने वसुंधरा राजे से नाराजगी को केवल वैचारिक बताया।

आपातकाल को लेकर कांग्रेस के खिलाफ थे

याद दिला दें कि 1975 में देश को आपातकाल में धकेलने वाली कांग्रेस पार्टी का तिवाड़ी ने लगातार मुखर विरोध किया है।

उन्होंने पूरे 40 साल तक इंदिरा गांधी और कांग्रेस की जमकर आलोचना की है। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि अब तिवाड़ी के इस बारे में क्या विचार होंगे?

6 बार विधायक, 2 मर्तबा मंत्री

आपको बता दें कि आरएसएस की पृष्ठभूमि से निकले घनश्याम तिवाड़ी 1983 में भाजपा में शामिल हुए थे। तब से उन्होंने 6 बार विधायक बनने में कामयाबी हासिल की। इसके अलावा 2 बार प्रदेश में मंत्री भी रहे। दो बार लोकसभा का चुनाव भी हारे हुए हैं।

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