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जम्मू कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के बिल को सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में रखा सोमवार को ही शाम को पुनर्गठन बिल पारित हो गया। यह बिल आज मंगलवार को लोकसभा में 151 के बदले 72 वोट से मंजूर कर लिया।

संसद में इस बिल के पास होने के बाद अब राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा और राष्ट्रपति के साइन होने के बाद जम्मू कश्मीर राज्य का पुनर्गठन हो जाएगा।

इसके साथ ही जम्मू कश्मीर से धारा 370 और अनुच्छेद 35a हमेशा के लिए विदा हो जाएंगे।

लोकसभा में बिल को रखते वक्त और दिनभर चर्चा के बाद शाम को बहस पर जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने इतिहास को याद किया तो उसके साथ ही धारा 370 के कारण जम्मू-कश्मीर के विकास को अवरुद्ध करने की बातें तथ्यात्मक तौर पर सदन के सामने रखी।

अमित शाह ने बताया कि धारा 370 जम्मू कश्मीर में केवल 3 परिवारों का पोषण कर रही थी और वहां की गरीब आम आवाम लगातार गरीब से जूझ रही थी।

गृह मंत्री शाह ने यह भी बताया कि 2004 से लेकर 2019 तक केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को करीब तीन लाख करोड़ पर दिए, लेकिन वहां की आम जनता के खाते में ₹2 नहीं दिए।

जम्मू कश्मीर में बड़े पैमाने पर सेना और अर्धसैनिक बल लगाए जाने की बात और वहां पर कर्फ्यू का हवाला देते हुए कई सांसदों ने चिंता जाहिर की। जिस पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि वहां के लोगों को डराने के लिए कृषि नहीं है।

बल्कि किसी भी तरह की संभावित घटना या दुर्घटना को कंट्रोल करने के लिए कर्फ्यू लगाया गया है, जो हालात सामान्य होते ही बहुत जल्द हटा लिए जाएंगे।

उन्होंने 2014 से लेकर अब तक केंद्र सरकार द्वारा दी गई राहत और बजट का भी जिक्र किया। अमित शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगने से अब तक 28 हजार करोड़ से ज्यादा का पैसा राज्य को विकास के लिए दिया जा चुका है और वहां के 40,000 से ज्यादा पंच सरपंच इस पैसे को राज्य के विकास में खर्च कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि धारा 370 की वजह से जम्मू कश्मीर में केवल 3 परिवारों का पोषण हो रहा था और पूरे राज्य की जनता गरीबी से जूझ रही थी, आतंकवाद से लड़ रही थी।

गृह मंत्री ने कहा कि 1988 से लेकर अब तक जम्मू कश्मीर राज्य की रक्षा के लिए 41500 से ज्यादा से ने अपना सर्वोच्च न्यौछावर कर दिया।

कांग्रेस पार्टी के नेताओं और विरोध करने वाले दूसरे सांसदों की सभी आपत्तियां दरकिनार करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य के विकास के लिए और वहां की जनता को 129 कानूनों से महरूम रखा गया है, उनकी भलाई के लिए राज्य पुनर्गठन बिल मंजूर किया जाना बेहद जरूरी है।

दिनभर चाचा के दौरान कांग्रेस के कई सांसदों ने धारा 370 हटाने और अनुच्छेद 35a को निरस्त करने को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया, लेकिन बहस का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने सारी शिकायतें दरकिनार करते हुए जम्मू कश्मीर राज्य के पुनर्गठन बिल को मंजूरी देने के लिए सदन के सामने प्रस्ताव रख दिया।

जिस पर लोकसभा में बिल के पक्ष में 351 और विरोध में 72 वोट पड़े। अब यह बिल राष्ट्रपति के पास जाएगा और उनके हस्ताक्षर होने के साथ ही जम्मू कश्मीर और लद्दाख दोनों अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश हो जाएंगे।

लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी और जम्मू कश्मीर में विधानसभा होगी। जिस तरह दिल्ली में उप राज्यपाल मुख्यमंत्री मंत्री विधायक सभी होते हैं, ठीक उसी तरह से जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश रहेगा।