rojgareshwar mandir jaipur
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—नाराज भाजपा-संघ कार्यकर्ता कह रहे पहले विधायकों को दिखाया आईना, अबके बोहरा की बारी

जयपुर। भाजपा ने जयपुर सांसद रामचरण बोहरा पर एक बार फिर भरोसा जताया है और उन्हें फिर से जयपुर शहर की लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है।

लेकिन, भाजपा-आरएसएस कार्यकर्ताओं के बीच कहा जा रहा है कि इस बार रामचरण बोहरा परकोटे के चक्रव्यूह में फंस गए हैं। इस चक्रव्यूह से बाहर निकलना बोहरा के लिए बहुत भारी पड़ेगा।

बोहरा ने परकोटे के जिन दो पूर्व विधायकों, मोहनलाल गुप्ता और सुरेंद्र पारीक को अपना सारथी बना रखा है, उन्हें यहां के लोग और कार्यकर्ता पहले ही सबक सिखा चुके हैं। ऐसे में परकोटे में भाजपा के हाल खराब होने की संभावना बनी हुई है।

जयपुर परकोटे के कार्यकर्ता राज्य में भाजपा की सरकार के दौरान ओरंगजेब की तरह बर्बरतापूर्वक तोड़े गए हिंदू मंदिरों को लेकर अभी तक नाराज हैं। भाजपा—संघ कार्यकर्ताओं ने अपनी आवाज संगठन और सरकार तक पहुंचाई भी थी।

लेकिन संगठन ने उन्हीं विधायकों, मोहनलाल गुप्ता और सुरेेंद्र पारीक को विधानसभा चुनावों में टिकट दे दिया, जिनपर लगातार मंदिरों को तुड़वाने की सहमति देने के आरोप लग रहे थे।

इससे गुस्साए कार्यकर्ताओं ने जयपुर परकोटे के दोनों विधानसभा क्षेत्रों, किशनपोल और हवामहल के प्रत्याशियों मोहनलाल गुप्ता और सुरेंद्र पारीक को घर बिठा दिया।

भाजपा-संघ कार्यकर्ता अब सांसद रामचरण बोहरा को टिकट मिलने पर सोशल मीडिया पर सक्रिय हो रहे हैं। कार्यकर्ता दोनों विधायकों और सांसद बोहरा की जमकर खिलाफत कर रहे हैं।

बोहरा को पूर्व सांसद गिरधारी लाल भार्गव की तरह बताने पर कार्यकर्ता फेसबुक, व्हाट्सअप पोस्ट कर रहे हैं कि सार्वजनिक रूप से लोकप्रिय होना बहुत बड़ी बात होती है।

कार्यकर्ता गुस्से में हैं और लिख रहे हैं कि बोहरा अभी शायद गिरधारी लाल भार्गव के स्तर पर नहीं पहुंचे हैं। परकोटे में भाजपा सरकार बर्बरता पूर्वक प्राचीन मंदिरों को तोड़ती रही और सांसद बोहरा मूकदर्शक बने देखते रहे।

यही नहीं, सांसद बोहरा सरकारी बैठकों में शामिल होकर मंदिरों को तोड़ने के लिए अपनी सहमति देते रहे। कार्यकर्ता कह रहे हैं कि इनकी जगह अगर गिरधारी लाल भार्गव होते तो वह जनता की आवाज बनकर संगठन और सरकार के आगे खड़े हो जाते।

कहा जा रहा है कि शहर के भाजपा विधायकों और पूर्व विधायकों में सिर्फ परकोटे से हारे हुए पूर्व विधायक ही उनका बोहरा के साथ लगे हुए हैं, जिन्हें कार्यकर्ता पूरी तरह से खारिज कर चुके हैं, अन्य सात विधायक या प्रत्याशी खिलाफपत में हैं।

कार्यकर्ता कह रहे हैं कि यदि रामचरण बोहरा ऐसे लोगों को अपने साथ रखते हैं तो भाजपा के ही सांसद और लोकसभा प्रत्याशी बोहरा को भी खारिज करने में देर नहीं लगेगी।

…और भी कई कारण
सिर्फ परकोटा ही सांसद बोहरा के खिलाफ नहीं है, और भी कई समीकरण उनके खिलाफ काम कर रहे हैं। विधानसभा चुनावों के बाद महापौर उपचुनाव में भाजपा में हुई बगावत भी सांसद बोहरा को भारी पड़ेगी।

जयपुर ​नगर निगम के महापौर विष्णु लाटा भी सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। विष्णु लाटा सांगानेर से विधानसभा टिकट के प्रबल दावेदार थे। तब उन्हें महापौर पद का प्रलोभन देकर रोका गया था।

बाद में भाजपा ने महापौर पद पर मनोज भारद्वाज को आगे कर दिया, जिससे सांगानेर के कार्यकर्ता काफी नाराज हैं। इसके अलावा भाजपा पार्षद दल में हुई बगावत भी बहुत बड़ा कारण है।

इस बगावत के बाद कुछ भाजपा विधायकों ने अपने इलाके के पार्षदों पर निलंबन की कार्रवाई कराई। हालांकि, निलंबित पार्षद कह रहे हैं कि वह मोदीजी के साथ हैं, लेकिन कहने और करने में बहुत अंतर होता है।

अक्सर राजनीतिक दुश्मनियां वोटिंग के दौरान ही निकाली जाती है। अब इन पार्षदों के सामने लोकसभा चुनावों का मौका है, जिनमें वह विधायकों के खिलाफ अपनी दुश्मनी निकालने की कोशिश करेंगे। दोहराय नहीं है कि आने वाला समय बोहरा के लिए चुनौतिपूर्ण होगा।

कांग्रेस मुद्दा बनाने से नहीं चूकेगी
विधानसभा चुनावों के दौरान भी कांग्रेस ने मंदिरों के मुद्दे को उठाया था। उस समय कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट, पूर्व सांसद महेश जोशी ने यह मामला उठाया था।

किशनपोल से कांग्रेसी प्रत्याशी अमीन कागजी तो इस मुद्दे को भुनाने के लिए कई बार छोटी चौपड़ स्थित रोजगारेश्वर मंदिर में धोक लगा आए।

बाद में कागजी ने विधानसभा में भी मंदिरों के मामले में बयानबाजी की और कहा था कि पूर्व सरकार ने परकोटे में बर्बरता पूर्वक प्राचीन मंदिरों को तोड़ा था।

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