india marsh mission cartoon
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Ram Gopal Jat
भारत के लोगों की असीम क्षमताओं के बारे में कहा जाता है कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश, यानी अमेरिका में करीब 40 फीसदी वैज्ञानिक भारतीय मूल के हैं, 60 प्रतिशत डॉक्टर भारत के हैं। ऐसे ही तकरीबन सभी दिमागी गतिविधियों वाले स्थानों पर भारत का कब्जा बढ़ता जा रहा है।

खैर! इसको छोड़कर आगे बढ़ते हैं। भारत बीते कल, यानी 27 मार्च 2019 को ‘लो अर्थ आर्बिट’, मतलब लाइव सेटेलाइट को केवल 3 मिनट में मारकर अंतरिक्ष की महाशक्तियों में शामिल हो गया है।

भारत ने पृथ्वी से 300 किलोमीटर दूर, मतलब पृथ्वी निचली कक्षा में स्थापित एक सेटेलाइट को भारत की एंटी सेटेलाइट मिसाइल ने मार गिराया। यह उपलब्धि हासिल करने पर वाला दुनिया का चौथा देश है।

जिस सेटेलाइट का मारा गया, उसकी रफ्तार 30 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा था। जिस मिसाइल से मारा गया, उसकी स्पीड 24 हजार किलोमीटर थी। उस सेटेलाइट को भारत ने 3 मिनट में अचूक निशाने से मारा है।

इससे पहले अमेरिका ने 20, रुस ने 30 और चीन ने 4 बार परीक्षण करने के बाद यह सफलता हासिल की थी। भारत ने यह सफलता पहले ही प​रीक्षण में पाई है। इससे भारत की एक्यूरेसी दर ज्ञात होती है।

आपको याद होगा 2014 में दुनिया के प्रतिष्ठित अखबार ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में एक कार्टून प्रकाशित हुआ था, जिसमें भारत का एक व्यक्ति ऐलीट स्पेस क्लब में शामिल होने के लिए एक चैम्बर के बाहर खड़ा है।

उसके दूसरे हाथ में गाय की डोरी है। एक हाथ से वह दरवाजा खटखटा रहा है। अंदर बैठे दो वैज्ञानिक अखबार पढ़ रहे हैं। उस कार्टून के बाद भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को लेकर लिखा गया था कि जब तक भारत यह उपलब्धि हासिल नहीं कर लेगा, तब तक कागज का शेर ही रहेगा।

उसके केवल दो साल बाद, यानी फरवरी 2016 में उसी कार्टून को साथ लेकर times of india का एक और कार्टून सामने आया। जिसमें भारत का व्यक्ति गाय के साथ ऐलीट क्लब में बैठा हुआ है। outside दो जने खड़े हैं, जो अपने अपने उपग्रह भारत से अंतरिक्ष में भिजवाना चाहते हैं।

दोनों से पहले चलें तो एक बात चर्चा में फिर आ गई है। बताया जा रहा है कि करीब 1959 में भारत की क्षमताओं को आंकने के लिए अमेरिका ने एक वैज्ञानिक भारत भेजा था।

जिन्होंने इसरो में वैज्ञानिकों से कहा कि क्या आप परमाणु बम बना सकते हैं? इसपर तत्कालीन इसरो प्रमुख भाभा ने कहा था कि एक साल का समय दीजिए, हम तैयार हैं।

लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इनकार कर दिया। बताया जाता है कि तब भी भारत यह उपलब्धि हासिल कर सकता था, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति ने इसको कुचल दिया।

कार्टून की अलग भाष और शैली होती है। यह चित्र बिना शब्दों के बहुत कुछ कह देते हैं। दो साल पहले जिस देश का मजाक बनाया गया, उसी देश ने अगले दो साल में ही 104 उपग्रह एक साथ छोड़कर विश्व रिकॉर्ड बना डाला।

मजेदार बात यह है कि ये कारनामा दुनिया में सबसे कम खर्चे पर हुआ। करीब आधी कीमत में ही भारत ने उपग्रह लॉन्च कर दिए। आज भारत से सस्ता लॉन्चर दुनिया में कोई नहीं है।

मोदी के भाषण और आत्मविश्वास में केवल परीक्षण की शक्ति हासिल करना ही नहीं था, बल्कि शायद 2014 में प्रकाशित कार्टून को भी करारा जवाब था। दुनिया को दिखाने के लिए अब भारत के पास काफी कुछ है।

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