New delhi

विवादित धारा 370 और अनुच्छेद 35a संसद में हटाने का प्रस्ताव पास हो चुका है, जल्द ही इसके लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हस्ताक्षर कर देंगे और जम्मू कश्मीर राज्य पुनर्गठन बिल कानून का रूप ले लेगा।

मंगलवार को लोकसभा में दिनभर बहस के बाद जम्मू कश्मीर राज्य का पुनर्गठन बिल पास हो गया। यह बिल राज्यसभा में सोमवार को पारित हो गया था। लोकसभा में भी 72 के मुकाबले 151 वोटों से बिल पारित हो गया।

गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर राज्य के पुनर्गठन बिल के पास होने पर खुशी जाहिर की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी है।

इससे पहले सुबह जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल को लोकसभा में रखते हुए गृहमंत्री अमित शाह तब गुस्सा हो गए जब कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह मामला भारत का आंतरिक मसला नहीं है बल्कि यूएन का है। हालांकि इस बात को लेकर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की नाराजगी बताई जा रही है।

लेकिन तभी गृहमंत्री अमित शाह ने बहुत साफ करते हुए कहा कि जब वह कहते हैं कि जम्मू और कश्मीर कहते हैं, तब न केवल जम्मू कश्मीर और लद्दाख बल्कि पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर, यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी इसका हिस्सा होता है, यह अभिन्न अंग है।

इतना ही नहीं गृह मंत्री ने कहा कि वह पीओके के लिए जान भी दे सकते हैं। गृहमंत्री के इस तरह सख्त रुख को देखकर पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है।

दिनभर पाकिस्तान में उसे स्तरीय बैठकें होती रही। खुद प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके तमाम मंत्रियों ने विशेष असेंबली बुलाकर चर्चा की।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने आशंका जाहिर की है कि कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद भारत कभी भी पीओके पर आक्रमण करके उसको अपने कब्जे में ले सकता है।

दूसरी तरफ श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने धारा 370 के मसले को लेकर कहा है कि यह भारत का आंतरिक मामला है और इसमें वह किसी तरह की बात करना पसंद नहीं करते हैं।

उल्लेखनीय बात यह है कि गृह मंत्री राजनाथ अमित शाह का जो रुख आज लोकसभा में देखने को मिला, जिस तरह का गुस्सेला स्वरूप देखने को मिला।

उसको लेकर भारत की राजधानी दिल्ली से जम्मू कश्मीर जम्मू कश्मीर से पीओके और पीओके से पाकिस्तान की राजधानी लाहौर तक हड़कंप मचा हुआ है।