Gynecomastia
Gynecomastia

जयपुर।
अक्सर महिलाओं के स्तनों को सुडोल बनाने को लेकर शल्य क्रिया कर उपचार किया जाता है। दुनियाभर में लाखों की तादात में महिलायें खुद को सुंदर और कम उम्र की दिखाने के लिये स्तनों की शल्य क्रिया करवाती हैं। किंतु क्या किसी पुरुष को भी स्तनों सुडोल करवाने की जरुरत पड़ सकती है? भले ही यह सवाल आपको अटपटा लगे, किंतु बहुत बार पुरुषों को भी स्तनों की शल्य क्रिया कर सुडोल किया जाना जरुरी हो जाता है।

गायनेकोमैस्टिया

पुरुषों में स्तनों के बढ़ने को गायनेकोमैस्टिया कहते हैं। वर्तमान वैज्ञानिक आंकड़े बताते हैं कि हर बीस में से एक नौजवान युवक को गायनेकोमैस्टिया की समस्या होती है। सामान्य तौर पर एक पुरुष का सीना बिल्कुल सपाट होता है। सीने की त्वचा सीने की मांसपेशियों से चिपक कर रहती है और निप्पल एरियोला कांपलेक्स चौथी और पांचवी पसली के बीच में होता है। लेकिन अगर किसी भी कारण से निप्पल एरियोला कांपलेक्स के आसपास भारीपन होने लगे तो पुरुष का सीना अपनी सुंदरता खो देता है और कुछ हद तक महिलाओं के स्तनों जैसा दिखने लगता है।

गायनेकोमैस्टिया से होने वाली परेशानी

अधिकांश लड़के इस समस्या को छुपाते हैं। मन ही मन परेशान होते हैं। शर्मिंदगी महसूस करते हैं। लेकिन इलाज कराने की नहीं सोचते जबकि इसका इलाज बहुत ही सरल और स्थाई है।गायनेकोमैस्टिया बीमारी नहीं है। यह एक कॉस्मेटिक समस्या है।

सीने पर इस भारीपन के दो प्रमुख कारण है पहला है अत्याधिक फैट या वसा का जमा होना जिसे हम मोटापा भी कह सकते हैं। मोटापा सिर्फ सीने तक ही सीमित नहीं रहेगा बाकी शरीर पर भी दिखाई देगा। और दूसरा प्रमुख कारण है गायनेकोमैस्टिया। video:

गायनेकोमैस्टिया क्यों होता है?

अधिकतर लोगों में गायनेकोमैस्टिया के होने का कोई विशेष कारण नहीं होता, मगर कुछ लोगों में यह किसी और बीमारी का लक्षण भी हो सकता है।

गायनेकोमैस्टिया प्यूबर्टी के समय पर दिखाई पड़ता है, प्यूबर्टी मतलब, 13 से 16 वर्ष की आयु का वह समय जब लड़का व्यस्क बनने जा रहा है। इस समय शरीर में कई सारे बदलाव आते हैं। दूसरा, गायनेकोमैस्टिया फिर, बुढ़ापे में नजर आता है। वैज्ञानिकी आंकड़े कहते हैं की 50 से 80 वर्ष की आयु के पुरुषों में लगभग 10 में से हर 7 जन को गायनेकोमैस्टिया होता है।

गायनेकोमैस्टिया क्यों होता है यह हम पूरी तरह नहीं जानते। वर्तमान वैज्ञानिकी स्पष्टीकरण यह है कि प्यूबर्टी के टाइम पर लड़के के शरीर में हार्मोन की मात्राओं में जो बदलाव आता है उस कारण कुछ हद तक स्तनों में बढ़ोतरी होती है। वैसे प्यूबर्टी के समय हर पांच में से एक लड़के को स्तनों के आकार में परिवर्तन होगा इनमें से 75% लड़के 2 से 3 वर्ष में अपने आप ठीक हो जाएंगे। बाकी लड़कों में स्तनों के आकार में कुछ हद तक बढ़ोतरी होकर रुक जाएगी है, और ये जीवन भर रहेगी ।

इसके अलावा कुछ बीमारियों में और दवाइयों के साइड इफेक्ट के कारण भी गायनेकोमैस्टिया देखने को मिलता है। एक सरल वाक्य में समझे तो जिन भी बीमारियों में हार्मोन लेवल्स में गड़बड़ी होगी उन सभी में गायनेकोमैस्टिया हो सकता है। इसीलिए गायनेकोमैस्टिया होने पर एक बार डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए ।

गायनेकोमैस्टिया का इलाज

एक बार पुरुष के स्तन ग्रंथी कि बढ़ोतरी हो जाए तो उसे दवाइयों से कम नहीं किया जा सकता ना ही कोई घरेलू नुस्खा काम करता है। इसलिए सबसे पहले तो आप डॉक्टर से मिलें ताकि निर्धारित किया जा सके कि गायनेकोमैस्टिया क्यों हुआ। अधिकांश युवकों में गायनेकोमैस्टिया किसी बीमारी के कारण नहीं होता। लेकिन कुछ लोगों में यह बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। तो सबसे पहले अन्य किसी बीमारी को पकड़ने के लिए कुछ जांचें कराना आवश्यक होता है। अगर कोई और बीमारी पकड़ में आती है तो पहले उसका इलाज कराना जरूरी है।

गायनेकोमैस्टिया भले किसी भी कारण से हो इसका सिर्फ एक ही इलाज है और वह है सर्जरी करके ग्लैंड को हमेशा के लिए शरीर के बाहर निकाल देना। एक बार ग्लैंड ही बाहर निकाल दिया तो फिर यह दोबारा कभी नहीं होता।

सर्जरी के दौरान आप को बेहोश करने की कोई आवश्यकता नहीं होती। सबसे पहले पूरे सीने को सुन्न की सुई लगाकर सुन कर दिया जाता है। सर्जरी के दौरान दर्द नहीं होता।

पहले चरण में हम 2 से 4 सूक्ष्म छेद बना कर लिपोसक्शन पद्धति से सीने पर जमा सारा अतिरिक्त फैट निकाल कर बाहर इकट्ठा कर लेते हैं । यह सीने को एक बढ़िया आकार देने में मदद करता है।

फिर दूसरे चरण में बढ़ी हुई स्तन ग्रंथि को काट करके निकाला जाता है। इसके लिए हम चीरा(Incision) निप्पल एरिओला और त्वचा के जोड़ पर करते हैं, भविष्य में ठीक होने के बाद यह दिखाई नहीं देता, छुप जाता है। स्तन ग्रंथि को बाहर निकालने के बाद इस चीरे को अपने आप गलने वाले अंदरूनी टांकों से बंद कर दिया जाता है। सर्जरी के तुरंत बाद एक कसा हुआ प्रेशर गारमेंट पहना दिया जाता है यह आपकी त्वचा को ठीक करने में मदद करता है।

सर्जरी के पहले तो कुछ विशेष एहतियात बरतने की जरूरत नहीं होती लेकिन सर्जरी के बाद कुछ खास बातों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि सर्जरी सीने की मांसपेशी के ऊपर हुई है और हम चाहते हैं कि त्वचा बढ़िया तरीके से नीचे मांसपेशी पर चिपक जाए तो हम मांसपेशियों को लगभग सात दिन इस्तेमाल नहीं कर पाते। मतलब आप कंधे के जोड़ को लगभग 7 दिन तक बहुत ज्यादा हिला डुला नहीं सकते। किसी भी चीज को ऊपर उठाना, धक्का देना, या अपनी ओर खींचना या फिर किसी भी तरह की कसरत में 3 हफ्ते लगेंगे। त्वचा के भीतर हीलिंग(घाव भरने की प्रक्रिया) लगभग महीने भर में पूरी हो जाती है।

गायनेकोमैस्टिया सर्जरी का लाभ

गायनेकोमैस्टिया कोई गंभीर बीमारी नहीं है। अब सवाल पूछा जा सकता है कि अगर गंभीर बीमारी नहीं है तो ऑपरेशन कराना भी अनिवार्य नहीं होना चाहिए। यह बात बिल्कुल सही है, सर्जरी जरूरी नहीं है। हम गायनेकोमैस्टिया सर्जरी सौंदर्य में बढ़ोतरी के लिए करते हैं। हालांकि सर्जरी नहीं करने का शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा मगर मन:स्थिति पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।

वैज्ञानिकों ने पाया है कि अगर अपने शरीर को लेकर लंबे समय तक मन में कुंठा बनी रहे तो यह धीरे धीरे बालक मन में हीन भावना पैदा कर सकती है । अगर घरवाले बात को नजरअंदाज़ कर दें तो बच्चा किसी से नहीं कह पाता। दोस्त लोग भी मज़ाक बनाते हैं। तैराकी जैसे खेल या व्यायाम जिसमें उघाड़े बदन रहना पड़ता है बच्चा वो नहीं कर पाता।

लंबे समय तक हीन भावना रहे तो डिप्रेशन का रूप ले लेती है। वहीं एक सरल से, मात्र कुछ घंटों के प्रोसीजर से शरीर के आकार को, नार्मल करके, बालक को फिर से कॉन्फिडेंस दिलाया जा सकता है।