ias transfer
ias transfer

नई दिल्ली। आज पूरी ​दुनिया जब अपने काम निकलवाने के लिये भ्रष्टाचार बहाव में बहती हुई चली जा रही है, तब विश्वभर में भ्रष्टाचार के अमरबेल की तरह पनपना को बड़ी बात नहीं कहा जा सकता। दुनिया के 180 देशों में भ्रष्ट की श्रेणी में भारत का स्थान 78वां है। हालांकि, यह पता नहीं है कि यह भ्रष्टाचार का सर्वे केवल 180 देशों में क्यों होता है, बचे हुये 25 देशों को क्यों छोड़ दिया जाता है।

कहा गया है कि भारत ने पिछले कुछ बरसों से इस सूचकांक में कुछ सुधार किया है। अब भारत में रिश्वत देने वालों की संख्या में कमी जरुर आई है, किंतु जिस तरह से मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा दिया था, वह आज भी दूर की कोड़ी ही है। मोदी सरकार का एक कार्यकाल पूरा करने के बाद दूसरे कार्यकाल के 6 माह भी पूरे हो चुके हैं, तब भी अगर भारत भष्टाचार में 78 नंबर है, तो इसका मतलब साफ है कि यहां पर जड़ें बहुत गहरी हैं, या कह सकते हैं कि कर्प्शन भारतवासियों के खून में रचा बसा है।

तमाम तरह के विरोधाभाषों के बीच इसी रंग रंगीले और विविधताओं वाले भारत में ऐसे वीर अब भी जनम ले रहे हैं, जो अपने सिद्धांतों से समझौता किये बिना आगे बढ़ रहे हैं, बल्कि डटे हुये हैं। ऐसी ही शख्सियत हैं हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका।

दो दिन पहले ही हरियाणा सरकार के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका का 52वीं बार तबादला किया गया है। खेमका को अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर लगाया गया है। पहले वे विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के प्रमुख सचिव के तौर पर कार्यरत थे। अशोक खेमका का इस बार तबादला 8 महीने बाद हुआ।

1991 बैच के आईएएस अशोक खेमका का ट्रांसफर मार्च 2019 में हुआ था। अभिलेखागार विभाग भाजपा की राज्यमंत्री कमलेश ढांडा के पास है, जबकि पुरातत्व और संग्रहालय विभाग के राज्यमंत्री जजपा के अनूप धानक हैं। खेमका को लंबे समय से किसी भी बड़े विभाग की जिम्मेदारी नहीं दी गई है।

वर्तमान दूसरी भाजपा सरकार से पहले कांग्रेस की दीपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार में भी आईएएस खेमका का 22 बार तबादला हुआ था। ईमानदारी का आलम यह है कि खेमका जिस विभाग में जाते हैं, घोटाले का खुलासा करते रहते हैं। उन्होंने समाज कल्याण विभाग में हुये घोटाले के कारण उन्होंने 3 लाख बुजुर्गों की पेंशन रोक दी थी। उससे पहले आईएएस खेमका ने बीज विकास निगम में घोटाला पकड़ा था।

अब सोचिये कि कोई आईएएस कितने जलालत सहन करते हुये भी अपने कर्तव्य पथ से डिगा नहीं है? इसके लिये जितनी जलालत सहन की जानी चाहिये, उसके लिये उतनी ही बड़ी असुरक्षा भी साथ चलती है। भ्रष्टाचारियों का कोई धर्म इमान नहीं होता है, और ऐसे में खेमका हमेशा उनके निशाने पर होते हैं।

साल 2015 में जब हरियाणा में भाजपा चुनाव लड़ रही थी, तब उसने आईएएस अशोक खेमका की ईमानदारी और ​दीपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार द्वारा उसके 22 तबादलों को मुद्दा बनाया था, किंतु नतीजा देखिये, हुड्डा सरकार ने खेमका के 22 ट्रांसफर किये तो खट्टर सरकार 5 साल के दौरान 30 तबादले कर चुकी है।

अब खेमका किसी चुनाव में मुद्दा नहीं हैं। उनका भाजपा और कांग्रेस नाम भी नहीं लेती है। ऐसा लगता है दोनों मिल बैठकर खा रहे हैं। वैसे कहा जाता भी है कि राजनीति में राजनीतिज्ञों के काम नहीं रुकते, चाहे सरकार किसी की भी हो। यही हाल है हरियाणा समेत पूरे देश में। पक्ष और विपक्ष मिलकर खेल करते हैं और चुनाव में जाते ही एक दूसरे को भला बुरा कहना शुरु कर देते हैं।