Jaipur

जिन दो चिकित्सा अधिकारियों पर दो अलग-अलग जांचों में दो साबित हो चुका है, वह दोनों अधिकारी मजे से अपने पद पर चांदी कूट रहे हैं, जबकि एक सीनियर आईएएस अधिकारी जिसके खिलाफ केवल आरोप है, उसको सरकार ने सजा भी दे दी।

सरकार ने देर रात फैसला लेते हुए एनएचएम के निदेशक डॉ समित शर्मा का तबादला श्रम विभाग में आयुक्त के पद पर कर दिया।

जबकि सवाई मानसिंह चिकित्सालय की लाइफ लाइन में आग लगाने और करीब 5 करोड़ रुपए की दवा घोटाले को दबाने के लिए किये गये कुकृत्य में दोषी साबित हो चुके उपाधीक्षक डॉ एसएस राणावत और डॉक्टर प्रभात सराफ आज भी अपने-अपने पदों पर कायम है।

राज्य सरकार ने देर रात किए गए तबादलों में आईएएस अधिकारी डॉ समित शर्मा के अलावा भवानी सिंह देथा, विकास सीतारामजी भाले, मुग्धा सिन्हा, सिद्धार्थ महाजन, वीरेंद्र सिंह, पवन अरोड़ा, उज्जवल राठौड़, निकया गोहायन और ओमप्रकाश का भी तबादला किया है।

आपको बता दें कि चिकित्सा विभाग में हेल्थ ऑफिसर की भर्ती के 2500 पदों पर बिना अनुमति भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के आरोप में डॉ समित शर्मा और चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा के बीच बीते 1 सप्ताह से जबरदस्त तनातनी चल रही है।

दोनों के द्वारा बिना नाम लिए एक दूसरे पर आरोप लगाए जा रहे थे। इस बीच राज्य सरकार के द्वारा डॉक्टर समित शर्मा को अपने पद से हटाकर दूसरी जगह ट्रांसफर करना कहीं ना कहीं राजनीति से प्रेरित नजर आ रहा है।

दूसरी तरफ सवाई मानसिंह अस्पताल में स्थिति लाइफ लाइन में लगी आग के 5 करोड़ रुपए से अधिक के दवा खरीद घोटाले की कागजात जलाए जाने के मामले को लेकर अधीक्षक डॉक्टर डी एस मीणा और चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा की अलग-अलग जांच में दोषी सिद्ध पाए जाने के बावजूद उपाधीक्षक एसएस राणावत और डॉक्टर प्रभात सराफ अभी भी अपने-अपने पदों पर काबिज हैं।

उनके खिलाफ सरकार कोई एक्शन नहीं ले पा रही है। चर्चा का विषय यह भी है कि डॉ समित शर्मा अशोक गहलोत के बेहद करीबी होने के बावजूद अपने पद से हटाए जा सकते हैं, जबकि एसएस राणावत को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और डॉ प्रभात सराफ को पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ का करीबी माना जाता है।

बावजूद इसके उनके खिलाफ एक्शन नहीं लिया जाना सरकार की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर रहा है। भर्ती मामले में बिना जांच वरिष्ठ सहायक और एचआर की टीम को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।

गौरतलब यह भी है कि डॉ समित शर्मा को अशोक गहलोत के पूर्वर्ती कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना और मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना को सफलतापूर्वक लागू करने और संचालित करने का श्रेय जाता है।

वर्तमान सरकार में भी अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनते ही एक बार फिर से उसी अंदाज में डॉ समित शर्मा को गहलोत ने दवा योजना की जिम्मेदारी सौंपी थी।

उन्होंने पद पर आते ही दवा योजना को फिर से पुरानी रंगत में लाने का पूरा प्रयास शुरू कर दिया था, लेकिन केवल 5 महीने बाद ही उनका तबादला करके सरकार ने इस योजना पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि कई समाचार पत्रों की खबरों के मुताबिक 2500 पदों पर हेल्थ ऑफिसर की भर्ती की सारी जानकारी चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा के होने के बावजूद उन्होंने इस भर्ती को जानकारी से इंकार कर दिया।

जब परीक्षा थी, तब उसके एक दिन पहले ही भर्ती को रद्द करके खुद को सच्चा साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

चिकित्सा विभाग सूत्रों के मुताबिक 25 पदों पर होने वाली इस भर्ती को लेकर दो-दो लाख रुपए में पेपर बेचे गए थे, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अजमेर जिले से 1 भी पद नहीं होने के कारण डॉ रघु शर्मा को नाराज बताया जा रहा था।

आज से अशोक गहलोत सरकार का बजट सत्र शुरू हो रहा है और विधानसभा में इन दोनों ही मामलों को लेकर विपक्ष के हमलावर होने की पूरी संभावना है।

देखना दिलचस्प होगा कि अशोक गहलोत सरकार विपक्ष के हमलों से कैसे निपटती है