—महाझूठ के मंत्री साबित हो गए चिकित्सा मंत्री

jaipur
राजस्थान के चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा महाझूठ के मंत्री साबित हुए हैं। उनकी सारी पोल उनके ​ही विभाग में एनएचएम निदेशक डॉ. समित शर्मा ने एक अखबार के माध्यम से मंत्री की सारी पोल खोल डाली है।

चिकित्सा विभाग के नेशनल हैल्थ मिशन के तहत 2500 हैल्थ अधिकारियों की भर्ती निकालकर उसे रद्द करने के मामले में मंत्री डॉ. रघु शर्मा का महाझूठ उजागर हो गया। सबसे पहले शनिवार को उन्होंने कहा कि उनको इसकी जानकारी नहीं थी।

उसी दिन एक अखबार से बात करते हुए एनएचएम निदेशक डॉ. समित शर्मा ने कहा कि उनसे गलती हो गई थी, इसलिए उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित सिंह से माफी मांग ली है।

बाद में पता चला कि सारी भर्ती का चिकित्सा मंत्री को जानकारी थी। ऐसे में आज तक यह समझ नहीं आया कि जब एनएचएम निदेशक ने गलती की ही नहीं, तो किस बात की माफी मांग ली?

मजेदार बात यह है​ कि राजस्थान से प्रकाशित होने वाले दोनों प्रमुख कहे जाने वाले हिंदी दैनिक समाचार पत्रों ने एक दूसरे की खबरों का खंड़न करते हुए लगातार खबरें प्रकाशित कर एक अलग तरह का रिकॉर्ड कायम कर दिया है।

पहले शनिवार को 64 साल से प्रकाशित होने वाले एक अखबार ने डॉ. समित शर्मा पर आरोप मंड़ते हुए उनको कटघरे में खड़ा किया। अखबार ने दावा किया कि मंत्री को पता ही नहीं था और अधिकारी ने अपने ही स्तर पर 2500 पदों पर भर्ती निकाल दी।

उसके बाद रविवार को दूसरे प्रमुख अखबार, जिसको राजस्थान में छपते हुए 23 साल हो गए हैं, ने उसका एक तरह खंड़न प्रकाशित करते हुए डॉ. समित शर्मा की जगह चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा को जिम्मेदार ठहरा दिया।

इतना ही नहीं, अखबार ने मंत्री के ट्वीट का हवाला देते हुए उनको सवालों के घेरे में ले लिया। इसी अखबार ने आज तीसरी खबर छापते हुए कहा कि मंत्री और एनएचएम निदेशक डॉ. समित शर्मा पांच दिन तक साथ में विदेश रहे और इस भर्ती की दोनों को जानकारी भी दी है।

प्रदेश के पूर्व चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने कहा कि इससे बड़ा झूठ नहीं हो सकता कि चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा पहले कहते हैं कि उनको जानकारी नहीं थी, और जब उनको ट्वीट याद दिलाया जाता है कि मौन हो जाते हैं।

सराफ ने कहा कि इस बैकार, जलील करने वाली झूठी, उगाही करने वाली इस भर्ती से प्रदेश सरकार को 600 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है, उपर से जलालत हुई है जो अलग है।

बता दें कि हैल्थ अधि​कारियों के 2500 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, जिसके पेटे 30 हजार से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए थे। इस भर्ती में सीट पक्की करने के बदले 2—2 लाख रुपये वसूलने का भी आरोप लगाया गया है।

मजेदार बात यह है कि यह लड़ाई मंत्री और एनएचएम निदेश के बीच है, लेकिन जब एक्शन की बारी आई तो वरिष्ठ सहायक अशोक भंड़ारी और एचआर डिपार्टमेंट के कर्मचारियों को निलंबित​ कर इतिश्री कर ली गई है।

बताया यह जा रहा है कि मंत्री को 2500 पदों की इस भर्ती का पता था, किंतु अजमेर जिले में एक भी पद नहीं होने के कारण वहां के विधायक नाराज थे, जिसकी जानकारी मिलने पर उन्होंने इस भर्ती को रद्द कर दिया।