OBC वर्ग के सामने धर्मसंकट, 15-20 में कैसे करें RAS मैन्स की तैयारी?

127
- नेशनल दुनिया पर विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें 9828999333-
dr. rajvendra chaudhary jaipur-hospital

जयपुर/अजमेर।

राजस्थान हाईकोर्ट के द्वारा आरएएस मुख्य परीक्षा के लिए ओबीसी के उन अभ्यर्थियों को भी शामिल करने का फैसला लिया गया है जो जनरल की 73% से अधिक होने के कारण परीक्षा में बैठने के योग्य नहीं थे।

कोर्ट के इस निर्णय के बाद ओबीसी वर्ग के 99.33% तक के अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने का मौका मिल सकेगा।

आरपीएससी के परिणाम डायरी में व्याप्त विसंगतियों के खिलाफ परीक्षार्थी भूपेंद्र डूडी और सुरज्ञान सिंह समेत अनेक युवा हाईकोर्ट की शरण में गए थे।

RAS परीक्षा का आयोजन 5 अगस्त 2018 को हुआ था, और आरएएस-2018 प्री का परिणाम 23 अक्टूबर2018 को घोषित किया गया।

जिसमें जनरल पुरुषों की कट ऑफ 71.14% रही, जबकि ओबीसी के पुरुषों की 99.33% रही। इसी प्रकार ओबीसी गर्ल्स की 79% कट ऑफ रही।

इसी तरह से एससी 75.14% और एसटी की मेरिट 55.93% रही। सामान्य वर्ग की गर्ल्स की मेरिट 66% रही।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 1 दिसंबर को फैसला करते हुए कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार आरक्षित वर्ग की मेरिट अनारक्षित वर्ग से ज्यादा नहीं हो सकती।

इस निर्णय के बाद अब आरपीएससी को 72% तक के सभी अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल करना होगा। किन्तु परीक्षा 25 दिसम्बर के आसपास होने के कारण ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को तैयार का वक्त नहीं मिल रहा है।

ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना है कि अनारक्षित वर्ग को परीक्षा के लिए 4 महीने का वक्त मिला, जबकि न्यायालय के निर्णय के बाद आरक्षित वर्ग को केवल 15 से 20 दिन की तैयारी का समय मुख्य परीक्षा के लिए मिल रहा है। यह प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है, आरक्षित वर्ग के हितों पर कुठाराघात और धोखा है।

मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं महेंद्र सिंह का कहना है कि आरपीएससी को 8000 विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कम से कम 3 महीने का समय दिया जाना चाहिए, जिससे आरएएस मुख्य परीक्षा की तैयारी हो सके।