-राजकोषीय घाटे ने सरकार की हालत खराब कर दी
जयपुर।

राजस्थान सरकार पर लगातार बढ़ते राजकोषीय घाटे ने नए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की चिंता पैदा बढ़ा दी है।

सरकार पर बोझा बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते किसान कर्जमाफी के बावजूद अभी तक इसके पेटे बैंकों को सर्कूलर नहीं भेजा जा सका है।

सरकारी अनुमान के अनुसार चालू वित्त वर्ष में सरकारी घाटा 5454 करोड़ के मुकाबले 24 हजार करोड़ से उपर पहुंच चुका है।

दरअसल, इस साल के शुरूआत में फरवरी के महीने में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने दूसरे कार्यकाल का 5वां और अंतिम बजट पेश किया थ।

राजे ने भी शायद यही सोचा होगा कि यह बजट उनके लिए एक बार फिर से सत्ता में लौटने का रास्ता तैयार करेगा।

सरकार और सत्ताधारी पार्टी ने कोशिश काफी की, लेकिन ऐसा हो न सका।

वसुंधरा राजे ने फरवरी में अपनी सरकार का अंतिम बजट पेश करते हुए प्रदेश का 1.69 लाख करोड़ का बजट रखा।

इस बजट में किसानों का 50 हजार रुपये तक का कर्ज माफ करने का भी ऐलान किया तो साथ ही इस बजट में नए टैक्स भी नहीं लगाए गए।।

सरकार ने पूरी तरह चुनावी बजट तो पेश किया, लेकिन इसी के साथ प्रदेश में आर्थिक अनुशासन टूटने की भूमिका भी तैयार हो गई थी।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपनी दोनों सरकारों में वित्त मंत्री की भूमिका में भी रहीं।

दूसरे कार्यकाल में तो उन्होंने वित्तीय अनुशासन के लिए खुद की सरकार की पीठ खुद ही खूब थपथपाई।

लेकिन अब वित्त विभाग में जो सर्कुलर जारी किया गया है उसे देखें तो कोई भी वित्त मंत्री कांप उठेगा।

वित्त सचिव ने एक सर्कुलर जारी करते हुए सख्त वित्तीय अनुशासन अपनाए जाने के निर्देश दिए हैं।

इस सर्कुलर में महालेखाकार से मिले अकाउंट्स का हवाला देते हुए कहा गया है कि राजस्व घाटा काफी बढ़ गया है।

सर्कुलर में लिखा है कि बजट में 5454.84 करोड रुपए के राजस्व घाटे का अनुमान लगाया गया था।

लेकिन अक्टूबर 2018 तक यह रकम 11 हजार 828.47 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी थी।

इसी तरह बजट अनुमान में 28 हजार 11.20 करोड़ के राजकोषीय घाटे का आकलन किया गया था, लेकिन अक्टूबर तक ही यह घाटा 24 हजार 557.58 करोड़ रुपए हो चुका है।

सर्कुलर में यह भी लिखा गया है कि पिछले साल, यानी अक्टूबर 2017 तक राजस्व घाटा 836.07 करोड़ रुपए और राजकोषीय घाटा 8669.34 करोड रुपए का ही हुआ था।

वित्त सचिव ने प्रदेश के खर्च में बढ़ोतरी और रेवेन्यू आमदनी में बड़ी कमी पर भी चिंता जताई है।

अभी प्रदेश के राजकोष के हालात की बात करें तो राजस्व खर्च में वृद्धि दर 35.17 फीसदी की रही है, जबकि राजस्व आय में बढ़ोतरी महज 18.26 फीसदी ही हुई है।