नाकामी छुपाने के लिए छात्रों को कर दिया हॉस्टल में बंद है-

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- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary
जयपुर।
राजस्थान की राजधानी जयपुर के बीचो बीच बीते 20 दिन से दहशत का पर्याय बना जीका वायरस सरकारी महकमे के नियंत्रण में नहीं आ पा रहा है।
सरकारी अधिकारियों ने अपनी नाकामी को छिपाने के लिए बीते 3 दिन से जयपुर में राजपूत हॉस्टल के छात्रों को बंद कर दिया गया है।
तमाम मीडियाकर्मी, बाहरी लोग और जो भी छात्रों के परिजन हैछात्राओं के परिजन हैं, उन उनमें से किसी को भी छात्रावास के भीतर नहीं जाने दिया जा रहा है।
इतना ही नहीं, छात्रावास के अंदर 3 दिन से बंद छात्रों को बाहर भी नहीं आने दिया जा रहा है। परीक्षा फार्म भरने का समय चल रहा है। ऐसे में सभी छात्रों के एग्जाम फॉर्म चिकित्सा महकमे के अधिकारी भरने में लगे हुए हैं।
राजस्थान सरकार के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक शास्त्री नगर, सिंधी कैंप और विद्याधर नगर में जीका वायरस के पीड़ित 50 मरीज सामने आ चुके हैं।
पूरी दुनिया में मीडिया के द्वारा सूचना पहुंचने के बाद जयपुर के पर्यटकों में भी कमी आई है। राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लग चुकी है।
ऐसे में सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का प्रयास कर रही है, तो दूसरी तरफ चिकित्सा महकमे के आला अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं।
जीका वायरस का पहला मरीज सामने आने के बाद 10 दिन तक लगातार चिकित्सा महकमे के आला अधिकारी मौके पर जाना भी मुनासिब नहीं समझे।
केंद्रीय चिकित्सा मंत्रालय की टीम प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद जयपुर के शास्त्री नगर इलाके का तीन बार सर्वे कर चुकी है। अब तक करीब 15 सौ लोगों के सैंपल जांच के लिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज भेजे जा चुके हैं, जिनमें से 42 जनों के पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है।
 इलाके में 165 से अधिक गर्भवती महिलाओं केवी सैंपल लिए गए हैं। किसी भी महिला को यहां से बाहर जाने और बाहरी गर्भवती महिला को इस इलाके में दाखिल होने की अनुमति नहीं है।
गौरतलब है कि पूरे देश में जयपुर ऐसा पहला सेंटर बन गया है, जहां पर जिका वायरस के 42 मरीज सामने आए हैं। इससे पहले 2017 में गुजरात में 3 मरीज पॉजिटिव पाए गए थे।
साथ ही कर्नाटक में भी जीका वायरस का एक रोगी पॉजिटिव मिलने के बाद सरकार सकते में आ गई थी।
उल्लेखनीय है कि जीका वायरस के मरीज अक्सर अरब देशों में सामने आते रहते हैं। भारत में से अरब देशों में रोजगार की तलाश में जाकर वापस लौटने वाले मरीजों के साथ यह वायरस आने की संभावना बताई जा रही है।
ज़ीका वायरस डेंगू-मलेरिया के मच्छरों के द्वारा ही एक से दूसरे व्यक्ति के फैलता है। इस वायरस के चलते गर्भ में पल रहे 3 माह तक के बच्चे का मस्तिक अर्थ विकसित होने की संभावना बताई जाती है।