Hanuman beniwal and sachin pilot rajasthan
Hanuman beniwal and sachin pilot rajasthan

रामगोपाल जाट

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Chunav 2019) को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी जीत के साथ विरोधियों पर आरोप प्रत्यारोप के दौर तेज कर रखे हैं।

आज राजस्थान के जोधपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत ने लोकसभा का पर्चा दाखिल किया है। इस मौके पर अशोक गहलोत समेत तकरीबन राजस्थान की पूरी कांग्रेस पार्टी मौजूद रही यहां पर मौजूद रही।

कांग्रेस के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाली केंद्र की सरकार पर जमकर हमले किए आरोप-प्रत्यारोप की इसी कड़ी में बीजेपी ने भी कांग्रेस के खिलाफ अपने सियासी हाथ खोले।

इसी मंच पर उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी में ही प्रतिद्वंदी माने जाने वाले प्रदेश कांग्रेस इकाई के प्रमुख सचिन पायलट ने दावा किया कि वैभव गहलोत को जिताने के लिए दिल्ली में उन्होंने जमानत दी है।

जोधपुर की जनता से समर्थन मांगते हुए सचिन पायलट ने कहा कि आप के दम पर दिल्ली में आला नेताओं को जमानत देकर आये हैं। कहने का मतलब यह है कि सचिन पायलट ने वैभव गहलोत की जीत और हार को अपनी इज्जत के साथ जोड़ लिया है।

इधर, नागौर में आज ही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और और खींवसर से विधायक, जोकि नागौर संसदीय क्षेत्र से एनडीए के उम्मीदवार हैं, उन्होंने एक बार फिर दावा किया है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को कम से कम 2 लाख वोटों से हराकर ही दम लेंगे।

अब आपको याद दिलाते हैं कि कुछ ही दिनों पहले हनुमान बेनीवाल और सचिन पायलट की एक साथ फोटो आई थी। तब बेनीवाल में राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनने के बाद सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने और अशोक गहलोत को सरकार से दूर रखने की शर्त पर अपने तीनों विधायकों का कांग्रेस की सरकार को समर्थन देने का दावा किया था।

लेकिन उसके बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं। कांग्रेस पार्टी की सरकार को 6 निर्दलीय विधायकों ने समर्थन दे दिया और इस तरह से हनुमान बेनीवाल के विधायकों की शायद कांग्रेस को जरूरत नहीं रही।

सचिन पायलट और हनुमान बेनीवाल के बीच सांठगांठ तब खुली, जब विधानसभा चुनाव के परिणाम आए और सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर बेनीवाल खुलकर सामने आ गए।

उन्होंने अशोक गहलोत और सचिन को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर समर्थन देने का भी वादा किया। लेकिन यहां पर सचिन पायलट को गहलोत के आगे सियासी हार मिली और उप मुख्यमंत्री पद तक ही संतोष करना पड़ा। यहां तक कि मंत्रियों और उनके विभागों के बंटवारे में भी पायलट को मुंह की खानी पड़ी।

आज सचिन पायलट के द्वारा जोधपुर में अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत को जिताने और उनकी जीत के लिए दिल्ली में जमानत देने के बाद आए हनुमान बेनीवाल के बयान पर राजनीतिक हलकों में अलग अलग मायने निकाले जा रहे हैं।

हनुमान बेनीवाल का यह पहली बार दावा नहीं है कि वह वैभव गहलोत को हराएंगे। 5 दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी के साथ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का गठबंधन करने वाले हनुमान बेनीवाल ने पत्रकारों के साथ बात करते हुए तुरंत कहा था कि बीजेपी और आरएलपी के कार्यकर्ता मिलकर अशोक गहलोत के बेटे को जोधपुर में बुरी तरह से पटखनी देंगे।

आपको याद दिला दें कि खींवसर से लगातार तीसरी बार विधायक बने हनुमान बेनीवाल ने विधानसभा चुनाव से ठीक 20 दिन पहले रालोपा का गठन कर 57 उम्मीदवार मैदान में उतारे, जिनमें से खुद समेत 3 उम्मीदवार जीतकर विधानसभा पहुंचे।

उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को नागौर, चूरू, सीकर, झुंझुनूं, बीकानेर, बाड़मेर, जोधपुर, जयपुर समेत आधे राजस्थान से करीब 8.50 लाख वोट मिले थे। बेनीवाल की रैलियों में लाखों युवाओं की भीड़ देखकर ही शायद बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में गठबंधन किया है।

बहरहाल, रालोपा संयोजक बेनीवाल दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन कर बड़ी कामयाबी हासिल कर चुके हैं। वो भी तब, जब पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ बेनीवाल के सियासी रिश्ते खराब हों।

राजनीतिक मजबूरियां कहें या अशोक गहलोत के सामने राजनीतिक तौर पर सचिन पायलट के कमजोर होने की परिस्थिति कहें, जो भी हो, लेकिन एक ओर जहां पायलट के लिए वैभव गहलोत को जिताना मजबूरी है।

वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी के साथ गठबंधन के बाद बड़े-बड़े दावे करने वाले हनुमान बेनीवाल को भी अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को हराना जरूरी है।

देखना दिलचस्प होगा कि 23 मई को आने वाले लोकसभा परिणाम के वक्त congress पार्टी के अध्यक्ष सचिन पायलट की इज़्ज़त बच पाती है, या एनडीए के नागौर से उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल खुद जीत और वैभव गहलोत को हरवाकर बड़े नेता बन जाते हैं?