जयपुर।
विश्व प्रसिद्ध “हैला ख्याल” संगीत दंगल 8 अप्रैल 2019 की रात्रि को भवानी पूजन के बाद 9 अप्रैल 2019 की रात्रि से शुरू होने जा रहा है।

यह “हैला ख्याल” लालसोट की एतिहासिक व सांस्कृतिक विरासत, जो 271 वर्षों से चली आ रही परपंरा है। विशाल व भव्य पांङाल मे हजारों लोगों के बीच 90 से 100 कलाकारों (गायकों) का दल जब संगीतमय रचना सुनाता है, तो लोग मंत्र मुग्ध हो जाते हैं।

लगातार 36 घंटे चलने वाले इन ऐतिहासिक मेले में संगीत शुरू करने से पहले ढोल, नगाडे, ढपली, चिमटा, हारमोनियम आदि वाध्य यंत्रो से संगीत की मधुर धुन बजायी जाती है, जिसे संगीत की भाषा मे गजर कहते हैं।

गजर की धुन सुनकर पाण्डाल लोगों से भर जाता है। हैला ख्याल संगीत दंगल मे मनोरंजन तो होता ही है, साथ ही हमारे सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक विशेषकर राजनीतिक गलियारों में क्या हो रहा है, क्या नहीं होना चाहिए, उसका संगीत के माध्यम से सन्देश दिया जाता है।

समय के साथ इस लोकानुरंजन पूर्ण विरासत मे बदलाव भी आए है। इस विश्व विख्यात आयोजन में पहले जहां केवल धार्मिक रचनाए ही सुनाइ जाती थी, लेकिन अब राजनीति मुख्य विषय हो गई है, जिस पर ख्याल पेश किये जाते हैं।

यह एतिहासिक विरासत आने वाली पीढियों तक कैसे पहुचे? कैसे इसका संरक्षण हो, इसके लिए आयोजकों ने सुझाव भी आमंत्रित किए हैं।

इस महा आयोजन को लेकर आज आयोजकों ने पिंकसिटी प्रेस क्लब जयपुर में अध्यक्ष अभय जोशी के हाथों पोस्टर का विमोचन करवाया।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मिथिलेश जेमिनी, शंकर शेखर, “नेशनल दुनिया” के संपादक रामगोपाल जाट, क्लब की कार्यकारिणी सदस्य अनिता शर्मा और राहुल भारद्वाज, ‘जग जाहिर’ के संपादक अरुण कुमार समेत अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे

आयोजन समिति में से एडवोकेट अशोक शर्मा ने बताया कि आयोजन को लेकर पूर्वी राजस्थान ही नहीं, बल्कि इस राष्ट्रीय स्तरीय आयोजन को देखने के लिए देशभर से हज़ारों लोग आते हैं।

अपनी विशेष शैली के कारण इस हैला ख्याल का लोगों को सालभर इंतज़ार रहता है। युवाओं में इसको लेकर एक महीनें से ही जोश चरम पर है।

अधिक खबरों के लिए हमारी वेबसाइट www.nationaldunia.com पर विजिट करें। Facebook,Twitter पे फॉलो करें।