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बुधवार, जून 3, 2020

सोनिया और केजरीवाल के रिश्तों के अलावा लॉक डाउन विफल करने की साजिश का भी खुलासा करता है यह लेख?

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नेशनल दुनिया डेस्क

दिल्ली में विधानसभा चुनाव के वक्त् कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा के द्वारा भाजपा को हराने के लिए गुप्त रुप से अरविंद केजरीवाल के साथ हाथ मिलाने के खूब आरोप लगे थे। भाजपा के नेताओं द्वारा खुलेआम कहा गया था कि केजरीवाल को जिताने और अमित शाह को विफल बताने के लिए कांग्रेस ने चुनाव में समर्पण कर दिया था।

उस बात को खत्म होने के बाद दिल्ली में दंगे हुए और दंगों की राजनीति अभी खत्म ही नहीं हुई थी कि दुनियाभर के साथ भारत में भी कोरोना वायरस के खिलाफ जंग शुरू हो गई। केंद्र की मोदी सरकार ने 24 मार्च की रात को 12 बजे लॉक डाउन का ऐलान कर दिया।

इसके बाद 2 दिन तक सबकुछ शांत रहा और देश को लॉक डाउन का पालन करते हुए देखा गया, किंतु इस बीच चौथे दिन अचानक सोशल मीडिया पर पैदल यात्रियों की बाढ़ आ गई। अगले दिन शाम होते होते तक दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने डीटीसी की बसों का इंतजाम कर लोगों केा दिल्ली की बॉर्डर से बाहर छोड़ना शुरू कर दिया।

नतीजा यह हुआ कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों को अपने राज्यों में बसें लगाकर अपने लोगों को लाने का इंतजाम किया जाने लगा। शनिवार की शाम दिल्ली के आंनद विहार से करीब 40 हजार से लेकर 80 हजार लोग दिल्ली से बाहर चलीे गए।

इस अफरा तफरी के कारण मन की बात में मोदी को फिर जनता से अपील करनी पड़ी कि जनता लॉक डाउन का पालन करें। लेकिन अधिक कोई असर नहीं हुआ तो केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि अपने अपने राज्यों की सीमाएं सील करें।

इस बीच सोशल मीडिया भी अरविंद केजरीवाल के इस कदम पर उनसे सवाल करने लगा। कई आक्रामक लेख सामने आए हैं। एक ऐसा ही लेख हम आपके लिए लाए हैं, जिसमें दावा किया या है कि केजरीवाल ने किस तरह से सोनिया गांधी के साथ मिलकर मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए लोगों को भगाने का गंदा खेल खोला। पढ़िए पूरा लेख—

इटली की फ़िरंगन ने पुनः खेल, खेल दिया…
“सत्ता बिन तड़पती मछली” सत्ता हेतु हर हद, हर चौखट लांघने को तैयार हैं…
“मिचनरीज की ये होनहार खिलाड़ी” मोदी सरकार के लिए… सबसे बड़ी चुनौती के रूप में… पुनः उभरकर सामने आई हैं…
सत्ता के लिए झटपटाती “गौरी चमड़ी” ने लॉक डाउन विफल करने के लिए… धुर विरोधी कंजरवाल से हाथ मिलाने से भी गुरेज़ नही किया.

दिल्ली में हुए पलायन की घटना के लिए मात्र कंजरवाल ही जिम्मेदार नही हैं, बल्कि इसके पीछे कोई बड़ी ताकत और सोच शामिल हैं.

दिल्ली का मामला इतना सरल नही हैं, जितना दिख रहा हैं. इसे सुनियोजित तरीके से चरण दर चरण अंजाम दिया गया हैं. विषय की जड़ समझने के लिए थोड़ा पीछे चलिए.

षड्यंत्र के पहले चरण में 24 मार्च को फ़िरंगन द्वारा प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर मजदूरों के प्रति चिंता व्यक्त की गई.
ये इशारा था, मीडिया को जेब में रखने वाली “शातिर वेटिकन” का, कि गुलाम पत्रकारों अब मालकिन का हुक्म बजाना शुरू कीजिए. ग़रीबी की चाशनी में, भावनाओं को डुबोकर माहौल बनाना शुरू कीजिए.

हुक्म की तामील हुई. ठीक अगले दिन से ABP, NDTV, AAJ TAK, NEWS 24 जैसे मीडिया हाउसेस ने कोरोना छोड़कर मानवता के तराने छेड़ दिये. पत्रकारों का मजदूर प्रेम जाग गया. ये था “इटली की क्रुसेडियन वायरस” का दूसरा चरण.

अभी तक “कोरोना के चरण” और सत्ता हेतु “फड़फड़ाती चील” के चरण की स्टेज समान रूप से दूसरे चरण में थी. लेकिन फ़िरंगन की असली फड़फड़ाहट कोरोना को तीसरे चरण में शीघ्र पहुंचाने की थी.
ताकि “दस लथथप लंका” की ये लंकिनी, लॉक डाउन के विफलता रूपी मुष्टि प्रहार से, सत्ता पर अंगद की भाँति पाँव जमाकर बैठे मोदी को सत्ता से उखाड़ सके.

इटली से भारत आए कोरोना को तीसरे चरण में पहुंचाने के लिए, 24 वर्ष पूर्व भारतीय राजनीति में घुसे, इटली में जन्मे वायरस को किसी वाहक की जरूरत थी. वो वाहक बना धूर्त कंजरवाल. जो हाल ही में मालकिन के सहयोग से दूसरी बार दिल्ली का मालिक बना है.

तीसरे चरण में कंजरवाल द्वारा सुनियोजित अफवाह फैलाकर, कर्फ़्यू के बावजूद dtc बसे चलाकर, मजदूरों का सामूहिक पलायन करवा दिया गया. मकसद था सामूहिक पलायन करवाकर, “सामुदायिक संक्रमण” फैलाकर, देश को कोरोना के तीसरे चरण में प्रवेश करवाना.

मिचनरीज की ये सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर गोरी चमड़ी, एक तीर से तीन निशाने साध रही थी.
पहला कोरोना हाहाकार मचाकर मोदी को बदनाम करना..
दूसरा योगी को घेरना..
तीसरा बिहार में अस्थिरता फैलाकर चुनावी मुद्दा बनाना..

दूर की सोच रखने वाले मोदी भी हैं और “इटालियन क्रुसेडियन” भी. अंतर सिर्फ़ इतना है कि ‘मोदी सोच’ सृजन वाली हैं और ‘फ़िरंगन सोच’ विनाश वाली हैं.

अपने-अपने क्षेत्रों में निपुण इन दोनों योद्धाओं की लड़ाई का परिणाम तय करेगा, भारत का आने वाला भविष्य कैसा होगा.
मोदी का “चौंकाने वाला दांव” जीतेगा या “लाल फन” वाली अत्यंत जहरीली “नागिन की फुफकार”.

बिसात बिछ चुकी हैं, चाले चली जा चुकी हैं. मात्र खेल शह-मात का बचा हैं.

ध्यान रहे.. इटली की फ़िरंगन सेना में मिचनरीज, टुकड़े गैंग, भारत विरोधी ताकते, लाल सलाम, मीडिया, बुद्धिजीवी, सेक्युलर्स, लिब्रल्स, कट्टरपंथी, भांड सेलिब्रिटी शामिल हैं… जबकि मोदी के पास मात्र जनता का विश्वास हैं.

विश्वास कीजिए… सृजन और विनाश की इस लड़ाई में सृजन ही जीतेगा… मोदी की जीत मानवता की जीत होगी..

जय श्री राम..

✍ राकेश गुहा…
जय हिन्दू राष्ट्र

नोट—इस लेख में ‘नेशनल दुनिया’ ने रत्तीभर भी बदलाव नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर जैसे वायरल हो रहा है, बिलकुल वैसा का वैसा ही आपके लिए प्रकाशित किया है।

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Ram Gopal Jathttps://nationaldunia.com
नेशनल दुनिया संपादक .

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