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बुधवार, जून 3, 2020

खुलासा: चीन का जैविक हथियार ही है कोविड-19, पढ़िए सभी तथ्यों से पर्दा उठाती यह विशेष रिपोर्ट

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नेशनल दुनिया डेस्क
कहा जाता है कि जब अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय जापान के हिरोशिमा और नागाशाही पर परमाणु बम गिराये थे, तब हजारों लोग बैवक्त मौत की नींद सो गए थे। आज भी जापान में उस भयावह बमबारी का परिणाम जापान की पीढ़ियां भोग रही हैं।

किंतु उसके बाद जापान जैसे छोटे से देश ने जो प्रण लिया, वो लंबे तक कायम रहा! जापान ने अमेरिका के साथ कोई व्यापारिक रिश्ते नहीं रखे। जापान का कोई प्रधानमंत्री न कभी अमेरिका नहीं गया है और न ही अमेरिकी राष्ट्रपति को आमंत्रित किया गया है।

रिश्तों की इस बर्फ को पिघलाने का कार्य किया वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने। ट्रंप ने सितंबर 2018 को चीन के साथ व्यापारिक बातचीत शुरू की। इसके बाद जापान और अमेरिका के साथ व्यापार शुरू हुआ, किंतु इसका असर पड़ा चीन और अमेरिका के रिश्तों पर।

आज दुनिया कोरोना वायरस से लड़ रही है और चीन सबको अपने यहां से वेंटिलेटर समेत अन्य चिकित्सा उपकरण बेचने पर बैचने है। चीन ने इटली, स्पेन, फ्रांस, भारत समेत अमेरिका को भी कोविड—19 के खिलाफ लड़ाई में सहयोग का प्रस्ताव दिया है।

हालांकि, दुनिया को यह समझ नहीं आ रहा है कि कल तक खुद कोरोना वायरस से लड़ने में नाकाम रहा चीन अब दुनियाभर में चिकित्सा उपकरण की सप्लाई कैसे कर सकता है? चीन के पास यकायक इतने उपकरण कहां से आए?

कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि चीन का यह जैविक हथियार है और उसने इसकी तैयारी तब ही शुरू कर दी थी, जब सितंबर 2018 को अमेरिका और जापान के बीच व्यापारिक रिश्तें की बर्फ बिघली थी।

सर्वविदत है कि चीन और अमेरिका के बीच बड़े पैमान पर व्यापार होता है। आज जितना इलेक्ट्रोनिक उपकरण का निर्यात जापान करता है, उससे अधिक चीन करता है। किंतु यह सबको पता है कि चीन के उपकरण कम गुणवत्ता वाले होने के कारण दुनियाभर में कुख्यात हैं।

ऐसे में अमेरिका ने चीन के बजाए जापान को तहरीज देना शुरू कर दिया। बस, यही से शुरू हो गया था कोरोना वायरस का प्रयोग! दुनियाभर के कई विशेषज्ञ यह आशंका जता चुके हैं कि चीन ने करीब सवा साल तक इस हथियार का विभिन्न जानवरों और मनुष्यों पर प्रयोग किया।

इसका व्यापक असर देखकर तभी से चीन ने इसको दुनिया के उन देशों में फैलाने का फैसला कर लिया था, जो चीन के दुश्मन राष्ट्रों की श्रेणी में आते हैं। फिर क्या था? चीन ने अपने चिकित्सा उपकरण बनाने के उद्योगों को प्रमुखता से उपकरण बनाने का आदेश दे दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि चीन के पास बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर और अन्य जरुरी साजो सामान तैयार पड़ा है। वुहान में जब इस वायरस का विखंड़न हुआ और अपने ही लोग मारे जाने लगे तो चीन ने पहले से तैयार टीके के द्वारा उपचार भी कर दिया।

चीन ने इस दौरान दुनिया को यह भी दिखा दिया कि किस तरह से चीन कुछ ही दिन में अस्पताल और मेडिकल उपकरण बनाने में सक्षम है, ताकि अमेरिका समेत दुनियाभर में यह संदेश जाए कि चीन ने हाल ही में यह सब तैयार किया है।

लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि भारत जैसे देश में भी, जहां पर बडे पैमाने पर लेबर तैयार है, वहां पर भी इतनी तेजी से अस्पताल और जरुरी अन्य उपकरण नहीं बन सकते। ऐसे में चीन के दावे पर सवाल उठते हैं।

अब दुनियाभर में यह मांग उठने लगी है कि चीन के साथ भारत, अमेरिका, इटली, स्पेन, जर्मनी, इरान समेत कोई भी राष्ट्र चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते खत्म करें। इधर, ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि चीन इस बात से घबरा गया है। और ऐसे में आगे बढ़कर भारत जैसे राष्ट्रों की मदद करना चाहता है, जिसके साथ उसके बड़े पैमाने पर निर्यात निर्भर हैं।

अब इस बात का प्रमाण भी आपको देते हैं किस तरह से कोविड19 चीन का जैविक हथियार है? दरअसल, वुहान के अलावा चीन के किसी भी हिस्से में

चीन से अमेरिका की दूरी 11640 किलोमीटर है। चीन से इटली की दूरी 7562 किलोमीटर है। इसी तरह से चीन से जर्मनी की दूरी 7219 किलोमीटर है। चीन से फ्रांस की दूरी 8017 किलोमीटर है। जबकि चीन से स्पेन की दूरी 8783 किलोमीटर है। इसी तरह से भारत भी चीन से करीब 3300 किलोमीटर दूर है।

इन सभी देशों में कोरोना वायरस फैला है। जबकि चीन के वुहान और बिजिंग की दूरी महज 1152 किलोमीटर होने पर भी वहां पर यह वायरस क्यों नहीं पहुंचा? यहां तक कि वुहान से चांगसा की दूरी बेहद कम होने पर भी कोरोना नहीं पहुंचा।

यही स्थिति चीन के अन्य सभी शहरों की है। बावजूद इसके दुनिया के 3 हजार, 4 हजार, 5 हजार, 7 हजार, 8 हजार…. 15 हजार किलोमीटर दूर यह वायरस कैसे चला गया? सवाल कई हैं, जिनको जवाब आने वाले समय में चीन को देने होंगे।

पर तमाम बातों से यह साफ हो गया है कि चीन का ही पैदा किया हुआ कोरोना वायरस अब तक चीन में ही 42 हजार लोगों की जान ले चुका है, जिसको चीन छुपाने में लगा है। चीन के अनुसार वहां पर केवल 3300 मौत हुई हैं।

चीन ने अपने यहां पर बीबीसी को पहले से ही प्रतिबंधित कर रखा है। हाल ही में उसने वॉशिंगटन पोस्ट, न्यूयॉर्क टाइम्स और एक अन्य प्रतिष्ठित मीडिया को बैन कर दिया है। इसके बाद एक बार फिर से चीन की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि तमाम आलोचनाओं के बाद भी भारत ने आजतक बीबीसी को प्रतिबंधित नहीं किया है।

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Ram Gopal Jathttps://nationaldunia.com
नेशनल दुनिया संपादक .

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