कोविड-19-:-भारत-में-सामने-आए-1-हजार-मामले,-909-संक्रमण-से-ग्रसित

नई दिल्ली।
दिल्ली, जयपुर, कोशांबी….ऐसे ही अनैक शहरों से जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, वो भयानक हैं। देश में मानों लॉक डाउन पूरी तरह से खत्म हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल तक लॉक डाउन कर कोरोना वायरस को रोकने का आव्हान किया था।

इसके साथ ही सरकार ने 1.70 लाख करोड़ का पैकेज भी जारी किया। आरबीआई ने भी 3 माह तक किस्तों से मुक्ति और ब्याज में भारी कटौती की, लेकिन इन सब पर पानी फैरने का काम कर रहे हैं राज्य।

दिल्ली के अरविंद केजरीवाल, राजस्थान के अशोक गहलोत समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री अपने राज्यों में मजदूरों को लौटने से रोकने के बजाए उनके लिए बसों की व्यवस्था करने का ऐलान कर कोरोना वायरस को कम्यूनिटी स्प्रीड में तब्दील करने का प्लान तैयार कर दिया है।

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने डीटीसी की 1000 बसें लगा दीं। ऐसे ही गहलोत सरकार ने भी रोडवेज की बसों से गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार में लोगों को छोड़ने का ऐलान कर दिया। बस, फिर क्या था, लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी बसों अड्डों पर।

हजारों की संख्या में लोगों में अपने घर, अपने जिले, अपने राज्य जाने की होड़ लग गई है। नतीजा यह है कि जिस कोरोना वायरस को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने लॉक डाउन किया था, उसके विपरीत भारी भीड़ सारी सीमाएं लांघ रही है।

अगर किसी भी बस में, किसी कोरोना पॉजिटिव ने यात्रा की, तो उसका परिणाम कितना भयानक होगा, इसका अंदाज लगाना भी मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि, एक बस में बैठा व्यक्ति कोई 100, 200, 300, 400, 500 लोगों को पॉजिटिव कर सकता है। ऐसे ही ये लोग कितने हजार लोगों को पॉजिटिव कर सकते हैं, इसका अंदाजा लगाना भी नामुनकिन हो जाएगा।

राज्यों की सरकारें चाहें तो अपने यहां पर सरकारी, निजी स्कूलों, धर्मशालाओं, मंदिरों, मदरसों, मस्जिदों, गुरुद्वारों में रहने—खाने की व्यवस्था कर उनको खाने—पीने का इंतजाम कर सकती हैं। इससे यह भागमभाग नहीं होगी और वास्तव में जो लॉक डाउन का ऐलान किया गया है, वो भी सफल हो सकता है।

सवाल यह उठता है कि सीएए को लेकर हल्ला मचाने वाली सरकारें भी अपने राज्यों में दूसरे राज्यों के लोगों को नहीं रोक पा रही हैं, तो फिर वो किस मुंह से सीएए का विरोध कर सकती है? जो सरकारें अपने ही लोगों को नहीं रोक सकतीं, वो किसी दूसरे देश के मुसलमानों को बुलाने को क्यों आतुर हैं?