नई दिल्ली।

कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण एक तरफ जहां पूरा देश हाहाकार में डूबा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ इसके फायदे भी नजर आने लगे हैं। देशभर में लॉक डाउन के चलते दिल्ली मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहर जो हमेशा प्रदूषित रहते हैं सभी अब सांस लेने जैसे हो गए हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली जैसा शहर जो कभी भी लाल और पीली पट्टी से बाहर नहीं आता था। उसका मानचित्र पूरी तरह से ग्रीन हो गया है, यानी pm10 और 2.5 दोनों अपने सामान्य स्तर पर आ गए हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक प्रदूषण मॉनिटरिंग मैप या एयर क्वालिटी इंडेक्स पर दिल्ली ग्रीन कलर में दिख रही है। यहां पर हमेशा सांस लेने की दिक्कत रहती है लेकिन कोरोनावायरस की जंग के चलते लोगों ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया है और इसकी हवा शुद्ध हो गई है।

जानकारी के मुताबिक दिल्ली आर्थिक सर्वेक्षण 2018 2019 की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2018 तक राष्ट्रीय राजधानी में गाड़ियों की संख्या 1.09 करोड़ थी।

जिसमें से 70 लाख से अधिक दोपहिया वाहन शामिल हैं। दो पहिया वाहन और जीपों की संख्या 32 लाख 46 हजार 637 हैं।

इसके साथ ही ऑटो रिक्शा की संख्या 113074 बताई गई है। करीब 2 करोड लोगों की जनसंख्या वाले इस शहर को बीते लंबे समय में इस तरह कभी भी प्रदूषण से मुक्त नहीं देखा गया है।

एक सर्वे के मुताबिक दिल्ली में दूसरे राज्यों से आठ अलग-अलग एंडप्वाइंट से रोजाना लगभग 1100000 गाड़ियां आती जाती रहती हैं। इसी तरह से टैक्सी गाड़ियां सालाना औसतन 1.45 लाख किलोमीटर चलती है।

दिल्ली की प्रमुख सड़कों पर वाहनों की औसत गति सिर्फ 20 से लेकर 30 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है।