Vodafone-idea दिवालियापन के लिए लगा सकती है अर्जी, jio ने किया पूरा भुगतान

नई दिल्ली।

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा कड़ा रुख अख्तियार करने के बाद देश की सबसे बड़ी मोबाइल नेटवर्क कंपनी वोडाफोन आइडिया ने दिवालियापन के लिए अर्जी दाखिल करने पर विचार शुरू कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को vodafone-idea के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें उसने दूरसंचार विभाग को सोमवार को 2500 करोड़ पर तथा शुक्रवार को 1000 करोड़ पर जमा कराने की पेशकश की थी।

कंपनी ने यह भी अनुरोध किया था कि उसके खिलाफ कोई उत्पीड़न करने वाली कार्रवाई नहीं की जाए तथा उसकी ओर से सरकार के पास जमा कराई गई बैंक गारंटी को नहीं भुनाया जाए।

न्यायमूर्तिगण अरुण मिश्रा, एस अब्दुल नजीर और एमआर शाह की बेंच ने मामले का अवलोकन कर कहा कि यह राशि बहुत कम है, क्योंकि दूरसंचार विभाग की गणना के अनुसार कंपनी की कुल बकाया राशि भुगतान योग्य 53038 करोड रुपए है।

इसमें स्पेक्ट्रम का बकाया तथा पिछले 20 वर्ष की लाइसेंस शुल्क भी शामिल है। कंपनी बकाया राशि का निर्धारण कर रही है, जबकि दूरसंचार विभाग का आकलन इससे काफी ज्यादा है। कंपनी ने कहा कि यदि कोई राहत नहीं मिलती है तो कंपनी बंद करनी पड़ेगी।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने वोडाफोन द्वारा की गई पेशकश के साथ इस मामले का उल्लेख किया। जबकि भारतीय एयरटेल ने अदालत को सूचित किया है कि डीओटी की 35000 करोड रुपए की मांग में से 1000 करोड़ पर का भुगतान कर चुका है।

शुक्रवार को जारी किए गए नोटिस में उसने कहा था कि वह 10000 करोड रुपए भुगतान 20 फरवरी तक तथा शेष राशि का भुगतान 17 मार्च तक कर देंगे, जिस दिन सर्वोच्च न्यायालय में इस केस की अगली सुनवाई होनी है।

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अब तक केवल जिओ ने ही अपनी पूरी बकाया राशि ₹195 का भुगतान किया है। यह राशि यह बकाया राशि अपेक्षाकृत बहुत कम थी, क्योंकि इसे अस्तित्व में आए हुए अभी केवल 2 वर्षीय हुए हैं, जबकि अन्य कंपनियां दो दशकों से बाजार में हैं।

वोडाफोन ने फाइलिंग में कहा जैसा कि 31 दिसंबर 2019 को समाप्त होने वाले तिमाही के कंपनी के वित्तीय विवरण में बताया गया है, एक चालू प्रतिष्ठान के रूप में कंपनी के बने रहने की क्षमता मूलतः सप्लीमेंट्री आर्डर में किंचित बदलाव के लिए लगाई गई अर्जी के सकारात्मक नतीजे पर निर्भर है।

वोडाफोन की तरह ही भारती एयरटेल ने भी कहा है कि हम अपने स्तर पर आकलन को शीघ्र ही पूरा करने की प्रक्रिया में है तथा सुनवाई की अगली तारीख से पहले ही अपनी इस कवायद के पूरा होते ही शेष राशि का भुगतान यथा विधि कर देंगे।