hanuman beniwal narendra modi
hanuman beniwal narendra modi

जयपुर।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने मंगलवार रात को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रात्रि भोज में शामिल होकर भी एक रिकॉर्ड बना दिया।

जिन 36 दलों के नेताओं ने इस डिनर में हिस्सा लिया, उनमें हनुमान बेनीवाल अकेले ऐसा नेता थे, जिन्होंने एक सीट के दम पर दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी और सबसे बड़े गठबंधन का हिस्सा बनने में कामयाबी पाई।

इसको लोग अलग अलग तरह से देखते हैं, लेकिन जब शक्तिशाली व्यक्ति के द्वारा अपने से बेहद कम ओहदे के व्यक्ति को विशेष तौर पर आमंत्रित किया जाता है तो उसके मायने भी बदल जाते हैं।

यही बात बेनीवाल के साथ लागू होती है। नागौर की सीट पर चुनाव लड़ा, उसके अलावा कहीं पर उनकी पार्टी का उम्मीदवार नहीं था। बावजूद इसके बेनीवाल ने राज्य की 7 लोकसभा सीटों पर अपना जलवा दिखाया।

विधानसभा चुनाव में बेनीवाल ने अपने कंधे पर पूरी पार्टी उठा रखी थी। उनपर न केवल प्रदेश के 9.50 लाख से ज्यादा लोगों ने विश्वास जताया, बल्कि 20 दिन पहले जो पार्टी बनी, उसके तीन प्रत्याशी विधायक बन गए।

यह कोई मामूली राजनीतिक घटना नहीं थी। शायद यही कारण था कि भाजपा को, जो कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके पास मोदी जैसे जादूई नेता मौजूद हैं, उसको एक छोटे से किसान—कमेरी कौम के नेता के साथ गठबंधन करना पड़ा।

भाजपाध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मीटिंग ने न केवल हनुमान बेनीवाल का कद बढ़ाया है, बल्कि यह बात भी साफ हो गई है कि अब प्रदेश में उनकी सियासत रफ्तार पकड़ चुकी है।

विधानसभा चुनाव में भाजपा नोटा के तौर पर अपने 4.50 लाख वोट गंवाकर राज्य की सत्ता से बाहर हो चुकी है। बेनीवाल 9.50 लाख वोट पाकर बड़े नेता बन चुके हैं, तो ऐसी स्थिति में कोई भी सियासी दल किसी को कमजोर नहीं मान सकता।

इसी थ्योरी के उपर काम करते हुए भाजपा ने न केवल एक सीट दी, बल्कि पार्टी के स्टार प्रचारक के तौर पर काम लिया। उसका परिणाम भी जोधपुर, राजसमंद, सीकर, बीकानेर, बाड़मेर, जयपुर ग्रामीण, पाली जैसी सीटों पर सामने आएगा।

यह भी देखने वाली बात है कि राजस्थान के 25 उम्मीदवारों में से केवल बेनीवाल ही ऐसे नेता था, जो प्रत्याशी होकर भी इतनी सीटों पर प्रचार कर रहे थे, वह भी भाजपा का हिस्सा नहीं होने के बाद।

हनुमान बेनीवाल की सियासी ताकत शायद अमित शाह और नरेंद्र मोदी को पता थी। नागौर का परिणाम जो भी हो, लेकिन इतना तय है कि यदि बेनीवाल की जीत होती है, तो राजस्थान में फिर से एक किसान कौम के नेता का उदय होगा, और वह भी धूम धड़ाके से।