जयपुर।

राजस्थान में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और सरकार किसकी बनेगी, इसको लेकर प्रदेश के सवा सात करोड़ लोगों की निगाहें टिकी हुई है। मतगणना 11 दिसंबर को होगी तब तक कांग्रेस पार्टी और भाजपा दोनों ही जोड़ तोड़ के सारे गुणा भाग कर रही है।

प्रदेश में जिस तरह के एग्जिट पोल और सर्वे सामने आए हैं, उससे कांग्रेस पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने के लिए अनुकूल समय बताया जा रहा है, लेकिन प्रदेश का मूड 11 दिसंबर को सार्वजनिक हो पाएगा।

इस बीच भारतीय जनता पार्टी लगातार दो दिन से उच्च स्तरीय बैठकें करने में जुटी है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष सचिन पायलट, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी मुख्यमंत्री पद के लिए दिल्ली में जोड़-तोड़ करने का प्रयास कर रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक प्रदेश में नए तो कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिल रहा है और न ही भारतीय जनता पार्टी सत्ता में रिपीट हो रही है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए दोनों ही दलों ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल, बहुजन समाजवादी पार्टी समेत अन्य निर्दलीय विधायकों पर नजर गड़ा दी है।

माना जा रहा है कि राजस्थान विधानसभा चुनाव के परिणाम में कांग्रेस पार्टी बहुमत से कुछ सीटें कम रह सकती है या बेहद कम मार्जिन से बहुमत में आ सकती है। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस से करीब 10 सीट नीचे रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।

इस बीच राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल और अन्य निर्दलीय विधायकों को मिलाकर भाजपा-कांग्रेस के इतर करीब 25 विधायकों के जीतने की संभावनाएं जताई जा रही है।

राजस्थान विधानसभा का इतिहास गवाह है कि जब विधानसभा में 25 30 के करीब निर्दलीय, और थर्ड फ्रंट के विधायक जीत कर आते हैं, तो दोनों ही प्रमुख दलों को बहुमत हासिल नहीं होता है।

ऐसा बीते 25 बरस में दो बार हो चुका है। 1993 और 2008 में दोनों ही पार्टियों को बहुमत नहीं मिला था। ऐसी स्थिति में 1993 में भाजपा और 2008 में कांग्रेस जोड़ जोड़ कर सरकार बनाने में कामयाब हुई थी।

इस बार भी यदि हनुमान बेनीवाल, बहुजन समाजवादी पार्टी और घनश्याम तिवाड़ी के अलावा निर्दलीय विधायकों को मिलाकर विधानसभा में 25 के करीब विधायक जीत कर आते हैं, तो कांग्रेसी और भाजपा दोनों को ही बहुमत नहीं मिलने के आसार लगाए जा रहे हैं।

यदि राजस्थान विधानसभा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के 15 से अधिक विधायक जीतने में कामयाब हो गए, तो दोनों ही पार्टियों के सामने मुख्यमंत्री के चुनाव को लेकर हनुमान बेनीवाल बड़े विकल्प के रूप में उभर सकते हैं।