Jaipur/delhi

एनडीए (NDA) के उम्मीदवार के तौर पर हनुमान बेनीवाल को टिकट देकर भारतीय जनता पार्टी ने अच्छा कदम उठाया, इस बात की उनको खुशी जरूर होगी, लेकिन इसके साथ ही बीजेपी को इस बात का भी मलाल होगा, कि अकेले हनुमान बेनीवाल ने उनके 24 सांसदों को मात दे दी है।

यहां क्लिक करके देखिए हनुमान बेनीवाल का जोरदार स्वागत

लोकसभा चुनाव के कुछ ही समय बाद, जबकि नरेंद्र मोदी सरकार का गठन हो चुका था और मंत्री बन चुके थे, तब एक बार हनुमान बेनीवाल के समर्थकों में निराशा जरूर आई, लेकिन अब सभी समर्थक खुश हैं कि मंत्री नहीं बन पाने के कारण हनुमान बेनीवाल संसद में उसी रौब और उसी अंदाज में दहाड़ रहे हैं, जिस अंदाज में वह विधानसभा में सत्ता पक्ष की हवा ढीली कर दिया करते थे।

राजस्थान के सभी 25 सांसदों में अकेले हनुमान बेनीवाल ही ऐसे सांसद हैं, जिन्होंने अब तक बजट सत्र में तमाम संशोधन बिल और वित्त विधेयक पर खुलकर चर्चा की है चर्चा में भाग लिया है और अपना पक्ष राजस्थान का पक्ष और नागौर का पक्ष मजबूती से संसद में रखा है।

मोदी के मंत्रियों का शपथ ग्रहण, क्लिक करके देखिए

कई बार ऐसे मौके आए हैं, जब उनके बोलने की महारत को देखकर उनके अगल-बगल में बैठे हुए बीजेपी के सांसद जो कि राजस्थान से ही चुनकर गए हैं, वो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अपील करते दिखे कि उनका समय भी हनुमान बेनीवाल को दे दिया जाए।

इनमें से कई सांसद ऐसे भी हैं, जो तीन-चार बार भी चुनकर गए हैं। संसद में किसानों की आवाज से लेकर नागौर में हवाई पट्टी के सामने बनी अवैध होटल तक के प्रकरण में भी हनुमान बेनीवाल ने मुखरता से अपनी बात रखी।

संसद के बाद डीजे पर बेनीवाल का धमाल

राजस्थान में अपराध और अपराधियों पर शिकंजा कसने की बात को लेकर भी बेनीवाल ने संसद में केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

राज्य में बढ़ती बलात्कार, रेप और गैंगरेप की घटनाओं को भी हनुमान बेनीवाल ने मोदी सरकार के सामने उठा कर राज्य की अशोक गहलोत सरकार को बार-बार कटघरे में खड़ा किया।

सांसद बनने से पहले हनुमान बेनीवाल का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू देखिए

राजस्थान के जैसलमेर-बाड़मेर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में, जहां पर पाकिस्तान से टिड्डी दल आता है, वहां की समस्या को भी नागौर सांसद ने बड़ी ही संवेदनशीलता के साथ संसद में रखकर किसानों की आवाज बने।

इसके साथ ही हनुमान बेनीवाल ने विभिन्न बिलों पर चर्चा करते हुए देशव्यापी मुद्दों पर भी अपनी राय रखते हुए पाकिस्तान और आतंकवाद पर एक पार्टी के मुखिया के तौर पर आवाज बुलंद की।

लोकसभा चुनाव के बाद हनुमान बेनीवाल की भविष्यवाणी देखिए

तमाम मुद्दों पर हनुमान बेनीवाल ने तर्क और अध्ययन के साथ अपनी बात को संसद के समक्ष रखा और और केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

इस दौरान एक बात जो सबसे बड़े पैमाने पर उभर कर सामने आई, वह यह थी कि हनुमान बेनीवाल ने दिल्ली में जाकर न केवल लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत तमाम मंत्रियों से नजदीकी संबंध स्थापित किए।

हनुमान बेनीवाल ने अशोक गहलोत को ऐसी हडकाया

इसका फायदा आने वाले समय में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और बीजेपी के संबंध मजबूत करने में होगा, वहीं राजस्थान की समस्याओं को भी प्रमुखता के साथ उठाया जा सकेगा।

हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा चुनाव के वक्त और उसके बाद वादा किया था कि राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगे और इसी प्रयास में हनुमान बेनीवाल जुटे हुए हैं।

एक तरफ जहां राजस्थान के तमाम सांसद अपनी बारी का इंतजार करते रहते हैं, वहीं समस्या सामने आने पर तुरंत प्रभाव से हनुमान बेनीवाल लोकसभा के स्पीकर और सभापति से अनुमति लेकर समस्या को संसद में उठाने से भी नहीं चूकते हैं। यही बात है जो उनको अन्य सांसदों से अलग करती है।

पूरे सत्र के दौरान देखा गया कि हनुमान बेनीवाल संसद में नए केवल मौजूद रहे, बल्कि तमाम समस्याओं प्रकरणों घटनाओं और किसानों की दिक्कतों को लेकर केंद्र सरकार को सचेत किया, उनका ध्यान आकर्षित किया।

राजपूत समाज के साथ हनुमान बेनीवाल का भाईचारा कईयों को अखर गया

एक सांसद के तौर पर जो अपने संसदीय क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण है, वह यह थी कि हनुमान बेनीवाल ने पूरे प्रदेश को अपना मानते हुए समस्याओं को उठाकर केंद्र सरकार से उनका निराकरण करने की अपील की।

2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम के पहले तक हनुमान बेनीवाल राजस्थान तक की सीमित नेता थे, लेकिन अब वह देश के नेता हो गए हैं।

संसद में लगातार आवाज उठाने के बाद बेनीवाल को अच्छे से पता है कि अब उनका कद देशव्यापी हो गया है, इसलिए तमाम राष्ट्रीय मुद्दों पर भी हनुमान बेनीवाल अपनी राय संसद में रखते हैं।

एक पार्टी के नेता होने के नाते हनुमान बेनीवाल को हर एक बिल पर बोलने का अवसर मिलता है और इस अवसर को वे पूरी तरह से भुनाते भी हैं।

हनुमान बेनीवाल ने अशोक गहलोत को ऐसे निपटाया

संसदीय परंपराओं के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी को सबसे अधिक समय मिलता है, उसके बाद उस से छोटी पार्टी को और सबसे छोटी पार्टी को सबसे कम समय बोलने के लिए मिलता है।

लेकिन हनुमान बेनीवाल के पक्ष की बात यह है कि उनकी पार्टी से वह अकेले सांसद हैं, इसलिए 1 मिनट, 2 मिनट, 5 मिनट या 10 मिनट, जो भी वक्त उनकी पार्टी को लोकसभा स्पीकर की तरफ से अलॉट किया जाता है, उस पर वह खुद बोलते हैं और पर्याप्त बोलते हैं।

अधिकांश मौकों पर देखा गया है कि हनुमान बेनीवाल के पास वक्त कम ही होता है और बोलने के लिए उनके पास बहुत ज्यादा शब्द होते हैं, बहुत बड़े मुद्दे होते हैं और राजस्थान के मुद्दों को उठाने के लिए उनके पास संसद परंपरा के अनुसार दिया गया समय कम ही पड़ता है।

चाहे केंद्र सरकार के कार्यों की प्रशंसा हो या विपक्ष की नाकामियां, सभी को लेकर हनुमान बेनीवाल मुखर रहते हैं, बल्कि विधानसभा की जो उनकी कार्यप्रणाली थी, उसी के अनुरूप संसद में भी बोल रहे हैं।

कुल मिलाकर मौजूदा सत्र की बात की जाए तो राजस्थान के 25 सांसदों में हनुमान बेनीवाल स्टार सांसद उभर कर सामने आए हैं।

यह न केवल नागौर के लिए, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए खुशी की बात है कि ऐसे सांसद संसद में मौजूद हैं, जो प्रदेश की तमाम समस्याओं को लेकर अपनी आवाज मुखर करते हैं।