जयपुर।
दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव से ठीक 20 दिन पहले रालोपा का गठन कर 57 सीटों पर उम्मीदवार उतारने और 3 विधायक बनाने वाले नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल और 14 सितंबर 2019 को भाजपा के अध्यक्ष बनाये गये सतीश पूनिया के तूफान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का विमान उड़ जायेगा।

दोनों ही नेताओं के नेतृत्व में यह पहला उपचुनाव है। जबकि, बेनीवाल की लीडरशिप में विधानसभा और लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। दोनों ही चुनाव के वक्त बेनीवाल के आगे कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी।

लोकसभा चुनाव में तो उन्होंने अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को जोधपुर से हराने में महती भूमिका निभाई। इसके साथ ही उनके प्रभाव वाले नागौर में खुद जीते, तो बीकानेर, बाड़मेर, अजमेर, पाली, राजसमंद, सीकर और जयपुर ग्रामीण की सीटों पर भी भाजपा के उम्मीदवारों को जिताने में उनकी खासी भूमिका रही।

अब भाजपा ने संघनिष्ठ माने जाने वाले आमेर के विधायक सतीश पूनिया को कमान सौंप दी है। दोनों नेता खींवसर और मंडावा में होने वाले उपचुनाव की तैयारी में जुट गये हैं। बेनीवाल रविवार को सुबह ही कह चुके हैं कि खींवसर की सीट उनको और मंडावा की सीट भाजपा को का प्रस्ताव वह भाजपा को दे चुके हैं।

अगर ऐसा होता है, तो लगभग दोनों उम्मीदवार जीतने की स्थिति में होंगे। क्योंकि कांग्रेस खींवसर से हरेंद्र मिर्धा और मंडावा से रीटा चौधरी को टिकट दे सकती है। इसका लेकर फैसला सोमवार या मंगलवार तक हो जायेगा।

इधर, इस जीत को लेकर कांग्रेस में अंतर्कलह भी है। माना जा रहा है कि अगर दोनों सीटें कांग्रेस हार जाती है, तो आने वाले समय में अशोक गहलोत का पलडा कमजोर हो जायेगा। जिसका सचिन पायलट लाभ उठाने से नहीं चूकेंगे।

गौरतलब है कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से अघोषित युद्ध चल रहा है। दोनों ही नेता एक—दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास गाहे—बगाहे करते रहते हैं।

बीते दिनों बसपा के सभी 6 विधायक कांग्रेस में शामिल करने का जादू करने वाले गहलोत के सामने अब खींवसर और मंडावा की सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों को जीत दिलाना है।

अगर दोनों जगह कांग्रेस हार जाती है, तो यह न केवल अशोक गहलोत की, बल्कि परोक्ष तौर पर वसुंधरा राजे की भी हार होगी। कहा जाता है कि वसुंधरा राजे के बिना भाजपा जीत नहीं सकती। ऐसे में पहली बार सतीश पूनिया वसुंधरा राजे के बिना पार्टी को जिताकर खुद को साबित भी कर देंगे।

खींवसर से अपने दम पर तीन बार चुनाव जीतने वाले हनुमान बेनीवाल एक बार फिर चमत्कार करने का दावा कर चुके हैं। उन्होंने भाजपा से यह सीट गठबंधन में मांगी भी है।

कहा जा रहा है कि हनुमान बेनीवाल इस सीट पर अपने भाई नारायण बेनीवाल या अपनी पत्नी को मैदान में उतार सकते हैं। किसी पार्टी कार्यकर्ता को मौका देकर बेनीवाल 36 कौम के नेता की छवि भी बना सकते हैं।