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जयपुर। अधिकारी बनने का सपना सभी सरकारी कर्मचारियों का होता है। फिर चाहे वह सफाइकर्मी ही क्यों न हो।

शायद यही चाह कई बार व्यक्ति से गलत काम भी करवा देती है। ऐसा ही एक कारनामा सामने आया है, जिसमें ग्राम सेवकों के द्वारा खुद को ग्राम विकास अधिकारी का दर्जा दिलाने का काम किया जा रहा था।

लेकिन वह फाइल सेंक्शन होने से पहले ही पोल खुल गई। अब राजपत्रित अधिकारियों के सबसे बड़े संगठन, रेसला ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

जानकारी के अनुसार ग्राम सेवकों ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में अपना पदनाम परिवर्तन की एक फाइल चलवाई।

जिसमें इनका नाम ग्राम विकास अधिकारी करना था, किंतु ग्रामसेवक यहीं नही रूके। उन्होंने अपनी योग्यता दसवीं से बारहवीं और फिर स्नातक करवा ली।

ग्राम सेवक संभवत: रौब झाडना के लिए अधिकारी बनना चाहते थे, तो विभाग में एक पत्रावली चला दी।

जिसमें अपना नाम सहायक विकास अधिकारी करने की मांग कर डाली।

इसकी पत्रावली ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के पास अनुमोदन के लिए गई।

मजेदार बात यह है कि उप मुख्यमंत्री ने भी इसको बिना पुर्नरीक्षण करवाए अनुमोदित कर वित्त विभाग को भेज दिया।

रेसला उतरा विरोध में

पत्रावली का पता चलते ही राजपत्रित अधिकारियों का सबसे बडा संगठन, राजस्थान शिक्षा सेवा प्राध्यापक संघ (रेसला) विरोध में उतर आया है।

प्रदेश प्रवक्ता डॉ अशोक जाट ने बताया कि संगठन के प्रदेशाध्यक्ष मोहन सिहाग व महामंत्री सुमेर खटाणा के नेतृत्व में शुक्रवार को रेसला का प्रतिनिधिमंडल अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त निरंजन आर्य से मिला।

उन्होंने ज्ञापन देकर वस्तुस्तिथि से अवगत कराया कि 2100 कर्मचारियों की महत्वाकांक्षा के कारण अन्य संवर्ग के अधिकारी/कर्मचारी नाराज हैं।

चेतावनी दी गई है कि पत्रावली को खारिज नहीं किया गया तो शिक्षा जगत के 4 लाख कर्मचारी राज्यव्यापी उग्र आंदोलन करेंगे, जिसके लिए सरकार खुद जिम्मेदार होगी।

रेसला के प्रांतीय प्रवक्ता डॉ अशोक जाट ने बताया कि इसके चलते ग्रामसेवक और पंचायत प्रसार अधिकारी उक्त नामों से अन्य उच्चतर अधिकारी/कर्मचारियों के बॉस बन गए, जिसे कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा।

इसके चलते अन्य कर्मचारी संवर्गों में वैमनस्यता व्याप्त हो रही है। यह ऐसा कॉम्पिटिशन होगा, जिसकी कोई सीमा नहीं होगी।

इसको खारिज किए जाने की मांग करते हुए रेसला के प्रदेशाध्यक्ष मोहन सिहाग और महामंत्री सुमेर खटाना के नेतृत्व में राज्यव्यापी आंदोलन करने की चेतावनी दी गई है।

यह है असली मामला

विभाग के कर्मचारियों द्वारा सचिन पायलट को इसके दुष्परिणामों और अन्य विभागों मे पडने वाले प्रभावों से अवगत भी नहीं कराया गया।

दरअसल, विभाग में ग्राम सेवक 2400 ग्रेड पे के कार्मिक हैं,, जबकि ग्राम पंचायत में पहले ही पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी, जो कि प्रधानाचार्य या समकक्ष होता है, जो 6600 ग्रेड पे का कार्मिक हैं।

इसके अलावा व्याख्याता (राजपत्रित), वरिष्ठ अध्यापक, अध्यापक, चिकित्साधिकारी (राजपत्रित), वैद्य (राजपत्रित) हैड मास्टर (राजपत्रित), पटवारी आदि पंचायत क्षेत्र के कार्मिक ग्राम सेवक से वरिष्ठ होते हैं।