Jaipur

राजस्थान सरकार ने कहा है कि आदिवासियों से 34 साल पहले वन विभाग के लिए ली गई जमीन 2003 के सर्वे अनुसार पट्टे आवंटित करने के लिए काम करेगी।

इससे पहले डूंगरपुर जिले की बिछीवाड़ा पंचायत समित के पटवार हल्का खजूरी के राजस्व गांव मालमाथा, जगाबोर, झालना, खेड़ापाल, आशियावाव, धर्माओदी, डेडली, खजूरी गांव की करीब 4000 बीघा जमीन जिस पर आजादी से पहले से गरीब आदिवासी लोग निवास कर रहे हैं।

1985 में वन विभाग के नाम हस्तांतरित करने के मामले को चोरासी विधायक राजकुमार रोत ने विधानसभा में प्रश्न के रूप में उठाकर मंत्री से पूछा कि उन समस्त जमीन पर निवासरत आदिवासियों को पट्टा दिया जाने की मंशा रखती है क्या सरकार?

जिस पर राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने बताया कि 1985 में हस्तांतरित हुई समस्त जमीन की प्रशासन द्वारा सन 2003 में करवाई गई सर्वे रिपोर्ट के अनुसार मौके पर काबिज समस्त आदिवासियों को पट्टे दिए जाएंगे।

गौरतलब है कि आदिवासी इलाकों में आदिवासियों की सदियों पुरानी जमीने स्थानीय अधिकारियों के द्वारा विभाग और पूंजीपतियों को आवंटित किए जाने की हजारों शिकायतें सामने आने के बाद सरकार को विधानसभा में बीटीपी के विधायक राजकुमार रोत में घेरने का काम किया है।

34 साल पहले वन विभाग को हस्तांतरित की गई आदिवासियों की जमीन के 2003 की सर्वे के अनुसार पट्टे दिए जाएंगे- हरीश चौधरी 1

इनका कहना है-

हमारे 8 गांवों के मामले को विधायक राजकुमार रोत ने विधानसभा में उठा कर पट्टे दिलाने की कार्रवाई करवाई है, जिस पर पूरी ग्राम सभा मालमाथा की तरफ से विधायक का आभार व्यक्त करती हूं।
राधा देवी भराड़ा,
अध्यक्ष, पेसा एक्ट ग्रामसभा मालमाथा