Jaipur

राजस्थान सरकार के द्वारा राजकीय चिकित्सालय में चिकित्सकों की भारी कमी होने के बावजूद डॉक्टर भर्ती की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद चिकित्सा विभाग ने डॉक्टरों को ठेके पर रखने की तैयारी शुरू कर दिया है।

इससे पहले भी करीब 4 साल पूर्व चिकित्सा विभाग ने इसी तरह का कदम उठाया था, लेकिन कोई भी डॉक्टर आने को तैयार नहीं हुआ था।

अब एक बार फिर से चिकित्सा विभाग वही प्रयास शुरू करने जा रहा है। बता दें कि राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ही हर साल करीब 1000 डॉक्टर पीजी परीक्षा पास करके निकलते हैं।

लेकिन राज्य सरकार के द्वारा उनको राजकीय सेवा में नहीं लिए जाने के कारण यह डॉक्टर प्राइवेट अस्पतालों में चले जाते हैं।

बताया जा रहा है कि राज्य में आज की तारीख में करीब तीन हजार से ज्यादा डॉक्टरों की कमी है। इन 3000 पदों पर अर्जेंट डॉक्टर चाहिए, किंतु राज्य सरकार की खस्ता होती आर्थिक स्थिति के कारण डॉक्टरों की नियुक्ति के की अनुमति नहीं मिल रही है।

इससे चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में मोटी तनख्वाह पर डॉक्टर जॉइन कर रहे हैं और निजी अस्पताल गरीबों को इलाज के बहाने आर्थिक रूप से चूसने का काम कर रहे हैं।

सरकार अब डॉक्टरों को अर्जेंट टेंपरेरी बेसिस पर रखने की तैयारी कर रही है। इनके द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों को रखा जाएगा।

आपको याद दिला दें कि इससे पूर्व तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार के द्वारा भी चिकित्सा विभाग के माध्यम से डॉक्टरों को अर्जेंट टेंपरेरी बेसिस पर रखने का प्रोग्राम शुरू किया गया था, लेकिन डॉक्टरों के द्वारा रूचि नहीं लेने के कारण राज्य सरकार को पीछे हटना पड़ा था।

एक और मजेदार बात यह है कि प्रदेश में डॉक्टरों के लिए पिछली बार निकाली गई भर्ती की परीक्षा के बाद सैकड़ों डॉक्टर नियुक्ति पाने के इंतजार में हैं, लेकिन राज्य सरकार अनुमति नहीं दे रही है।

उसका समाधान करने के लिए चिकित्सा निदेशालय ने अस्थाई तौर पर डॉक्टरों को रखने का फैसला किया है। अब देखना होगा कि दूसरी बार डॉक्टर ठेके पर आने को तैयार होते हैं या नहीं?

मोटी फीस देने और कई बरसों तक मेहनत करने के बाद डॉक्टर तैयार होते हैं और उनको जब राज्य सरकार उचित मेहनताना नहीं देती है तो मजबूरन उनको प्राइवेट अस्पतालों की तरफ रुख करना पड़ता है, यही कारण है कि अर्जेंट टेंपरेरी बेसिस पर डॉक्टर नहीं मिलते।