Jaipur

राजस्थान के अशोक गहलोत सरकार ने अपना सालाना बजट पेश करते हुए प्रदेश के 75000 युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का पिटारा खोला है।

लेकिन मजेदार बात यह है कि बीते साल तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार द्वारा घोषित की गई सरकारी नौकरी में से करीब 40% आज भी अधूरी पड़ी हुई है।

सरकार ने भले ही सरकारी नौकरियों के लिए वादा किया, लेकिन यह नहीं बताया गया है कि यह भर्तियां कैसे होगी, होगी या नहीं होगी या होगी तो कैसे होगी, नहीं होगी तो इनका हश्र कैसा होगा?

आपको बता दें कि पिछले 7 साल के दौरान कई भर्तियों का ऐसा हाल हुआ है कि युवाओं को सरकारी नौकरी पर से ही बस भरोसा उठने लगा है।

याद दिला दें कि वसुंधरा राजे सरकार द्वारा पिछले साल अपना बजट पेश करते हुए राजस्थान में 108000 से ज्यादा सरकारी नौकरियों की घोषणा की थी।

जिनमें से 77000 अकेले शिक्षा विभाग में थी। इन भर्तियों में से करीब 40% भर्तियां आज भी लंबित पड़ी हुई है।

राज्य सरकार के वादे के अनुसार बात करें तो शिक्षा विभाग के द्वारा 77000 भर्तियों में से केवल 54000 पदों पर भर्ती हो सकी है, जिनमें से 33000 पदों पर भर्ती 2017 में निकाली गई थी।

बीते साल फरवरी में वसुंधरा राजे सरकार द्वारा अपना बजट पेश करते हुए 33000 भर्तियों समेत 19000 नए आवेदन मांगे थे, जिनमें से अधिकांश पर नियुक्ति दे दी गई है। अन्य पदों पर अभी भर्ती प्रक्रिया जारी है।

मामले को लेकर राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव कहते हैं कि आज भी एक लाख से ज्यादा पदों पर भर्तियां लंबित हैं।

हाल ही में इन 75000 भर्तियों का जो हाल हुआ है, उससे साफ है कि सरकारी मंशा साफ नहीं है।

इसके साथ ही सरकार सभी भर्तियों का कैलेंडर पहले जारी करें, परीक्षा कब होगी, कब परिणाम आएगा, व नियुक्ति कब नियुक्ति दी जाएगी, यह पूर्व निर्धारित पर क्या होनी चाहिए।

इसके बारे में सरकार बताएं। यदि नहीं बताती है तो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते रहेंगे।

सरकारी भर्तियों के लंबित होने देरी होने और नहीं होने के कारणों के पीछे की पड़ताल की जाती है तो सामने आता है कि अधिकांश भर्तियां सरकारी अधिकारियों की लापरवाही के कारण लंबित रहती है।

बीते साल जिन सरकारी भर्तियों की घोषणा सरकार के द्वारा की गई थी, उनमें से ज्यादातर की परीक्षा हो चुकी है, किंतु आरपीएससी के द्वारा और कर्मचारी चयन बोर्ड के द्वारा 6 से लेकर 8 महीनों में भी परिणाम जारी नहीं किया गया।

कई भर्तियां प्रश्नों कटने, गलत प्रश्नों और आरक्षण के विवाद के कारण हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अटक गई। इधर ईडब्ल्यूएस और एमबीएस आरक्षण लागू होने के बाद रिजर्वेशन के कारण भी कई भर्तियां अटकी पड़ी है।

परीक्षा की तिथि घोषित होने के बाद कई परीक्षार्थियों को रद्द कर दिया गया है। उपेन यादव का कहना है कि सरकार से भर्तियों को जल्द जारी करवाने के लिए एक कमेटी गठित करने की मांग की गई है।

इसके साथ ही कमेटी में सरकारी अधिकारी राज्य सरकार के मंत्री और बेरोजगारों के प्रतिनिधि शामिल होने की भी मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि यह कमेटी भर्तियों को लेकर तमाम मॉनिटरिंग करेगी, समस्त भर्तियों को सही समय पर पूरी करवाने के लिए काम करेगी। इस वर्ष बजट में भर्तियों पर राज्य सरकार ने कार्रवाई शुरू की है।

राजस्व विभाग की 4856 पदों पर भर्ती को मंत्री हरीश चौधरी के द्वारा हाल ही में मंजूरी देकर युवाओं को तोहफा देने का काम किया गया है। बताया जा रहा है कि यह भर्ती बहुत जल्द पूरी कर ली जाएगी।