कोर्ट में मामला होने पर भी मन्दिर के लिए कानून बना सकती है संसद-चेलामेश्वर

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- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

नई दिल्ली।

इस साल के शुरुआत में वर्तमान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत जिन चार जजों ने तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, उनमें से एक जज ने केंद्र की मोदी सरकार के लिए राहत भरा बयान दिया है।

देश में राम मंदिर निर्माण को लेकर जारी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश (रिटायर्ड) जस्टिस चेलामेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बीच कानून बनाने के लिए संसद को अधिकार की बात कहकर बीजेपी को विधानसभा चुनाव और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले कानूनी संजीवनी दी है।

जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा है कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कोई मामला लंबित होने के बावजूद भारतीय संसद यदि चाहे तो कानून बनाकर अपना काम कर सकती है, इसमें कोर्ट के अधिकारों पर कोई आंच नहीं आएगी।

चेलामेश्वर ने कावेरी विवाद को लेकर कर्नाटक सरकार द्वारा पूर्व में बनाए गए कानून और राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के बीच हुए नदी जल विवाद को लेकर उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के संसदीय इतिहास में कई ऐसे मौके आ चुके हैं।

जस्टिस चेलामेश्वर ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस (AIPC) में वक्ता के तौर पर बोल रहे थे। उनसे अयोध्या राम मंदिर के लिए मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के बावजूद सरकार द्वारा कानून बनाने के अधिकार को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह महत्वपूर्ण बयान दिया।

जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि भारत के इतिहास में कई ऐसे उदाहरण हैं, जो बताते हैं कि शीर्ष कोर्ट में मामला होने के बावजूद सरकारें यदि चाहें तो कानून बनाकर अपने काम कर सकती हैं।

गौरतलब है कि आरएसएस और बीजेपी के कई नेता सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अयोध्या मामले पर सुनवाई तेज करने और करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द फैसला देने की सलाह दे चुके हैं।

इधर, योग गुरु बाबा रामदेव ने आज आरएसएस के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि कोर्ट में यदि फैसला नहीं होता है, तो सरकार कानून बनाकर अयोध्या में राम मंदिर बना सकती है, उसको बनाना भी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई द्वारा अयोध्या मामले की सुनवाई जनवरी, फरवरी या मार्च में…या फिर कभी करने की टिप्पणी करते हुए कहा था कि उनकी प्राथमिकता में कई अन्य कई मामले हैं, जिनको पहले सुनना जरूरी है।

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