—राजस्थान में 27 में से 12 विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर नहीं है, जबकि शिक्षकों के 50 प्रतिशत पद रिक्त हैं

jaipur
राजस्थान सरकार ने कुलपतियों के रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने 27 विश्वविद्यालयों में से 12 में कुलपति नहीं है, जिनमें से 7 के लिए विज्ञापन जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जबकि इन्हीं विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 50 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं, जिनको भरने से लिए सरकार अनुमति ही नहीं दे रही है।

राज्य के विश्वविद्यालयों में पद रिक्त होने के कारण पढ़ाई नहीं हो रही है, जबकि रिजल्ट और परीक्षा में भी देरी होती है। इतना ही नहीं इसके चलते शोध और शैक्षणिक कार्य भी बुरी तरह से प्रभावित हैं।

राजस्थान में यूनिवर्सिटीज में शिक्षकों के 4498 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 2256 पद रिक्त पड़े हैं। मतलब यह है कि करीब आधे पदों पर शिक्षक हैं ही नहीं।

इसके साथ ही 27 में से 12 विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद खाली होने के कारण उनका काम कार्यवाहक कुलपतियों के भरोसे चल रहा है, जो आधे से भी कम वक्त वहां पर जाते हैं।

राजस्थान में एकमात्र संसकृति विवि, जगद्गुरू रामानंदाचार्य यूनिवर्सिटी, जोधपुर का आयुर्वेद विवि, कोटा का वीएमओ, अलवर का मत्स्य विवि, कोटा का ​तकनीकी विवि, सरदार पटेल खेल विवि, श्रीकर्ण नरेंद्र कृषि विवि जोबनेर और सभी पाचों कृषि विश्वविद्यालयों में कुलपति नहीं हैं।

राजस्थान विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 976 स्वीकृत पदों में से 509 पद खाली पड़े हैं। इसी तरह से मोहनलाल सुखाड़िया विवि में 259 में 138 पद रिक्त हैं।

संस्कृत विवि में 44 में से 20 पदों पर शिक्षकों का इंतजार है। इसी प्रकार कोटा के तकनीकी विवि में भी 261 में से 119 पदों पर शिक्षकों की भर्ती होनी है। आरयूएचएस में भी 263 में से 66 पदों पर शिक्षक नहीं हैं।

इधर, यूजीसी ने पिछले दिनों ही सभी विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर कहा था कि उनके यहां पर शिक्षकों के रिक्त पदों को अगले 6 माह के भीतर भरा जाए, वरना यूजीसी से मिलने वाली ग्रांट रोक दी जाएगी।

इसके बावजूद सरकार के जूं तक नहीं रेंग रही है। बताया जा रहा है कि यूजीसी के पत्र को सरकार दबाकर बैठी है, वहां से अनुमति मिले तब विवि रिक्त पदों पर भर्ती निकाले।